दक्षिण अमेरिका के देश चिली में जनवरी 2026 की शुरुआत में तेज जंगल की आग (wildfires) ने कहर बरपा रखा है. यह आग मुख्य रूप से देश के मध्य और दक्षिणी हिस्सों में फैली हुई है, खासकर बियोबियो (Biobío) और न्यूब्ले (Ñuble) क्षेत्रों में. Photo: Reuters
ये इलाके राजधानी सैंटियागो से करीब 500 किलोमीटर दक्षिण में हैं. स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि राष्ट्रपति गेब्रियल बोरिक ने इन दोनों क्षेत्रों में 'आपदा की स्थिति' (state of catastrophe) घोषित कर दी है. Photo: Reuters
कम से कम 18 से 19 लोग मारे गए हैं. मौत का आंकड़ा अभी भी बढ़ सकता है. 50000 से ज्यादा लोग अपने घरों से निकालकर सुरक्षित जगहों पर भेजे गए हैं. आग ने 20000 हेक्टेयर जंगल, खेत और भूमि जला दी है. Photo: Reuters
कम से कम 325 घर पूरी तरह जलकर खाक हो गए. कई कारें, स्कूल, चर्च और अन्य इमारतें भी नष्ट हुईं. पूरे देश में 24 जगह आग लगी हुई हैं. सबसे बड़ी आग ट्रिनिटेरियास (Trinitarias) है, जो 23 किलोमीटर से ज्यादा फैल चुकी है. हजारों घरों व एक गैस प्लांट को खतरा है. 19 लोग घायल हुए हैं. Photo: Reuters
तापमान 38 डिग्री सेल्सियस (100°F) से ऊपर पहुंच गया है. हवाएं आग को बहुत तेजी से फैला रही हैं, जैसे जंगल में आग की लपटें उड़कर आगे बढ़ रही हों. चिली में कई सालों से कम बारिश पड़ रही है. Photo: Reuters
जंगल में सूखी लकड़ी, पत्तियां और घास बहुत ज्यादा हैं, जो आग के लिए ईंधन का काम कर रही हैं. नमी बहुत कम (25% से नीचे) और गर्म हवाएं (foehn winds) स्थिति को और खराब कर रही हैं. Photo: Reuters
राष्ट्रपति गेब्रियल बोरिक ने कहा कि सभी संसाधन उपलब्ध हैं. आपदा की स्थिति घोषित होने से सेना को मदद के लिए बुलाया जा सकता है. लगभग 3,000 फायरफाइटर्स (अग्निशमन कर्मी) दिन-रात काम कर रहे हैं. हेलीकॉप्टर और विमानों से पानी और फायर रिटार्डेंट डाला जा रहा है. Photo: Reuters
कुछ इलाकों में इमरजेंसी शेल्टर बनाए गए हैं, जहां हजारों लोग रह रहे हैं. लिरक्वेन (Lirquen) और कोंसेप्सियन (Concepción) में लोग आधी रात को आग से घिर गए. कई परिवारों ने घर, कार और पालतू जानवर सब कुछ खो दिया. Photo: Reuters
चिली में गर्मियों में जंगल की आग आम है, लेकिन यह दौर बहुत खतरनाक है. 2024 में वैल्पाराइसो क्षेत्र की आग से 130+ लोग मारे गए थे – वह देश की सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदा थी. अब 2026 की यह आग भी उसी तरह की लग रही है. जलवायु परिवर्तन, सूखा और गर्म मौसम इसे और बढ़ा रहे हैं. Photo: Reuters