शास्त्रों में प्रदोष व्रत को सर्वसुख प्रदान करने वाला व्रत बताया गया है. हर महीने की दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत किया जाता है. सोमवार के दिन प्रदोष व्रत पड़ने से इसका महत्व और बढ़ जाता है. इस व्रत के प्रभाव से चन्द्रमा अपना शुभ फल देता है. सोम प्रदोष व्रत के दिन शिव की आराधना से व्यक्ति की सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं. जो प्रदोष सोमवार को पड़ता है उसे सोम प्रदोष (Som Pradosh Vrat 2021) कहा जाता है. सोम प्रदोष व्रत करने और भगवान शिव की सच्चे मन से पूजा करने से हर कष्ट से मुक्ति मिलती है. सोम प्रदोष को चन्द्र प्रदोषम भी कहा जाता है. इसे मनोकामनाओं की पूर्ति करने के लिए किया जाता है.
सोम प्रदोष व्रत की पूजा विधि- किसी भी प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा सूर्यास्त से 45 मिनट पहले और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक की जाती है. सुबह नहा कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें. हल्के लाल या गुलाबी रंग का वस्त्र धारण करना शुभ रहता है. चांदी या तांबे के लोटे से शुद्ध शहद एक धारा के साथ शिवलिंग पर अर्पण करें. उसके बाद शुद्ध जल की धारा से अभिषेक करें तथा ॐ सर्वसिद्धि प्रदाये नमः मन्त्र का 108 बार जाप करें. अपनी समस्या के लिए भगवान शिव से प्रार्थना करें. प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें और शिव चालीसा पढ़ें. आज के दिन महामृत्युंजय मंत्र का जाप जरूर करना चाहिए.
सोम प्रदोष व्रत का महत्व- हर प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा होती है. सोमवार का दिन भगवान शिव का दिन माना जाता है. सोमवार के दिन प्रदोष व्रत पड़ने से इसका महत्व और बढ़ जाता है. सोम प्रदोष व्रत करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त की जा सकती है इससे जीवन में किसी प्रकार का अभाव नहीं रहता है. प्रदोष व्रत करने से धन सबंधी दिक्कतें भी दूर हो जाती हैं. मान्यता है कि सोम प्रदोष व्रत करने से योग्य वर-वधू की प्राप्ति होती है. भगवान शिव की अराधना करने से जातक के सभी कष्ट ही दूर नहीं होते हैं, बल्कि मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति भी होती है.
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