Artemis 2 Splash Down Live: नासा का आर्टेमिस II मिशन पूरा हो चुका है. ओरियन स्पेसक्राफ्ट 11 अप्रैल की सुबह 5.37 बजे अमेरिका के सैन डिएगो के तट के पास समंदर में उतर चुका है. चारों अंतरिक्षयात्री चंद्रमा के चारों ओर घूमकर अब सुरक्षित घर लौट आए हैं. यह मिशन 54 साल बाद इंसानों को चंद्रमा के पास ले जाने वाला पहला क्रूड मिशन है. प्रशांत महासागर में सैन डिएगो (कैलिफोर्निया, अमेरिका) के तट के पास समंदर में उतरा.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि महान और बेहद प्रतिभाशाली आर्टेमिस II के क्रू को हार्दिक बधाई. पूरी यात्रा शानदार रही, लैंडिंग बिल्कुल सटीक रही और अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में, मुझे आप पर इससे ज्यादा गर्व नहीं हो सकता! मैं जल्द ही आप सभी से व्हाइट हाउस में मिलने का इंतज़ार कर रहा हूं. हम इसे फिर से करेंगे और फिर अगला कदम मंगल ग्रह होगा.
कुछ ही देर में चारों अंतरिक्षयात्रियों को सुरक्षित निकालकर USS John P. Murtha पर ले जाया जाएगा. वहां उनका मेडिकल चेकअप होगा.
सभी अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित हैं. रिकवरी टीमें ओरियन स्पेसक्राफ्ट की ओर बढ़ रही हैं, जो प्रशांत महासागर में एयरबैग्स पर तैर रहा है.
नासा का आर्टेमिस II मिशन पूरा हो चुका है. ओरियन स्पेसक्राफ्ट 11 अप्रैल सुबह 5.37 बजे अमेरिका के सैन डिएगो के तट के पास समंदर में उतर चुका है.
धरती पर उतरने के दौरान 6 मिनट का कम्युनिकेशन ब्लैकआउट हो गया है, यानी अंतरिक्षयात्री मिशन कंट्रोल से बात नहीं कर पा रहे हैं.
ओरियन क्रू कैप्सूल को पृथ्वी के वायुमंडल में री-एंट्री के लिए तय किए गए सटीक एंगल पर सेट कर दिया गया है. चारों अंतरिक्षयात्रियों को लेकर यह स्पेसक्राफ्ट सुबह 5:37 बजे प्रशांत महासागर में उतरेगा.
ओरियन स्पेसक्राफ्ट कम्युनिकेशन लिंक पर है और NASA ने उसे ट्रैक करने के लिए जीपीएस लॉक कर दिया है. जीपीएस डाटा स्पेसक्राफ्ट को पृथ्वी के हिसाब से उसकी स्थिति की जानकारी दे रहा है.
ओरियन का क्रू मॉड्यूल सर्विस मॉड्यूल से अलग हो गया है, जिससे री-एंट्री के दौरान उसका हीट शील्ड सामने आ गया है. क्रू मॉड्यूल अब अपने आप धरती की ओर बढ़ रहा है. इस दौरान इसे लगभग 1648°C तक के तापमान का सामना करना पड़ेगा. इसके बाद यह अपनी दिशा (ट्रैजेक्टरी) को बदलने के लिए एक छोटा बर्न करेगा, ताकि सही एंट्री एंगल मिले और हीट शील्ड सही दिशा में रहे.
नासा द्वारा जारी एक एनिमेशन में आर्टेमिस II के चालक दल के प्रशांत महासागर में संभावित लैंडिंग की प्रक्रिया को दिखाया गया है.
USS John P. Murtha एक Amphibious Transport Dock (LPD) जहाज है. यह मुख्य रूप से मरीन्स को समुद्र से लेकर जमीन तक ले जाने के लिए बनाया गया है, लेकिन अब इसे नासा के आर्टेमिस मिशन के लिए स्पेशल रिकवरी शिप के रूप में चुना गया है. जहाज की लंबाई लगभग 684 फीट है. इसमें कई खास सुविधाएं हैं जो स्पेसक्राफ्ट रिकवरी के लिए बहुत उपयोगी हैं...
नासा के आर्टेमिस II मिशन के दौरान चार अंतरिक्षयात्री चंद्रमा के चारों ओर घूमकर पृथ्वी की ओर लौट रहे हैं. उनके सुरक्षित वापसी के लिए अमेरिकी नौसेना का एक खास जहाज तैयार खड़ा है. इस जहाज का नाम है USS John P. Murtha (LPD 26). यह जहाज प्रशांत महासागर में यूएस थर्ड फ्लीट में तैनात है. ओरियन स्पेसक्राफ्ट के स्प्लैशडाउन के बाद अंतरिक्षयात्रियों तथा कैप्सूल को रिकवर करने का जिम्मेदार है.
वायुमंडल में प्रवेश के बाद पहले दो मिनट में कैप्सूल 2 लाख फीट नीचे गिरेगा. इस दौरान सामने की हवा इतनी दब जाएगी कि तापमान 2760 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाएगा. ओरियन का हीट शील्ड इस गर्मी को झेलने के लिए बना है ताकि अंदर का हिस्सा सुरक्षित रखेगा. इस दौरान 6 मिनट का कम्युनिकेशन ब्लैकआउट भी आएगा यानी अंतरिक्षयात्री मिशन कंट्रोल से बात नहीं कर पाएंगे.
थ्रस्टर्स की मदद से गति कम होगी और कैप्सूल एक तरफ से दूसरी तरफ रोल करता रहेगा ताकि अतिरिक्त ऊर्जा निकल जाए. 9 मिनट बाद जब गति ध्वनि की गति से कम हो जाएगी, तब 10 मिनट पर ड्रोग पैराशूट खुलेंगे. फिर पायलट पैराशूट और अंत में मुख्य पैराशूट खुलेंगे. ये कैप्सूल को अंतिम 5000 फीट में 27 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से धीरे-धीरे नीचे लाएंगे. कुल मिलाकर ये 13 मिनट में कैप्सूल 2737 किलोमीटर की दूरी तय करेगा.