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क्या होगा अगर चांद धरती से बहुत दूर चला जाए? मच जाएगी चारों ओर तबाही

पारुल चंद्रा
  • नई दिल्ली,
  • 13 जून 2022,
  • अपडेटेड 1:22 PM IST
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चांद धरती से दूर चला जाए. या फिर सौर मंडल से बाहर निकल जाए तो सबसे पहले लोग ये कहना बंद कर देंगे कि तुम्हारा चेहरा चांद की तरह खूबसूरत है. चांद से संबंधित सभी त्योहार खत्म हो जाएंगे. अगर नहीं हुए, तो किस ग्रह को देखकर लोग वो पर्व मनाएंगे. न फ़ुल मून होगा. न चंद्र ग्रहण. लेकिन चांद के दूर जाने से धरती पर किस तरह का असर पड़ेगा. क्या सोचा है कभी? (फोटोः गनपति कुमार/अनस्प्लैश)

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खत्म हो जाएंगे हर तरह के ग्रहण

वैज्ञानिक इस बात की पुष्टि कर चुके हैं कि चांद धरती से हर साल 1.5 इंच दूर खिसक रहा है. आखिरकार एक समय ऐसा आएगा, जब पृथ्वी का प्राकृतिक उपग्रह बहुत दूर चला जाएगा. चंद्र ग्रहण जैसे नजारे तो भूल ही जाइए... क्योंकि यह इतना छोटा दिखेगा कि सूरज को ढक नहीं पाएगा. (फोटोः उओमो लिबेरो/अन्स्प्लैश)

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60 करोड़ साल लगेंगे इस काम को होने में

नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर (NASA's Goddard Space Flight Center) के लूनर साइंटिस्ट रिचर्ड वोंड्रक (Richard Vondrak) ने 2017 में कहा था कि समय के साथ, पूर्ण सूर्य ग्रहणों की संख्या और आवृत्ति कम हो जाएगी. अब से लगभग 60 करोड़ साल बाद, पृथ्वी पूर्ण सूर्य ग्रहण की सुंदरता का अनुभव आखिरी बार करेगी. क्योंकि धरती और सूरज के बीच चांद आएगा ही नहीं. (फोटोः गेटी)

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रातें ज्यादा अंधेरी होंगी, रोशनी नहीं रहेगी

चांद के जाते ही रातें ज्यादा अंधेरी होंगी. क्योंकि सूरज से पड़ने वाली रोशनी की चमक की वजह से चांद चमकता है. उसकी रोशनी से धरती पर रातों में एक सुकून देने वाली रोशनी रहती है. सौर मंडल में सबसे चमकीला ग्रह शुक्र है, लेकिन जब पूर्णिमा की रात होती है तब चांद उससे दो हजार गुना ज्यादा चमकता है. (फोटोः गेटी)

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धरती का झुकाव बिगड़ेगा तो ग्रैविटी हिलेगी

चांद की वजह से धरती अपनी धुरी पर 23.5 डिग्री के झुकाव पर टिकी हुई है. इसकी वजह से मौसम में बदलाव आता है. दोनों ग्रहों के बीच गुरुत्वाकर्षण शक्ति का एक खिंचाव बना है. असल में 300 करोड़ साल पहले चांद धरती के बहुत नजदीक था. लेकिन धीरे-धीरे वह दूर चला गया. फिलहाल चांद पर्याप्त दूरी पर है, जिसकी वजह से धरती पर बहुत सी चीजें बेहतर हो रही हैं. हमारी धरती को उसने हजारों सालों से नियंत्रित कर रखा है. (फोटोः गेटी)

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कम या गायब हो जाएंगी समुद्र से उठती लहरें

समुद्र की खूबसूरती उसकी लहरों से होती है. चांद के दूर जाते ही समुद्री की लहरें खत्म हो जाएंगी. या उनका बनना और ऊंचाई कम हो जाएगी. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि चांद के गायब होते ही या दूर जाते ही, अभी जितनी ऊंची लहरें उठती हैं, वो आधी ऊंचाई की रह जाएंगी. कम से कम सर्फिंग का खेल तो खराब हो जाएगा. (फोटोः गेटी)

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कई रात्रिचर जीवों की जिंदगी पर पड़ेगा असर

रात्रिचर जीव (Nocturnal Animals) के जीवन पर बड़ा असर पड़ेगा. करोड़ों सालों से विकसित होते आ रहे मोथ (Moth) का तो जीवन चक्र ही खराब हो जाएगा. वह चांद और तारों की रोशनी के बल पर नेविगेट करता है. नए पैदा हुए कछुए चांद की रोशनी के सहारे अपना रास्ता खोजते हैं, वो भटक जाएंगे. इंसानों द्वारा बनाई गई रोशनी उन्हें समुद्री किनारों से खींचकर शहरों की तरफ ले आएगी. ये उनके लिए जानलेवा होगा. (फोटोः गेटी)

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धरती के दिन और रात के समय में अंतर आएगा

चांद की गुरुत्वाकर्षण शक्ति की वजह से धरती का दिन अभी हर सौ साल में 2 मिलिसेकेंड बढ़ रहा है. अगर यह दिन का बढ़ना कल रुक जाए, तो इसका असर इंसानी टाइम स्केल पर पड़ेगा. अगर चांद करोड़ों साल पहले गायब हो गया होता तो धरती का रोटेशन एकदम अलग होता. पहले धरती 4 घंटे में एक चक्कर लगाती थी. चांद की वजह से धीमे होते-होते 24 घंटे हो गई. चांद गया धरती का चक्कर भयानक तौर पर बदल सकता है. यानी दिन 2 घंटे का और रात 2 घंटे की. या फिर कम या ज्यादा. (फोटोः गेटी)

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कब कौन सा मौसम आए कुछ पता नहीं चलेगा

धरती अपनी धुरी पर 23.5 डिग्री पर झुकी हुई है. ऐसा चांद के गुरुत्वाकर्षण की वजह से है. अगर चांद गया तो यह अपनी धुरी पर कम या ज्यादा झुक सकती है. इसकी वजह से मौसम में बहुत तेज बदलाव हो सकता है. या फिर मौसम का बदलना रुक सकता है. ऐसा भी हो सकता है कि धरती के कुछ हिस्से जीवन में कभी भी सूरज को न देख पाएं. मौसम के साथ बदलाव होने से धरती पर कई जीवों की प्रजातियां खत्म हो जाएंगी. (फोटोः गेटी)

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