ममता बनर्जी इस समय गहरी हताशा और निराशा के बाद छटपटा रही हैं. उनकी यह छटपटाहट बिलकुल उस मछली की तरह है जो बिना पानी के तड़पती है. सत्ता जाने की यह बेचैनी उनके मन में गहरी उलझन और घबराहट की स्थिति उत्पन्न कर रही है. यह छटपटा भागना उनकी बौखलाहट और असंतोष का स्पष्ट संकेत है. राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के बीच ममता बनर्जी की यह स्थिति काफी गंभीर और चिंताजनक लग रही है. उनकी भावनाओं में व्याप्त यह अनिश्चितता और बेचैनी राजनीति की जटिलताओं को स्पष्ट रूप से दर्शाती है.