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न्यूजीलैंड में लगातार गुर्रा रहा है 'महाज्वालामुखी', गुर्राहट से जमीन ऊपर उठ रही है

aajtak.in
  • वेलिंग्टन,
  • 13 जुलाई 2022,
  • अपडेटेड 10:36 AM IST
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न्यूजीलैंड में साफ पानी की एक बड़ी झील है लेक ताउपो (Lake Taupo). एक तरफ शहर और दूसरी तरफ न्यूजीलैंड का सबसे खतरनाक ज्वालामुखी. इस झील के नीचे ज्वालामुखी की तलहटी के आसपास की जमीन ऊपर उठ रही है. खिसक रही है. क्योंकि ये ज्वालामुखी फिर से गुर्रा रहा है. इसकी गरगराहट को वैज्ञानिक लगातार रिकॉर्ड कर रहे हैं. (फोटोः गेटी)

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लेक ताउपो (Lake Taupo) ऑस्ट्रेलेशिया की सबसे बड़ी साफ पानी की झील है. यह न्यूजीलैंड के उत्तरी आईलैंड के मध्य में स्थित है. यह झील एक प्रागैतिहासिक काल्डेरा (Prehistoric Caldera) पर बनी है. काल्डेरा का स्पैनिश में मतलब होता है उबलता हुआ बर्तन. यह तब बना था जब ओरुआनुई ज्वालामुखी (Oruanui Supervolcano) 25,400 साल पहले फटा था. यह विस्फोट नहीं महाविस्फोट था. इसे ताउपो ज्वालामुखी (Taupo Volcano) भी बुलाते हैं. (फोटोः गेटी)

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25,400 साल पहले ओरुआनुई ज्वालामुखी (Oruanui Supervolcano) के विस्फोट से 1000 क्यूबिक किलोमीटर तक गर्म पदार्थ फैला था. गर्म मैग्मा की वजह से कई जगहों पर धरती के अंदर गहरी सुरंगें बन गईं. धीरे-धीरे ये सुंरगें आपस मिलकर धंस गई और एक बड़ी झील बनाने लायक काल्डेरा यानी गड्ढा बन गया. (फोटोः गेटी)

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पिछले 12 हजार सालों में ताउपो ज्वालामुखी 25 बार सक्रिय हुआ है. सबसे करीबी विस्फोट 232 AD में हुआ था. यह धरती पर हुए सबसे भयावह विस्फोटो में से एक था. इसके बाद से अब तक इस ज्वालामुखी में चार बार विस्फोट हुआ. सबसे खतरनाक था 1922 में हुआ विस्फोट. इसकी वजह से भयावह भूकंप आए थे. यह स्टडी हाल ही में न्यूजीलैंड जर्नल ऑफ जियोलॉजी एंड जियोफिजिक्स में प्रकाशित हुई है. (फोटोः गेटी)

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वैज्ञानिकों ने ताउपो ज्वालामुखी के गुर्राहट की 42 साल का इतिहास खंगाला है. ये डेटा ताउपो झील में मौजूद 22 स्थानों से कलेक्ट किया गया है. पता चला है कि यह महाज्वालामुखी अब भी लगातार गुर्रा रहा है. वेलिंग्टन स्थित विक्टोरिया यूनिवर्सिटी के भूकंप विज्ञानी फिल इस्ले केंप ने बताया कि हम 1979 से इसका डेटा कलेक्ट कर रहे हैं. अब तक चार बार ताउपो झील की सतह का सर्वे किया जा चुका है. (फोटोः गेटी)

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झील की सतह से सही डेटा मिले इसके लिए उस पर गॉज लगाए गए थे. ये गॉज लहरों में आने वाले बदलावों, धरती के कंपन, उसकी ऊंचाई और खिसकने की प्रक्रिया को मॉनिटर कर रहे थे. 1983 तक 14 गॉज स्टेशन बनाए गए जो इस झील के 22 स्थानों से कलेक्ट किए गए डेटा को एक जगह जमा करते थे. (फोटोः गेटी)

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1983 में यहां पर भूकंप की एक सीरीज आई थी. पिछले 35 सालों में भूंकपों की ऐसी लड़ी आजतक देखने को नहीं मिली. 1986 के बाद से लगातार यहां पर भूकंप आ रहे हैं. इसके बाद यहां पर और अधिक सेंसर्स लगाए गए. इसके बाद हैरान करने वाली जानकारी मिली. ताउपो ज्वालामुखी के आसपास उत्तर-पूर्वी इलाके की सतह ऊपर उठ रही थी. (फोटोः गेटी)

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फॉल्ट के पास मौजूद झील का केंद्र अंदर धंस रहा है. जबकि झील के दक्षिणी किनारे पर हल्के-फुल्के सब्सिडेंस यानी मिट्टी के खिसकने की प्रक्रिया देखी गई है. झील के अंदर मौजूद होरोमतांगी रीफ अपनी असली सतह से 6.3 इंच ऊपर उठ चुकी है. जबकि अन्य हिस्सों में 5.5 इंच का सब्सिडेंस देखने को मिला है. (फोटोः गेटी)

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फिल इस्ले केंप ने बताया कि जमीन का इतना ऊपर उठना कोई बड़े खतरे की बात नहीं है. इससे कुछ इमारतों और पाइपलाइंस को दिक्कत हो सकती है. ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि शायद धरती के केंद्र से ऊपर की ओर आने वाला मैग्मा जमीन के नजदीक आ रहा है. उसके दबाव की वजह से झील की सतह ज्वालामुखी के आसपास ऊपर उठ रही है. (फोटोः गेटी)