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60 साल पहले अमेरिका ने ऐसी जगह फोड़ा था परमाणु बम, जिसकी कोई कल्पना भी नहीं करता था

aajtak.in
  • होनोलुलू,
  • 13 जुलाई 2022,
  • अपडेटेड 11:57 AM IST
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आज से कोई 60 साल पहले अमेरिका ने ऐसी जगह परमाणु बम का विस्फोट किया था, जो उस समय अकल्पनीय था. इसके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता था. धरती से करीब 400 किलोमीटर ऊपर अंतरिक्ष में यह परमाणु बम फोड़ा गया. उस समय इस नजारे को देखने के लिए लोग हवाई के होनोलुलू द्वीप के तटों पर जमा हो गए थे. ताकि उसका असर देख सकें. देखा भी. आकाश में नॉर्दन लाइट्स की तरह प्रकाश तैरते हुए दिखाई दिया था. (फोटोः गेटी)

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ये बात है 9 जुलाई 1962 की. हवाई द्वीप के होनोलुलू में लोग तटों पर जमा थे. उन्हें अंतरिक्ष में होने वाली अविश्वसनीय घटना को देखना था ताकि उसे अपनी यादों में संजोकर रख सकें. लोगों ने अंतरिक्ष में विस्फोट तो देखा ही, साथ ही उत्तरी ध्रुव पर दिखने वाले अरोरा बोरिएलिस यानी नॉर्दन लाइट्स का आनंद तक लिया. लेकिन उस विस्फोट की वजह से कई स्थानों पर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बर्बाद हो गए थे. (फोटोः गेटी)

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अमेरिका ने इस विस्फोट का नाम दिया था स्टारफिश प्राइम (Starfish Prime). यह अमेरिका के ऑपरेशन फिशबाउल (Operation Fishbowl) का हिस्सा था. इस ऑपरेशन के तहत अमेरिका को पांच परमाणु विस्फोट करने थे. जिसमें से स्टारफिश प्राइम सबसे बड़ा और भयावह विस्फोट था. इसमें से 1.4 मेगाटन ऊर्जा निकली थी. यानी यह 14 लाख टन टीएनटी विस्फोट के बराबर था. (फोटोः अमेरिकी सरकार)

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यह विस्फोट जॉन्स्टन आइलैंड के ठीक ऊपर अंतरिक्ष में 400 किलोमीटर की ऊंचाई पर किया गया था. इसकी वजह से प्रशांत महासागर के बहुत बड़े इलाके में आसमान में नॉर्दन लाइट्स जैसा नजारा देखने को मिला था. साथ ही बहुत बड़े इलाके में बिजली के उपकरण खराब हो गए थे.  (फोटोः गेटी)

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एक मिलिट्री दस्तावेज के मुताबिक क्वाइयालीन के ऊपर आसमान में करीब 2254 किलोमीटर पश्चिम की तरफ एक घना वातावरण छा गया था. जब विस्फोट हुआ तब अंतरिक्ष में तेज सफेद रोशनी निकली. इसके बाद बादलों की बनावट पूरी तरह बदल गई. इसके ठीक बाद सफेद रोशनी हरे रंग के बड़े चमकदार गेंद की तरह बन गया. (फोटोः गेटी)

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जमीन की सतह से अंतरिक्ष तक बादल सफेद खंभों की तरह बंट गए थे. ये क्षितिज से 40 डिग्री ऊपर की ओर उठे हुए दिख रहे थे. लेकिन इन बादलों का व्यवहार इतनी तेजी से बदल रहा था कि इसका अंदाजा लगाना मुश्किल था. धमाके वाली जगह से बादलों के छल्ले पूरे आसमान में फैल रहे थे. जैसे कोई अंतरिक्ष में सिगरेट के छल्ले बना रहा हो. ये छल्ले खत्म नहीं हो रहे थे, बल्कि अपनी जगह पर जम जा रहे थे. (फोटोः विकिपीडिया)

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सफेद के बाद निकली हरी रोशनी धीरे-धीरे अब बैंगनी रंग में बदल रही थी. धमाके केंद्र में रोशनी की चमक धुंधली होती जा रही है. उत्तर से पूर्व की तरफ लाल रंग की चमक थी. दक्षिण से पूर्व की तरफ बादलों और धुएं के छल्ले अंदर और ऊपर की ओर तैर रहे थे. उत्तर से दक्षिण की तरफ हल्की चमक वाले लाल रंग के अर्धचंद्राकार बादलों के छल्ले थे. कई जगहों पर इंद्रधनुष बन गए थे, जो सात-सात मिनट देखने को मिल रहे थे. (फोटोः गेटी)

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अमेरिका ने यह टेस्ट सोवियत संघ द्वारा पहले किए गए इसी तरह के परीक्षण के जवाब में था. साथ ही धरती की चुंबकीय शक्ति की जांच करने का प्रयोग भी था. यह भी देखा जा रहा था कि क्या अंतरिक्ष में परमाणु विस्फोट को सोवियत संघ के खिलाफ हथियार के तौर पर उपयोग कर सकते हैं. लेकिन अमेरिका इस बात से हैरान रह गया कि इस विस्फोट ने कई सैटेलाइट्स को बंद कर दिया. परीक्षण एक दिन बाद छोड़े गए सैटेलाइट को इस इलाके में बहुत ज्यादा रेडिएशन का सामना करना पड़ा था. (फोटोः गेटी)

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हवाई द्वीप जो कि विस्फोट स्थल से करीब 1400 किलोमीटर दूर था, वहां पर कई घरों, इमारतों और दफ्तरों के इलेक्ट्रॉनिक आइटम खराब हो गए थे. सड़कों की लाइट्स बंद हो गई थीं. कई स्थानों पर शॉर्ट सर्किट हुआ था. कई जगहों पर तो चोरों का अलार्म बज गया था. इसके अलावा संचार प्रणालियों पर भारी असर हुआ था. इस परीक्षण से अमेरिका को यह बात पता चली कि कैसे दुश्मन देश के सारे इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम्स को ध्वस्त किया जा सकता है. (फोटोः गेटी)

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