रूस के सुदूर पूर्वी क्षेत्र में स्थित कामचटका प्रायद्वीप (Kamchatka Peninsula) में जनवरी 2026 में भयंकर बर्फबारी हुई है. यह 60 सालों में सबसे ज्यादा बर्फ गिरी है. शहर के बड़े इलाकों में कई मीटर ऊंची बर्फ की परतें जम गईं, जिससे इमारतों के दरवाजे बंद हो गए. कारें दब गईं. Photo: Getty
लोग घरों से निकलने के लिए खुदाई कर रहे हैं. कारें पूरी तरह बर्फ में दबी हुई हैं, चार-पहिया गाड़ियां फंस गई हैं. लोग बर्फ के ढेर पर चलकर मजा ले रहे हैं या मजबूरी में रास्ता बना रहे हैं. दिसंबर 2025 में 3.7 मीटर (370 मिलीमीटर वर्षा के बराबर) बर्फ गिरी, जो सामान्य से तीन गुना ज्यादा है. Photo: Reuters
जनवरी 2026 के पहले 15-16 दिनों में 2 मीटर से ज्यादा (कुछ जगहों पर 2.5 मीटर तक, कुल 163 मिलीमीटर) बर्फ और गिर चुकी है. शहर में बर्फ की परत 170 सेमी तक पहुंच गई, कुछ इलाकों में 250-500 सेमी (5 मीटर तक) की ड्रिफ्ट्स (बर्फ के ढेर) बनीं. Photo: Reuters
यह 1970 के दशक के बाद सबसे बड़ी घटना है. दो लोगों की मौत छत से गिरती बर्फ से हुई, जिसके बाद आपातकाल घोषित कर दिया गया. स्कूल बंद, सार्वजनिक परिवहन ठप, हवाई यात्रा प्रभावित हुई है. पेट्रोपावलोव्स्क-कामचात्स्की में लोग अपार्टमेंट के दरवाजे खोदकर निकल रहे हैं. Photo: Reuters
कई कारें एक महीने से बर्फ में दबी हैं. कामचटका प्रायद्वीप प्रशांत महासागर और ओखोत्स्क सागर के बीच स्थित है. यहां की भौगोलिक स्थिति और मौसम प्रणाली इसे भारी बर्फबारी के लिए आदर्श बनाती है. दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 में ओखोत्स्क सागर और प्रशांत महासागर पर कई कम दबाव वाले चक्रवात बने. Photo: Reuters
ये चक्रवात महासागर से बहुत ज्यादा नमी लेकर आते हैं. ठंडी हवा से मिलकर यह नमी बर्फ के रूप में गिरती है. कामचटका में ऊंचे पहाड़ और ज्वालामुखी हैं. महासागर से आने वाली नम हवा पहाड़ों से टकराकर ऊपर उठती है. ठंडी हवा में नमी जमकर भारी बर्फ गिराती है. Photo: Getty
वैज्ञानिकों के अनुसार ग्लोबल वार्मिंग से महासागर गर्म हो रहे हैं. गर्म पानी ज्यादा नमी सोख सकता है. इससे चक्रवात ज्यादा शक्तिशाली और नम हो जाते हैं, जिससे भारी बर्फबारी बढ़ रही है. कामचटका में पहले से ही ठंड बहुत है लेकिन अब नमी ज्यादा होने से रिकॉर्ड बर्फ गिर रही है. Photo: Getty
यह बर्फबारी कामचटका के लिए स्नो अपोकैलिप्स जैसी है. मौसम विभाग चेतावनी दे रहा है कि 26 जनवरी तक बर्फबारी जारी रह सकती है. यह घटना जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक मौसम चक्रों का संयोजन दिखाती है, जहां सामान्य से कई गुना ज्यादा बर्फ गिर सकती है. Photo: Reuters