नर्मदा नदी का हर पत्थर क्यों है शिवलिंग? इस पौराणिक कथा में है जवाब

भगवान शिव की पूजा में शिवलिंग का विशेष स्थान है, लेकिन इसकी स्थापना और दैनिक पूजा में कठिनाई होती है. नर्मदेश्वर शिवलिंग इस समस्या का समाधान है, जो नर्मदा नदी के प्राकृतिक पत्थरों से बनता है और इसकी पूजा सरल है.

Advertisement
नर्मदा नदी के हर पत्थर को शिवलिंग होने का सौभाग्य प्राप्त है नर्मदा नदी के हर पत्थर को शिवलिंग होने का सौभाग्य प्राप्त है

विकास पोरवाल

  • नई दिल्ली,
  • 14 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:26 AM IST

भगवान शिव की पूजा-अर्चना की बात आती है तो शिवलिंग का ध्यान अपने आप आ जाता है. शिवलिंग को शिव का स्वरूप, शिव का प्रतीक और शिव चिह्न भी कहा जाता है. लेकिन शिवलिंग की स्थापना को लेकर कठिन नियम और इसकी दैनिक पूजा में अभिषेक का जरूरी होना जाना शिवजी की सरल पूजा को भी कठिन बना देता है. लेकिन महादेव जो कि हर समस्या का समाधान हैं, उन्होंने इस दिक्कत का भी हल खुद ही दे दिया है. 

Advertisement

नर्मदा नदी की महिमा
शिवलिंग की स्थापना और उसकी कठिन पूजा पद्धति की समस्या का समाधान है नर्मदेश्वर शिवलिंग. स्कंद पुराण के रेवाखंड में नर्मदा नदी की महिमा का वर्णन है. इस खंड में नर्मदा नदी का महत्व बताने वाली कई कहानियां हैं. इन्हीं कथाओं में सबसे पहले है कि नर्मदा नदी ने खुद भगवान शिव की तपस्या की थी और तब शिवजी ने ही नर्मदा को माता का दर्जा देकर मुक्ति देने वाली कहा था. इस पुराण में दर्ज है कि यमुना नदी का जल 7 दिन में पवित्र करता है. सरस्वती नदी का जल 3 दिन में, गंगा नदी स्पर्श और स्नान करते ही पवित्र और दर्शन भर कर लेने से मुक्त कर देती है, लेकिन नर्मदा नदी स्मरण करने भर से पवित्र कर देती है.

नर्मदा के पत्थरों पर प्राकृतिक कलाकारी
यह पवित्रता उसे महादेव शिव के वरदान से ही मिली है. इसी पवित्रता की वजह से नर्मदा नदी में पाया जाने वाला हर पत्थर शिवलिंग होता है. इस शिललिंग की खासियत होती है कि इस पर प्राकृतिक ही शिव लक्षणों का शृंगार होता है. यानी नदी के जल की टक्कर और लगातार नदी में रहकर घिसते रहने के कारण नर्मदा नदी के पत्थर पर ऐसी बनावट उभर आती हैं, जो उसे शिवलिंग से जैसा बना देती हैं. जैसे दो समान रंगों में बंटा पत्थर अर्धनारीश्वर कहलाता है. इसी तरह तीन धारी वाला पत्थर त्रिपुंड शिवलिंग कहलात है. ऊपर की ओर गोलाई में सात सफेद धारियां उभरती हैं तो इसे जनेऊधारी शिवलिंग कहते हैं.

Advertisement

नर्मदेश्वर शिवलिंग को घर में भी स्थापित किया जा सकता है और इसकी दैनिक पूजा भी आसान विधियों से की जाती है. इसकी पूजा शास्त्रों में बहुत फलदेने वाली कही गई है. यह साक्षात शिवस्वरूप, सिद्ध व स्वयंभू (जो भक्तों के कल्याण के लिए स्वयं प्रकट हुए हैं) शिवलिंग है. इसको वाणलिंग भी कहते हैं. नर्मदेश्वर शिवलिंग की स्थापना सरल होती है और सिर्फ हर एक दिन सामान्य जल से अभिषेक करना भी पर्याप्त होता है.

क्या है नर्मदेश्वर शिवलिंग का महत्व
शास्त्रों में कहा गया है कि मिट्टी या पाषाण से करोड़ गुना अधिक फल सोने से बने शिवलिंग के पूजन से मिलता है. उससे करोड़ गुना अधिक मणि और मणि से करोड़ गुना अधिक फल बाणलिंग नर्मदेश्वर के पूजन से प्राप्त होता है. घर में गृहस्थ लोगों को नर्मदेश्वर शिवलिंग की पूजा प्रतिदिन करनी चाहिए, क्योंकि यह परिवार का मंगल करने वाला, सभी सिद्धियों व स्थिर लक्ष्मी को देने वाला शिवलिंग है. सामान्यत:शिवलिंग पर चढ़ी कोई भी वस्तु ग्रहण नहीं की जाती, लेकिन नर्मदेश्वर शिवलिंग का प्रसाद ग्रहण कर सकते हैं.

एक कथा ऐसी भी है कि भगवान शिव ने देवी पार्वतीजी ने एक बार चातुर्मास का संकल्प लिया. वह चार महीने (जब भगवान विष्णु सोते हैं) तक तपस्या के लिए वन में चली गईं. पार्वतीजी के तपस्या में लीन होने पर महादेव पृथ्वी पर विचरण करने लगे. भगवान शिव यमुना के किनारे हाथ में डमरु लिए, माथे पर त्रिपुण्ड लगाए, बढ़ी हुईं जटाओं के साथ मनोहर दिगम्बर रूप में हर ओर घूमते हुए और नृत्य करते हुए घूम रहे थे. उनके इस स्वरूप से भक्ति भाव में बहुत-सी मुनि पत्नियां भी उनके साथ नाम जप करते हुए झूमने लगीं.

Advertisement

शिवजी ने नर्मदा को दिया वरदान

संन्यासी और मुनि शिव को इस वेष में पहचान नहीं सके बल्कि उन पर क्रोध करने लगे. मुनियों ने क्रोध में आकर शिव को शाप दे दिया कि तुम पत्थऱ रूप हो जाओ. इस शाप के कारण शिवजी अमरकंटक पर शिवलिंग रूप में प्रकट हुए और नर्मदा नदी ने उनका अभिषेक किया. तब शिवजी ने वरदान दिया कि हे ’नर्मदे! तुम्हारे तट पर जितने भी पत्थर हैं, वे सब मेरे वर से शिवलिंगरूप हो जाएंगे और तुम्हारे दर्शनमात्र से सम्पूर्ण पापों का निवारण हो जाएगा. यह वरदान पाकर नर्मदा भी प्रसन्न हो गयीं. इसलिए कहा जाता है–‘नर्मदा का हर कंकर शंकर है.  इस कारण नर्मदा में जितने पत्थर हैं, वे सब शिवरूप हैं.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement