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साइंस न्यूज़

देश के पहले सौर मिशन में उत्तराखंड का यह सेंटर करेगा ISRO की मदद

aajtak.in
  • हल्द्वानी/नई दिल्ली,
  • 27 अप्रैल 2021,
  • अपडेटेड 8:50 PM IST
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भारत के पहले सौर अंतरिक्ष मिशन से प्राप्त होने वाले आंकड़ों को एक वेब इंटरफेस पर जमा करने के लिए एक कम्युनिटी सर्विस सेंटर की स्थापना की गई है, ताकि उपयोगकर्ता इन आंकड़ों को तत्काल देख सकें. वैज्ञानिक तरीके से उसका विश्लेषण कर सकें. इस सेंटर का नाम है आदित्य L1 सपोर्ट सेल (AL1SC). 

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इस सेंटर को इसरो (ISRO) और भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंस (ARIES) ने मिलकर बनाया है. इस केंद्र का उपयोग अतिथि पर्यवेक्षकों (गेस्ट ऑब्जर्वर) द्वारा वैज्ञानिक आंकड़ों के विश्लेषण और विज्ञान पर्यवेक्षण प्रस्ताव तैयार करने में किया जाएगा. (फोटोः ISRO)

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AL1SC की स्थापना ARIES के उत्तराखंड स्थित हल्द्वानी परिसर में किया गया है, जो इसरो के साथ संयुक्त रूप काम करेगा ताकि भारत के पहले सौर अंतरिक्ष मिशन आदित्य L1 (Aditya-L1) से मिलने वाले सभी वैज्ञानिक विवरणों और आंकड़ों का अधिकतम विश्लेषण और उपयोग किया जा सके. (फोटोः FB/ARIES)

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यह केंद्र छात्रों और विभिन्न अनुसंधान संस्थानों, विश्वविद्यालयों, विद्यालयों इत्यादि के शिक्षकों तथा Aditya-L1 पेलोड टीम एवं खगोल जगत के अनुसंधान से जुड़ी कम्युनिटी के बीच ब्रिज का काम करेगा. इस केंद्र से यह उम्मीद जताई जा रही है कि आदित्य L1 के वैज्ञानिक आंकड़ों के रखरखाव के लिए आवश्यक विश्लेषक सॉफ्टवेयर के प्रारूप तथा उसके विकास में इसरो की सहायता करेगा. (फोटोः NASA)

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यह केंद्र दुनिया की अन्य अंतरिक्ष वेधशालाओं से भी जुड़ेगा. सौर मिशन से जुड़े आंकड़े उपलब्ध कराएगा, जो आदित्य L1 से प्राप्त होने वाले विवरण में मदद कर सकते हैं. उपयोगकर्ताओं को आदित्य L1 की अपनी क्षमताओं से आगे का वैज्ञानिक लक्ष्य प्राप्त करने योग्य बना सकते हैं. 

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इस केंद्र के अलावा डेटा विश्लेषण करने के लिए राष्ट्रीय उपयोगकर्ताओं को ट्रेनिंग भी देगा. भारत के विभिन्न स्थानों पर 2-3 दिवसीय छोटी-छोटी कार्यशालाएं होंगी. ये वर्कशॉप्स ऐसे विश्वविद्यालयों में होंगी जहां आदित्य L1 से जुड़े आंकड़ों को डाउनलोड करने और उनका विश्लेषण करने की सुविधा उपलब्ध नहीं है. (फोटोःगेटी)

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यह केंद्र आदित्य L1 से प्राप्त होने वाले आंकड़ों को न सिर्फ भारत में बल्कि दुनिया के अन्य देशों में भी सुलभ कराएगा. इससे इस मिशन के बारे में अधिक से अधिक लोगों को जानकारी मिलेगी. यह प्रत्येक इच्छुक व्यक्ति को आंकड़ों का वैज्ञानिक विश्लेषण करने की छूट देगा. 

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