Budh Purnima 2026: घर में बुद्ध की कौन सी मूर्ति कहां रखें? जानें जरूरी नियम

Budh Purnima 2026: बुद्ध पूर्णिमा के शुभ अवसर पर जानें घर के लिए कौन सी बुद्ध की प्रतिमा सही होती है. अपनी जरूरत के अनुसार समझें ध्यान, अभय और भूमिस्पर्श जैसी विभिन्न मुद्राओं का महत्व, सही धातु और वास्तु से जुड़े जरूरी नियम ताकि घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे.

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बुद्ध की प्रतिमा सकारात्मक ऊर्जा और सुकून लेकर आती है. बुद्ध की प्रतिमा सकारात्मक ऊर्जा और सुकून लेकर आती है.

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 मई 2026,
  • अपडेटेड 1:29 PM IST

Budh Purnima 2026: आज बुद्ध पूर्णिमा का बड़ा ही पावन दिन है. आज ही के दिन भगवान बुद्ध का जन्म हुआ, उन्हें ज्ञान मिला और आज ही उन्होंने निर्वाण भी प्राप्त किया. दुनिया भर में लोग आज के दिन को शांति और भाईचारे के प्रतीक के रूप में मनाते हैं. ऐसे में बुद्ध पूर्णिमा के मौके पर घर में बुद्ध की मूर्ति लाना बहुत शुभ माना जाता है. लेकिन घर में बुद्ध की मूर्ति लगाते वक्त ध्यान रखना जरूरी है कि यह सिर्फ सजावट की चीज़ नहीं है, बल्कि घर में एक सकारात्मक ऊर्जा और सुकून लेकर आती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि बुद्ध की हर मूर्ति का अपना एक खास मतलब होता है? आज इस खास मौके पर चलिए जानते हैं कि आपको अपने घर के लिए कौन सी बुद्ध प्रतिमा चुननी चाहिए और उसे रखने का सही तरीका क्या है.

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बुद्ध की अलग-अलग मुद्राएं: किसका क्या है मतलब?
बुद्ध की हर प्रतिमा में उनके हाथों की स्थिति (मुद्रा) एक अलग संदेश देती है. इसलिए अपनी जरूरत के हिसाब से सही मूर्ति चुनना बेहद जरूरी है.

ध्यान बुद्ध (Meditating Buddha): अगर आप चाहते हैं कि घर में शांति रहे और आपका मन काम में लगे, तो पद्मासन में बैठे बुद्ध की यह मूर्ति बेस्ट है. इसे घर के किसी शांत कोने या पूजा घर में रखें. 

अभय बुद्ध (Protection Buddha): इस मूर्ति में बुद्ध का दाहिना हाथ उठा हुआ होता है. यह आशीर्वाद और सुरक्षा का प्रतीक है.  अगर आपको डर लगता है या आत्मविश्वास की कमी महसूस होती है, तो इसे घर के मुख्य द्वार के पास रखें. 

भूमिस्पर्श बुद्ध (Earth Touching Buddha): इसमें बुद्ध का हाथ ज़मीन को छू रहा होता है. यह मुद्रा अटूट विश्वास और सच्चाई को दर्शाती है. यह ज्ञान की तलाश करने वालों के लिए बहुत शुभ है. 

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लेटे हुए बुद्ध (Reclining Buddha): यह मूर्ति बुद्ध के निर्वाण काल को दर्शाती है. यह आंतरिक शांति और सद्भाव का प्रतीक है.  इसे अपने लिविंग रूम में इस तरह रखें कि उनका चेहरा दाईं  ओर हो. 

वरद मुद्रा (Medicine Buddha): इसमें बुद्ध का हाथ नीचे की ओर खुला होता है. अगर घर में कोई बीमार रहता है या आप अच्छी सेहत चाहते हैं, तो यह प्रतिमा उपचार और करुणा का प्रतीक मानी जाती है. 

बुद्ध सिर या बुद्ध प्रतिमा (Buddha Bust/Head Statue): बुद्ध का सिर या बस्ट प्रतिमा उनके अपार ज्ञान और बुद्धत्व  को दर्शाती है.  यह हमें हमेशा याद दिलाती है कि शांति की शुरुआत हमारे दिमाग और सोच से होती है. 

कहाँ रखें: अगर आपके पास छोटी बुद्ध हेड प्रतिमा है, तो इसे किसी मेज या वेदी पर रख सकते हैं.  वहीं, अगर आप बड़ी प्रतिमा ला रहे हैं, तो इसे अपने घर या ऑफिस के हॉल के बीचों-बीच एक सेंटरपीस के तौर पर लगाएं. यह न केवल माहौल को सुंदर बनाती है, बल्कि वहाँ आने-जाने वालों को शांति का अहसास भी कराती है.

 कैसी होनी चाहिए मूर्ति की बनावट ?
आप मूर्ति कहाँ रख रहे हैं, उसके हिसाब से सही धातु या चीज़ का चुनाव करें. 

धातु : घर के अंदर के लिए पीतल या तांबे की मूर्तियाँ सबसे शुभ मानी जाती हैं. 

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पत्थर : अगर आप बालकनी या बगीचे  में बुद्ध को स्थापित करना चाहते हैं, तो पत्थर की मूर्ति ही चुनें. 

लकड़ी : प्राकृतिक अहसास और घर के माहौल को हल्का रखने के लिए लकड़ी की मूर्तियाँ बेहतरीन होती हैं. 

वास्तु का रखें ध्यान: कहाँ रखें और कहाँ नहीं?
मूर्ति को घर में स्थापित करते समय इन 3 बातों का गांठ बांध लें. 

ऊंचाई पर रखें: बुद्ध को कभी भी सीधे ज़मीन पर न रखें.  उन्हें हमेशा आंखों के स्तर पर किसी ऊंची टेबल, स्टैंड या वेदी पर ही जगह दें. 

सही दिशा: मूर्ति का चेहरा हमेशा पूर्व  दिशा की ओर होना चाहिए.  अगर संभव न हो, तो इसे घर के मुख्य द्वार की तरफ रखें ताकि सकारात्मक ऊर्जा अंदर आए. 

इन जगहों से बचें: भूलकर भी बुद्ध की प्रतिमा को बेडरूम, बाथरूम या किचन में न रखें.  उन्हें हमेशा साफ-सुथरी और शांत जगह पर ही रखें. 

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