ऑपरेशन सिंदूर के बाद हमारी परिस्थितियां पूरी तरह से बदली है, हमारी किसी भी तरह की कोई संबंध या द्वार नहीं रह गया है. हम अपने परंपरागत तरीके से अपनी परेड को यथावत 1961 से वैसे ही मनाते आ रहे हैं. हमारी परंपराएं स्थिर हैं और हम उन्हें पूरी श्रद्धा और सम्मान से निभाते हैं.