कल देश के लोकतंत्र के इतिहास में एक कलंक लगा जब महामहिम राष्ट्रपति के अभिभाषण का सम्मानपूर्वक उत्तर नहीं दिया गया. यह जवाब अनादर के समान था, खासकर जब वे एक अनुसूचित जनजाति से थे. इस घटना ने उस पद की गरिमा को ठेस पहुंचाई है. इसके साथ ही नर्वाना की किताब और इंडो-अमेरिकन डील के मुद्दे पर यह भी आरोप लगाया गया कि किसानों के हितों को अमेरिका के बाजार के सामने बेचा गया है.