इस बार के चुनाव में लोग अपने वोट का इस्तेमाल प्रतिशोध लेने के लिए कर रहे हैं। पिछले पांच महीनों में केंद्र सरकार और चुनाव आयोग ने जनता के साथ कई ऐसे फैसले और प्रक्रियाएं अपनाईं जिनसे लोकतंत्र को ठेस पहुंची है। इसके चलते नागरिकों में गुस्सा और नाराजगी है और वे इसका जवाब चुनाव के माध्यम से देना चाहते हैं। हाल ही में हुए पहले चरण के चुनावों में भी यही भावना देखने को मिली है। लोग चाहते हैं कि उनकी इस प्रतिक्रिया को सही मायनों में समझा जाए और लोकतंत्र की रक्षा हो। इस चुनाव में केवल राजनीतिक सफलताएं नहीं बल्कि जनता की असंतुष्टि और क्रोध भी झलक रहा है। चुनाव आयोग और सरकार को भी इस बात का एहसास होना चाहिए कि लोकतंत्र की मर्यादा और जनता की भावनाओं को नजरअंदाज करना सही नहीं होगा।