ग्लोबल वैल्यू चैन में चर्चा के अनुसार, अब अमेरिकी चावल भारत में आयात नहीं हो पाएगा क्योंकि इसे संरक्षित किया गया है। इस कदम से केवल किसानों को ही नहीं बल्कि उन कंपनियों को भी लाभ होगा जो भारत में प्रोसेस्ड चावल बनाकर विदेशों में बेचती हैं। भारत विश्व में चावल के सबसे बड़े निर्यातकों में से एक है, और यहां चावल की कमी नहीं है।