आकाश नीला क्यों दिखता है और सूर्यास्त में लाल क्यों हो जाता है?

दिन में सूर्य की रोशनी वायुमंडल में कम दूरी तय करती है, नीली तरंगें ज्यादा बिखरती हैं (रेली स्कैटरिंग), इसलिए आकाश नीला दिखता है. सूर्यास्त में रोशनी ज्यादा मोटी परत से गुजरती है – नीली रोशनी बिखरकर खत्म हो जाती है, लाल-नारंगी तरंगें पहुंचती हैं. धूल-पानी से रंग और जीवंत होते हैं.

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आसमान का रंग बदलता क्यों रहता है, ये रेली स्कैटरिंग की प्रक्रिया होती है. (Photo: ITG) आसमान का रंग बदलता क्यों रहता है, ये रेली स्कैटरिंग की प्रक्रिया होती है. (Photo: ITG)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 16 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:00 AM IST

साफ दिन में ऊपर देखो तो आकाश हर जगह नीला दिखता है. लेकिन सूर्योदय या सूर्यास्त के समय वही आकाश नारंगी, गुलाबी और लाल रंग का हो जाता है. क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है? यह कोई जादू नहीं, बल्कि सूर्य की रोशनी और पृथ्वी के वायुमंडल का कमाल है. 

इंडिया टुडे साइंस की नई सीरीज में हम रोजमर्रा की ऐसी घटनाओं को सरल तरीके से समझाएंगे. आज जानते हैं कि दिन के अलग-अलग समय में आकाश के रंग क्यों बदलते हैं.

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आकाश का अपना कोई रंग नहीं होता

आकाश को जो रंग दिखता है, वह सूर्य की रोशनी का वायुमंडल में बिखराव (स्कैटरिंग) है. सूर्य की रोशनी सफेद लगती है लेकिन इसमें सभी रंगों की तरंगें (वेवलेंथ) होती हैं. नीला और बैंगनी रंग की तरंगें छोटी होती हैं, जबकि लाल और नारंगी की तरंगें लंबी.

जब सूर्य की रोशनी वायुमंडल में प्रवेश करती है, तो वह नाइट्रोजन और ऑक्सीजन जैसी छोटी गैस अणुओं से टकराती है. ये अणु छोटी तरंगदैर्ध्य (नीला और बैंगनी) को ज्यादा बिखेरते हैं. इस प्रक्रिया को रेली स्कैटरिंग कहते हैं, जिसकी व्याख्या 19वीं सदी में भौतिक विज्ञानी लॉर्ड रेली ने की थी.

दिन में आकाश नीला क्यों दिखता है?

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दिन में सूर्य ऊपर होता है, इसलिए रोशनी वायुमंडल से कम दूरी तय करती है. छोटी तरंगदैर्ध्य वाली नीली रोशनी हर दिशा में बिखर जाती है. हम ऊपर देखते हैं तो चारों तरफ से बिखरी नीली रोशनी ही आंखों में पहुंचती है, इसलिए आकाश नीला दिखता है.

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बैंगनी रोशनी नीले से भी ज्यादा बिखरती है, लेकिन...

  • हमारी आंखें नीले रंग के प्रति ज्यादा संवेदनशील होती हैं.
  • ऊपरी वायुमंडल में कुछ बैंगनी रोशनी अवशोषित हो जाती है.

इसलिए आकाश नीला लगता है.

सूर्योदय-सूर्यास्त में आकाश लाल-नारंगी क्यों हो जाता है?

सूर्योदय या सूर्यास्त में सूर्य क्षितिज के करीब होता है. रोशनी को वायुमंडल की ज्यादा मोटी परत से गुजरना पड़ता है – दूरी कई गुना बढ़ जाती है.

इस लंबी यात्रा में...

  • नीली और बैंगनी रोशनी ज्यादा बिखरकर हमारी नजर से दूर हो जाती है.
  • लंबी तरंगदैर्ध्य वाली लाल, नारंगी और पीली रोशनी ही सीधी हम तक पहुंचती है.
  • इसलिए सूर्य और आसपास का आकाश लाल-नारंगी दिखता है.
  • धूल, प्रदूषण, पानी की बूंदें और पतले बादल इन रंगों को और जीवंत बना देते हैं. तूफान के बाद या धूल भरे इलाकों में सूर्यास्त ज्यादा खूबसूरत लगता है.

सरल शब्दों में समझें

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  • दिन में: नीली रोशनी हर तरफ बिखरती है - आकाश नीला.
  • सूर्यास्त में: नीली रोशनी रास्ते में खत्म हो जाती है - सिर्फ लाल-नारंगी बचती है.

वैज्ञानिक कहते हैं कि यह रोज की घटना भौतिकी को देखने का सबसे आसान तरीका है. आकाश के रंग सूर्य से नहीं, बल्कि पृथ्वी के वायुमंडल से आते हैं – जो सूर्य की रोशनी को एक बड़ा फिल्टर की तरह छानता है.

दोपहर के हल्के नीले से शाम के लाल रंग तक, आकाश का बदलता रंग रोशनी और हवा के साथ का खूबसूरत खेल है. अगली बार सूर्यास्त देखें तो याद रखिए – यह विज्ञान का जादू है.

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