क्या महाशिवरात्रि महादेव-पार्वती के विवाह का दिन है? जानिए क्यों खास है आज का दिन

महाशिवरात्रि केवल शिव-पार्वती के विवाह का दिन नहीं है, बल्कि यह शिव के अनंत ज्योतिर्लिंग स्वरूप के प्राकट्य और आध्यात्मिक जागरण की रात है. यह पर्व शिव-शक्ति के मिलन, तांडव नृत्य, योग साधना और त्याग की महत्ता को दर्शाता है.

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शिवरात्रि को महादेव-माता पार्वती के वैवाहिक वर्षगांठ के तौर पर देखा जाता है शिवरात्रि को महादेव-माता पार्वती के वैवाहिक वर्षगांठ के तौर पर देखा जाता है

विकास पोरवाल

  • नई दिल्ली,
  • 15 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:07 AM IST

सामान्य जानकारी है कि महाशिवरात्रि, महादेव शिव और देवी पार्वती के विवाह का दिन है. यानी इस दिन को हम अध्यात्मिक रूप से भी विवाह की वर्षगांठ यानी शिव-पार्वती की मैरिज एनीवर्सरी के तौर पर देखते हैं. आजकर रील्स और सोशल मीडिया में त्रियुगीनारायण धाम बहुत फेमस हो रहा है, जिसे लोग महादेव-पार्वती के विवाह स्थल के तौर पर जानते हैं. मैरिड कपल्स बड़ी तादाद में वहां पहुंचते हैं और शादी रचाते हैं.

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क्या हुआ था महाशिवरात्रि के दिन
लेकिन क्या शिवरात्रि का अर्थ सिर्फ इतना ही है? अगर हम पुराणों, वेदों और उपनिषदों की ओर देखें तो पता चलता है कि महाशिवरात्रि का स्वरूप इससे कहीं अधिक व्यापक और आध्यात्मिक है. जब शिव के उद्गम की बात आती है तो स्कंद पुराण में वर्णन मिलता है कि सृष्टि की शुरुआत में एक अनंत प्रकाश स्तंभ प्रकट हुआ. उस दिव्य ज्योति की न तो शुरुआत का पता था और न ही अंत का. खुद भगवान विष्णु और ब्रह्मा भी उसका छोर नहीं खोज सके.

आखिरकार उनकी प्रार्थना पर भगवान शिव उस अनंत ज्योति से साकार रूप में प्रकट हुए. यही ‘लिंगोद्भव’ यानी महादेव के लिंगस्वरूप में उत्पन्न होने की घटना मानी जाती है, और यहीं से शिवलिंग की अवधारणा सामने आती है. शिवलिंग किसी मूर्ति का रूप नहीं, बल्कि उस अनंत, निराकार, अविनाशी चेतना का प्रतीक है जिसका कोई आरंभ या अंत नहीं.

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क्या है सनातन का सिद्धांत?
सनातन दर्शन का अद्वैत सिद्धांत 'अहम् ब्रह्मास्मि' हमें बताता है कि आत्मा और ब्रह्म अलग नहीं हैं. यही भाव “शिवोऽहम्” में भी झलकता है, अर्थात मैं ही शिव हूं. ये दोनों कथन अलग दिखाई देते हैं, पर भाव एक ही है. जो कुछ इस सृष्टि में दिख रहा है और जो अदृश्य है, वह सब उसी परम चेतना का विस्तार है. ऋग्वेद का वाक्य 'एकं सत् विप्रा बहुधा वदन्ति' इसी सत्य की पुष्टि करता है कि सत्य एक है, ज्ञानी उसे अनेक नामों से पुकारते हैं.

आगे छान्दोग्य उपनिषद में “एकोऽहं बहुस्याम” कहा गया, मैं एक हूं, अनेक होना चाहता हूं. यही सृष्टि का विस्तार है, यही शिव का विराट स्वरूप है. यही महाशिवरात्रि का पर्व भी है. यानी महाशिवरात्रि का दिन सिर्फ शिव विवाह का दिन नहीं है, बल्कि यह अध्यात्म के जागरण की रात है. खुद को हील करने की, आत्मा की आवाज सुनने की और खुद के भीतर शिव को पहचानने की रात है.

इसलिए महाशिवरात्रि केवल विवाह का पर्व नहीं है. यह वह पवित्र रात्रि मानी जाती है जब फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को शिव निराकार ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए. यह अज्ञान के अंधकार पर ज्ञान की रोशनी का उत्सव है.

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शिव विवाह की तारीखों में मतभेद
कुछ शास्त्रों के अनुसार भी देखें तो यह तिथि शिव-विवाह की नहीं है. शिवपुराण ही यह बताता है कि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को भगवान सदाशिव अपने अनादि-अनंत शिवलिंग स्वरूप में प्रकट हुए थे. इसी कारण यह रात्रि महाशिवरात्रि कहलाती है. शिवपुराण के अनुसार भगवान शिव का विवाह माता सती से चैत्र माह में और माता पार्वती से मार्गशीर्ष माह में सम्पन्न हुआ था. इसलिए महाशिवरात्रि का वास्तविक महत्व शिव के प्राकट्य, साधना और उपासना से जुड़ा है. 

महाशिवरात्रि के कुछ और भी मायने हैं, 

1. शिव-शक्ति का मिलन – शिव चेतना हैं, शक्ति ऊर्जा. दोनों का मिलन सृष्टि के संतुलन और समरसता का प्रतीक है.
2. तांडव का रहस्य – मान्यता है कि इसी रात शिव ने सृजन, पालन और संहार के तांडव का दिव्य नृत्य किया, जो जीवन के चक्र को दर्शाता है.
3. आध्यात्मिक जागरण – इस रात जागरण और ध्यान का विशेष महत्व है. योग परंपरा मानती है कि इस समय ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रवाह साधना के लिए अनुकूल होता है.
4. नीलकंठ की करुणा– समुद्र मंथन के दौरान जब हलाहल विष निकला, तब शिव ने उसे ग्रहण कर सृष्टि की रक्षा की. इसीलिए वे नीलकंठ कहलाए. यह त्याग और करुणा का सर्वोच्च प्रतीक है. हालांकि यह घटना सावन की शिवरात्रि के लिए कही जाती है. 

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इस तरह महाशिवरात्रि केवल एक दैवीय विवाह की स्मृति नहीं, बल्कि अनंत चेतना के प्राकट्य, ज्ञान की जागृति, ऊर्जा के संतुलन और त्याग के आदर्श का पर्व है. यह हमें याद दिलाती है कि शिव केवल कैलाशवासी देव नहीं, बल्कि वह चेतना हैं जो हर कण में व्याप्त है. महाशिवरात्रि की रात बाहर के अंधकार में नहीं, भीतर के अज्ञान में दीप जलाने की रात है.

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