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जीवाश्म बता रहे हैं कि जिराफ़ की गर्दन इतनी लंबी कैसे हो गई

aajtak.in
  • वॉशिंगटन,
  • 06 जून 2022,
  • अपडेटेड 3:14 PM IST
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जिराफ़ (Giraffe) अपनी लंबी गर्दन के लिए ही जाने जाते हैं. टेक्स्ट बुक्स में हमें एक सिद्धांत के बारे में बताया गया था कि जिराफ़ के पूर्वजों ने भोजन के लिए संघर्ष किया. जिसमें लंबी गर्दन वाले जिराफ़ छोटे जानवरों की तुलना में ऊंची पत्तियों तक पहुंच जाते थे. लेकिन चीन में आधुनिक जिराफ़ के पूर्वजों के जीवाश्म (Fossils) पाए गए हैं, जिससे इस जानवर की लंबी गर्दन के विकास के बारे में पता चलता है. (Photo: Unsplash)

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जीवाश्म से पता चलता है कि जिराफ़ की गर्दन का शुरुआती विकास, खाना नहीं बल्कि सिर से सिर टकराकर आपस में भिड़ने की वजह से हो सकता है. साइंस (Science) जर्नल में प्रकाशित एक शोध के मुताबिक, शोधकर्ताओं की एक टीम ने जिराफ़ के कंकाल के अवशेषों के बारे में बताया है. (Photo: Reuters)

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शोधकर्ताओं का कहना है कि जिराफ़ के पूर्वज डिस्कोकेरिक्स शीज़ी (Discokeryx xiezhi) की खोपड़ी मोटी और गर्दन की हड्डियां काफी मजबूत थीं. इसका आकार 1.7 करोड़ साल पहले उत्तर-पश्चिमी चीन के झिंजियांग इलाके में रहने वाली एक बड़ी जंगली भेड़ के आकार का था. (Photo: Reuters)

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शोधकर्ताओं के मुताबिक, डिस्कोकेरिक्स की ठोस खोपड़ी और गर्दन की हड्डियां (Cervical vertebrae) इसलिए इतनी मजबूत थीं, क्योंकि वे तेजी से सिर से सिर टकराते थे. कई स्तनपायी प्रजातियों में, मादा को लेकर नर जीवों में इस तरह की प्रतिस्पर्धा देखी जाती है. डिस्कोकेरिक्स के कंकाल से पता चलता है कि इसके सिर और गर्दन के साथ-साथ, गर्दन की हड्डियों के बीच के जोड़ सबसे ज्यादा जटिल हैं. (Photo: Pexels)

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डिस्कोकेरिक्स की खोपड़ी पर एक बड़े डिस्क के आकार का हेलमेट जैसा ओसिकोन (ossicone) था. ये जिराफ़ के सिर के ऊपर सींग जैसे नॉब (Knob) होते हैं. शोध के मुख्य लेखक और चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज (Chinese Academy of Sciences) के जीवाश्म विज्ञानी (Paleontologist) शी-क्यूई वांग (Shi-Qi Wang) का कहना है कि सींग जैसे ओसिकोन, आमतौर पर लड़ने के लिए हथियार की तरह काम करते थे. (Photo: Unsplash)

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अमेरिकन म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री (American Museum of Natural History) के जीवाश्म विज्ञानी और शोध के सह-लेखक जिन मेंग (Jin Meng) का कहना है कि डिस्कोकेरिक्स में सिर और गर्दन के जटिल आकार, सिर-से सिर भिड़ाने वाले व्यवहार के लिए अनुकूलित हैं. उनका कहना है कि इस नई खोज से पता चलता है कि जिराफ़ की यह नई प्रजाति एक उदाहरण है. इसमें जिराफ़ की गर्दन लंबी नहीं है, लेकिन जोर से सिर भिड़ाने की शक्ति और उसका असर झेलने के लिए काफी मोटी है. (Photo: Unsplash)

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शोध से एक और बात सामने आती है. आज जिराफ़ों में गर्दन से गर्दन मिलाने वाला जो व्यवहार देखा जाता है, वह अपने साथियों से प्रतिस्पर्धा वाला व्यवहार है. इसमें वे हिंसक रूप से एक दूसरे को अपनी गर्दन से मारते हैं. लंबी गर्दन वाले जिराफ़ अक्सर जीतते हैं. अगर एक नर जिराफ़ की गर्दन छोटी होती है, तो मादा जिराफ़ नर के प्रजनन के प्रस्ताव को अस्वीकार कर सकती है. (Photo: Unsplash)

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गर्दन का बढ़ना स्वतंत्र रूप से लाखों सालों से कई पशुओं के बीच विकसित हुआ. इसमें एलास्मोसॉरस और टैनिस्ट्रोफियस (Elasmosaurus and Tanystropheus) जैसे समुद्री सरीसृप (Marine reptiles), पेटागोटाइटन और मामेनचिसॉरस (Patagotitan and Mamenchisaurus) जैसे सैरोपोड डायनासोर, यहां तक ​​​​कि हंस और गीज़ भी शामिल हैं. (Photo: Unsplash)

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शोधकर्ताओं के मुताबिक डिस्कोकेरिक्स जिराफ़ में गर्दन के बढ़ने के शुरुआती चरणों के बारे में बता सकता है. डिस्कोकेरिक्स को आज के जिराफ़ का प्रत्यक्ष पूर्वज नहीं माना जाता है, बल्कि जिराफ़ परिवार की एक साइड ब्रांच माना जाता है. (Photo: Unsplash)

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अफ्रीका में पाया जाने वाला आधुनिक जिराफ़, जमीन पर रहने वाला दुनिया का सबसे ऊंचा जानवर है. इसमें नर की लंबाई 18 फीट तक और मादा 14 फीट तक लंबी होती है. एक जिराफ़ की गर्दन करीब 6 फीट तक फैल सकती है, जो किसी भी जानवर के मुकाबले सबसे लंबी होती है. हालांकि, अन्य स्तनधारियों की तरह इसकी गर्दन में सिर्फ 7 हड्डियां होती हैं. (Photo: Unsplash)

 

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