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क्यों गिरी White House पर बिजली? 1 डिग्री तापमान बढ़ने पर 12% बढ़ेगा खतरा

aajtak.in
  • वॉशिंगटन,
  • 09 अगस्त 2022,
  • अपडेटेड 11:40 AM IST
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वॉशिंगटन में राष्ट्रपति जो बाइडेन (President Joe Biden) के आवास व्हाइट हाउस (White House) के बाहर 4 अगस्त 2022 को बिजली गिरी. इसकी चपेट में चार लोग आए. 76 वर्षीय जेम्स म्यूलर और 75 वर्षीय उनकी पत्नी डोना म्यूलर की मौके पर ही मौत हो गई. ये लोग विस्कॉन्सिन से वॉशिंगटन डीसी अपनी 56वीं मैरिज एनिवर्सिरी मनाने आए थे. जब बिजली गिरी तब जेम्स और डोना व्हाइट हाउस के सामने स्थित लफायेत पार्क में थे. (फोटोः रॉयटर्स)

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इसके अलावा एक बुरी तरह से जख्मी 29 वर्षीय एक युवक की मौत भी हो गई. इनका नाम है ब्रूक्स ए. लैबर्स्टन. ये लॉस एंजिल्स के रहने वाले थे. ब्रूक्स सिटी नेशनल बैंक में काम करता था. अक्सर वॉशिंगटन आता रहता था. बिजली गिरने से जख्मी चौथा व्यक्ति एक महिला है. जिसका अस्पताल में इलाज चल रहा है. सवाल ये नहीं है कि अमेरिका में बिजली गिरने से किसी की मौत हुई है. सवाल ये है कि वहां पर बिजली गिरने की घटनाओं में बढ़ोतरी हो रही है. (फोटोः बाएं से दाएं - जेम्स-डोना म्यूलर और ब्रूक्स लैबर्स्टन)
 

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प्रतिष्ठित जर्नल Science में साल 2014 में एक स्टडी प्रकाशित की गई थी कि अमेरिका में पिछली एक सदी में बिजली गिरने की घटनाओं में 50 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. वॉशिंगटन में जिस दिन यह घटना घटी उस दिन वहां पर मौसम बेहद गर्म और उमसभरा था. पिछले 30 सालों के औसत अधिकतम तापमान से चार डिग्री सेल्सियस ज्यादा था. यानी 30 डिग्री सेल्सियस के बजाय 34 डिग्री सेल्सियस. ये तापमान और उमस ने आकाश में बिजली पैदा की. (प्रतीकात्मक फोटोः गेटी)

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अमेरिका को लेकर वैज्ञानिकों की आशंका है कि अगर यहां पर हर एक डिग्री सेल्सियस तापमान बढ़ने पर 12 फीसदी ज्यादा बिजली गिरेगी. तेजी से गर्म हो रहे अलास्का में बिजली गिरने की घटनाओं में 17 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. ये घटनाएं 1980 के बाद से बढ़ी हैं. सूखा और गर्म रहने वाले कैलिफोर्निया में अगस्त 2020 में 14 हजार बार बिजली गिरी थी, जिसकी वजह से वहां दो साल पहले सबसे बड़ी जंगली आग लगी थी. (फोटोः एपी)

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सिर्फ अमेरिका ही नहीं, भारत (India) और ब्राजील (Brazil) में बिजली गिरने की मात्रा लगातार बढ़ रही है. हर गिरने वाली बिजली किसी की जान नहीं लेती. लेकिन खतरा पूरा रहता है. सेंटर फॉर डिजीस कंट्रोल के मुताबिक अमेरिका में हर साल 4 करोड़ बार बिजली गिरती है. 10 लाख बिजली गिरने पर किसी एक की मौत का दर फिलहाल है. जिन लोगों पर बिजली गिरती है उसमें 90 फीसदी लोग बच जाते हैं. अमेरिका में बिजली गिरने से साल 2006 से 2021 तक सिर्फ 444 लोगों की मौत हुई है. (फोटोः रॉयटर्स)

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अमेरिका में ही सबसे लंबी आकाशीय बिजली गिरने का रिकॉर्ड भी दर्ज है. इसने करीब अमेरिका एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक खुद को फैला लिया था. संयुक्त राष्ट्र की मौसम एजेंसी ने इसे दुनिया की सबसे लंबी आकाशीय बिजली का दर्जा दिया था. यह 768 किलोमीटर लंबी थी. वैज्ञानिकों ने इसे मेगाफ्लैश (Megaflash) नाम दिया है. यह गिरी थी अप्रैल 2020 में. यह जब चमकी तो टेक्सास से लेकर मिसिसिपी तक देखी गई. वैज्ञानिकों ने इसे एक सैटेलाइट के जरिए रिकॉर्ड किया था. (फोटोः एपी)

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WMO ने बताया था कि अगर आप 768 किलोमीटर की दूरी प्लेन से यात्रा करेंगे तो करीब डेढ-दो घंटे लगेंगे. लेकिन यहां पर बिजली ने यह दूरी कुछ सेकेंड्स में पूरी कर ली. इससे पहले जून 2020 में उरुग्वे और अर्जेंटीना के ऊपर मैगाफ्लैश गिरी थी. जो करीब 17.1 सेकेंड्स तक दिखाई दी थी. अच्छी बात ये है कि दोनों ही मेगाफ्लैश ने धरती को नहीं छुआ था. नहीं तो बड़ी आपदा आ सकती थी. (फोटोः रॉयटर्स)

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उरुग्वे और अर्जेंटीना से पहले एक बिजली गिरी थी, जो पूरी ब्राजील को बीच से आधे में बांट रही थी. यह आकाशीय बिजली 709 किलोमीटर तक फैली थी. WMO के अनुसार दो साल पहले अर्जेंटीना में दर्ज की गई सबसे लंबे समय तक चमकने वाली बिजली. यह 17.1 सेकेंड तक चमकती रही है. (फोटोः गेटी)

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WMO के एक्सपर्ट प्रोफेसर रैंडेल सर्वेनी ने कहा कि एक बिजली की इतनी लंबी यात्रा और एक बिजली का इतने समय तक चमकना प्रकृति की ताकत को दिखाता है.  साथ ही हमें मौका देता है कि हम कुछ स्टडी या रिसर्च कर सकें. हम और बेहतर रिकॉर्ड दर्ज करेंगे भविष्य में. हमारी टेक्नोलॉजी और अत्याधुनिक हो रही है. साल 2016 में अमेरिका ने पहली बार दुनियाभर में चमकने वाली आकाशीय बिजलियों का नक्शा तैयार किया था. ताकि पूरी धरती को लेकर एक अध्ययन करने में आसानी हो. तभी से WMO आकाशीय बिजलियों को लेकर दो रिकॉर्ड की पुष्टि करके उन्हें आम जनता की जानकारी के लिए जारी करता है. (फोटोः रॉयटर्स)

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बिजली गिरने से एक साथ मरने वालों का रिकॉर्ड भी WMO रखता है. 1975 में जिम्बाब्वे में 21 लोगों को एक ही आकाशीय बिजली ने सीधे मार दिया था. वहीं, 1994 में मिस्र में एक तेट टैंक के पर बिजली गिरने से टैंक फट गया उसमें से जलते हुए तेल की बाढ़ ड्रोंका कस्बे में आ गई. इससे 469 लोग मारे गए थे. (फोटोः गेटी)