न कैमरा, न सोशल मीडिया हैंडल... फिर भी Gen-Z के लिए OG इन्फ्लुएंसर क्यों हैं महादेव

Gen-Z के लिए शिव केवल एक देवता नहीं, बल्कि मानसिक सहारा और जीवन का प्रतीक हैं, जो असलियत, संतुलन और संघर्ष की मिसाल हैं. यह पीढ़ी शिव को “Real OG” मानती है, जो पारंपरिक और आधुनिक दोनों हैं.

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शिवजी की सादगी, सरलता और उनका सहज ध्यान Gen-Z को आकर्षित करता है शिवजी की सादगी, सरलता और उनका सहज ध्यान Gen-Z को आकर्षित करता है

विकास पोरवाल

  • नई दिल्ली,
  • 15 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:51 AM IST

इंस्टाग्राम पर एक रील काफी वायरल थी. गाना पुराना था, लेकिन नए जमाने के नए युवा, जिन्हें आज Gen-Z कहा जाता है वह इस गाने पर वाइब करते नजर आ रहे थे. एक लड़की तो शिव मंदिर पहुंच गई और उसने महादेव के शिवलिंग के साथ ही इस गाने पर रील बनाली जो काफी वायरल हुई. 

इन दो लाइन्स में ही टॉपिक का सार छिपा है. इंस्टाग्राम, रील, Gen-Z और महादेव. सारे कीवर्ड इसी में हैं. यहीं से बात भी शुरू होती है. महादेव Gen-Z के लिए सबसे बड़े और रियल OG हैं. मगर क्यों? और ऐसा कैसे हुआ?

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मेलुहा के महादेव से टीवी सीरियल्स तक
साल 2010 में बैंकर से राइटर बने अमीष त्रिपाठी ने महादेव शिव को सेंटर में रखते हुए उनकी पौराणिक कथाओं पर बेस्ड तीन किताबें लिखी थीं. बेशक अमीश की कहानी माइथॉलजी पर बेस्ड फिक्शन थी, यानी महज कल्पना... लेकिन इस कल्पना ने शिव को देवताओं वाले रवैये से बदलकर बिल्कुल इंसानी लहजे में सामने रखा. यानी अब सिर्फ शिव हाथ उठाकर 'तथास्तु' कहने वालों में से नहीं रहे. वह तीसरी आंख खोल कर भस्म कर देने वाले गुस्सैल नहीं रह गए और त्रिशूल से किसी का वध कर देने वाले सुप्रीम नहीं थे. 

अमीष त्रिपाठी के शिव कॉमन मैन थे, लेकिन अपनी हाई मॉरल वैल्यू के साथ. अपने स्ट्रगल, अपने हिस्से के दुख के साथ. उन्होंने किसी को जज नहीं किया और न ही खुद पर किसी जजमेंट हावी होने दिया. वह प्रेम करते हैं, प्रेमिका का पीछा भी करते हैं और उसके साथ हंसी-मजाक भी, वह अपने कबीले की सुरक्षा करते हैं और फिर जब वह संघर्ष के लिए निकलते हैं तो अपने साथ सभी को जोड़ लेते है. 

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अमीष ने शिवजी को नैतिक संघर्ष वाले किरदार में ढाला, उन्होंने शिव को सिस्टम से सवाल पूछने वाला बनाया. यह Gen-Z के 'एंटी-एस्टैब्लिशमेंट' मूड से मैच करता है और इन्हीं बातों पर Gen-Z फिदा हैं.

अमीष त्रिपाठी की बुक वायरल होने के बाद टीवी सीरियल 'देवों के देव महादेव' ने भी Gen-Z को प्रभावित किया. एक्टर मोहित रैना ने महादेव के किरदार को निभाकर उनकी सोच को घर-घर में पहुंचा दिया. कई इंटरव्यू में उन्होंने स्वीकारा कि इस भूमिका से उनके भीतर शांति और अनुशासन आया. इस किरदार को निभाते-निभाते वे खुद भी ध्यान और संयम के करीब आए.

यूथ पर इसका गहरा असर पड़ा. इंजीनियरिंग कर रहे सुमित कहते हैं 'जब मोहित रैना शिव के रूप में ध्यान लगाते थे, तो सच में लगता था कि शांति क्या होती है, मैं भी तबसे मेडिटेशन कर रहा हूं और ये वाकई काम करता है.'

आज शिव सिर्फ मंदिर तक सीमित नहीं हैं. वे टैटू में हैं, म्यूजिक फेस्ट में हैं, रील्स में हैं. लेकिन यह सिर्फ फैशन नहीं है. इसके पीछे एक तलाश है, पहचान की तलाश. शिवपुराण की कथाओं को लोगों के बीच पॉपुलर बनाने वाले कथा वाचक प्रदीप मिश्रा की कहानियों ने भी लोगों को शिवजी से जोड़ा है. उनकी छोटी-छोटी कहानियों को यूथ रील के तौर पर शेयर करते हैं.

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शिव का सादा जीवन भी युवाओं को छू रहा है. ब्रांडेड दुनिया में, जहां हर चीज दिखावे पर टिकी है, वहां एक देवता जो बाघम्बर पहनता है और श्मशान में बैठता है, वह अलग ही असर डालता है. वह बताता है कि असली ताकत भीतर होती है, बाहर नहीं.

23 साल के सुधांशु एक मैनेजमेंट कंपनी में ट्रेनी हैं. उनके हथेली के ठीक ऊपर त्रिशूल और डमरू का टैटू है. पूछने पर कहते हैं कि 'यह महादेव का सिंबल है और मुझे इससे उनके साथ होने की फीलिंग आती है. शिव मुझे सहारा देते हैं और जब भी कोई डाइसी सिचुएशन होती है तब लगता है कि कोई है जो राइट वे की ओर पुश कर रहा है. शिव मुझे कभी गलत नहीं होने देते.'

आन्या जो कर्नाटक के शिवमोगा से हैं और गौर सिटी में रहती हैं. वह कहती हैं कि बीते पांच साल से मैं हर रोज शिवमंदिर जाती हूं. मेरे तो जिले का नाम भी शिव से जुड़ा है. शिवजी इसलिए पसंद आते हैं कि उनसे हम रिलेट कर पाते हैं. कई बार समय नहीं होता है, तो बस कहीं शिवजी दिख जाते हैं और उन्हें प्रणाम कर लेती हूं. इससे पॉजिटिव फील आता है. यानी उनकी पूजा के लिए भी बहुत एफर्ट नहीं लगते हैं. '

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आज की तेज रफ्तार, सोशल मीडिया के शोर, आइडेंटी क्राइसिस के इस दौर में जब मेंटल प्रेशर न्यू नॉर्मल है तो महादेव ही सहारा बनते हैं. इसलिए Gen-Z के लिए शिव सिर्फ एक पूजनीय देव नहीं, बल्कि एक माइंडसेट हैं एक ऐसा प्रतीक जो कहता है, रियल रहो, हर सिचुएशन में बैलेंस बने रहो लेकिन दिखावा मत करो. आज की पीढ़ी उन्हें मजाक में नहीं, बल्कि भावनात्मक रूप से 'Real OG' कहती है क्योंकि शिव ट्रेंडी भी हैं और ट्रेडिशनल भी और सीमाओं के भीतर रहकर भी उनके भीतर एक 'रेबिलियन' रहता है. 

कैलाश खेर का ही एक पॉपुलर भजन देखिए...

एक सुनो जी, पार्वती
मेरी एक सुनो, गौरा रानी
इस जंगल में तू क्या पावेगी?
कंजरी बन-बन मर जावेगी

भसम रमाऊं, धूनी रमाऊं
तांडव कर-कर डमरू बजाऊं
गुफ़ा बीच मेरा है डेरा री
अभी समझ जा, हे गौरा री

मेरे भूत की माला गले पड़ी
तू तो देख इसे डर जावेगी
मेरे संग तू क्या पावे?

कोई अच्छा कुंवर राजा का ढूंढ
तो रानी बनके बैठ महल
तू रानी बनके बैठ महल

यहां शिव अपनी शाश्वत प्रेमिका गौरा मां से बात कर रहे हैं और साफ शब्दों में कह रहे हैं कि वह कौन हैं, कैसे रहते हैं, क्या करते हैं? इतना सच कौन बोलता है भला आज के टाइम में. लेकिन शिव अपनी होने वाली पत्नी से कुछ नहीं छिपाते. वह अपनी बारात में भी वैसे ही गए जैसे वह असल में हैं. इसलिए शिव अधिक पसंद आते हैं. शिव देवताओं की उस परंपरागत इमेज में नहीं गुम हो जाते हैं जहां लग्जरी, रॉयल ट्रीटमेंट और डिसिप्लीन की बातें बढ़ा-चढ़ा कर हों. वे कैलाश पर रहते हैं, भस्म रमाते हैं, गले में सांप पहनते हैं और श्मशान को भी अपना घर बना लेते हैं.

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Gen Z, जो 'परफेक्ट लाइफ' के दिखावे से ऊब चुकी है, उसे शिव का यह बिंदास और असली स्वभाव बेहद आकर्षक लगता है. वे सामाजिक मानकों के पीछे नहीं भागते. वे जैसे हैं, वैसे ही सामने आते हैं. यही असलियत उन्हें 'ऑथेंटिक' बनाती है.

मेंटल हेल्थ के दौर में ‘आदि योगी’
आज की पीढ़ी मानसिक स्वास्थ्य को लेकर पहले से कहीं ज्यादा जागरूक है. एंग्जायटी, ओवरस्टिमुलेशन, डिजिटल थकान और बर्नआउट, ये शब्द अब रोजमर्रा की बातचीत का हिस्सा हैं. शिव ‘आदि योगी’ हैं, ध्यान और योग के प्रथम गुरु. उनकी समाधि में लीन छवि, बंद आंखें और शांत मुद्रा एक संदेश देती है कि अराजकता के बीच भी भीतर शांति संभव है. Gen Z के लिए यह केवल धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि “मेंटल एस्केप” है, एक याद दिलाने वाला संकेत कि कभी-कभी दुनिया को म्यूट कर देना भी जरूरी है.

शिव रुद्र भी हैं और महादेव भी. वे संहारक हैं, लेकिन कुछ नया बनाने के लिए. वे तपस्वी हैं, लेकिन एक समर्पित परिवार पुरुष भी. पार्वती के साथ उनका संबंध साझेदारी और समानता का प्रतीक माना जाता है. यह द्वैत एक साथ ‘फायर’ और ‘फ्लो’ होना Gen Z को गहराई से छूता है. क्योंकि यह पीढ़ी खुद भी कई पहचान साथ लेकर चलती है.

वे जानते हैं कि इंसान केवल एक पहचान में नहीं जीता. शिव इस जटिलता को स्वीकार करते हैं. वे सिखाते हैं कि भीतर के तूफान और भीतर की शांति, दोनों को साथ लेकर चलना ही जीवन है.

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भौतिकता के इस युग में, जहां सफलता का पैमाना अक्सर पैसे और दिखावे से तय होता है, शिव का जीवन इसके ठीक उलट है. वे सादगी, तप और प्रकृति से जुड़ाव के प्रतीक हैं. कैलाश का निवास, गंगा का प्रवाह, नंदी और नाग, सब प्रकृति से गहरे संबंध की ओर इशारा करते हैं. पर्यावरण और सस्टेनेबिलिटी को लेकर सजग Gen Z के लिए यह जीवन-दर्शन बेहद खास है. उन्हें लगता है कि शिव केवल पूजा का विषय नहीं, बल्कि एक इको-फ्रेंडली चेतना के प्रतीक भी हैं.

संहार: गलत सिस्टम का, जीवन का नहीं
Gen Z शिव के संहारक रूप को एक क्रांतिकारी ऊर्जा के रूप में देखती है. पुराने, ओल्ड स्कूल, घिसेपिटे, दकियानूसी, अन्यायी सिस्टम को तोड़कर नई शुरुआत करने की ताकत. यह वही भावना है जो सामाजिक आंदोलनों, आवाज उठाने और बदलाव की मांग में दिखती है. शिव की तीसरी आंख केवल क्रोध का प्रतीक नहीं, बल्कि सत्य के जागरण का संकेत है.

आज की पीढ़ी कठोर, जटिल धार्मिक नियमों से दूरी बनाकर व्यक्तिगत आध्यात्मिक अनुभव को प्राथमिकता देती है. शिव 'भोलेनाथ' हैं, आसान से प्रसन्न होने वाले. वे भेदभाव नहीं करते. वे देवताओं के भी देव हैं और गणों के भी. वे साधु-संतों के भी हैं और समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के भी. Gen Z को यह फेसिनेट करता है. उन्हें लगता है कि यहां आने के लिए किसी फॉर्मिलिटी की जरूरत नहीं. सिर्फ सच्चे भाव की जरूरत है.

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शिव की इमेज अपने आप में एक विजुअल स्टेटमेंट है. जटाएं, चंद्रमा, तीसरा नेत्र, सर्प, त्रिशूल और डमरू. ये सिंबल ग्राफिक आर्ट, टैटू, म्यूजिक वीडियोज और डिजिटल कंटेंट में आसानी से ढल जाते हैं. शिव की इमेज 'एस्थेटिक और मेटल' दोनों है. यही कारण है कि वे केवल मंदिरों तक सीमित नहीं, बल्कि पॉप कल्चर का भी हिस्सा बन चुके हैं.

इसलिए Gen Z के लिए शिव केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि जीवन का दर्शन हैं. वे सिखाते हैं कि असली बनो, संतुलन साधो, अन्याय के खिलाफ खड़े रहो और भीतर की शांति को मत खोओ. यही वजह है कि आज की डिजिटल पीढ़ी जब 'Real OG' कहती है, तो उसके पीछे गहरी समझ और जुड़ाव छिपा होता है. महादेव उनके लिए ट्रेंड नहीं, ट्रुथ हैं. वही ट्रुथ जो सदियों से 'सत्यम शिवम् सुंदरम्' का गान कर रहा था, लेकिन इसे असल में समझा नई पीढी ने है. शायद इसलिए शिव आज के दौर के ऐसे इन्फ्लुएंसर हैं, जिनके पास न कैमरा है, न अकाउंट, फिर भी करोड़ों लोग उनकी वाइब में जीते हैं. Gen-Z के लिए शिव ट्रेंड नहीं हैं, एक टेम्परामेंट हैं.

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