इस केस की सबसे बड़ी समस्या यह है कि हमारी न्यायपालिका के पास ऐसा वक्त कैसे होता है कि वे इन बातों पर फैसला लागू करें और इस प्रकार के मामलों को देख सकें जबकि हमारे देश में अब तक तीन करोड़ पचास लाख से अधिक केस लंबित हैं. कई ऐसे मामले अदालतों में हैं जिनमें आरोपी वाकई में दोषी नहीं हैं लेकिन उन्हें गिरफ्तार कर जेल में रखा गया है. वे हर सुनवाई की तारीख का इंतजार करते हैं यह उम्मीद लेकर कि उन्हें जल्द कोई साफ फैसला मिलेगा और वे अपनी आजादी वापस पाएंगे.