कहते हैं कि पूत के पांव पालने में दिख जाते हैं. साल का पहला हफ्ता बीता नहीं है और आने वाले दिनों में 'भविष्य के अंधकार'की झलक मिलने लगी है. ग्रहों की स्थिति, राशियों में उनका प्रभाव और इससे दुनिया भर में पड़ने वाला असर खतरनाक हो सकता है.
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ग्रहों की चाल, राशियों में उनके गोचर और खगोलीय घटनाएं 2026 में सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक माहौल पर कुछ खास असर डाल सकती हैं. हालांकि यह वर्ष सूर्य के प्रभाव का वर्ष है. सूर्य का उच्च भाव में होना सफलता, सामाजिक प्रतिष्ठा, मान-सम्मान और वैभव में वृद्धि दिलाता है, लेकिन इसके साथ अन्य ग्रहों की चाल उनका गोचर और दूसरे ग्रहों के साथ मिलकर बनने वाली उनकी युति कहीं-कहीं कुछ बुरे प्रभाव भी डाल सकती है.
क्या 2025 से भी खतरनाक होगा साल 2026?
कुछ प्रभाव अभी से दिखने लगा है. जैसे अमेरिका का वेनेजुएला पर हमला कर वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को बंदी बना लेना. साल की शुरुआत में शुक्र और मंगल की युति का योग बना. मंगल युद्ध का देवता है और यह संघर्ष को जन्म देता है. इसलिए युद्धों के मामले में यह साल 2025 से भी अधिक खतरनाक हो सकता है. आगे और क्या-क्या होने वाला है, डालते हैं इसपर एक नजर-
इस साल आएगा दुर्मति संवत्सर
सनातन परंपरा के हिसाब से देखें तो इस साल अगले दो महीनों में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से जो नया संवत शुरू होने वाला है, वह अपने साथ बुरे प्रभाव लेकर आने वाला है. इसे दुर्मति संवत्सर कहते हैं.
इस साल यह दुर्मति नाम का संवत्सर शुरू होने वाला है. सनातन परंपरा में संवत्सरों की संख्या 60 है. दुर्मति इनमें से 55वें नंबर पर आता है. यानी हर 60 साल पर एक बार दुर्मति संवत आता है. यह संवत्सर अपने साथ ऐसी ज्योतिषीय परिस्थितियां लाता है जो राजाओं की बुद्धि हर लेता है और उन्हें निरंकुश बनाता है.
असल में 60 संवत्सर 20-20 के तीन खंड में बंटे हैं. पहले 20 (1 से 20) संवत्सर ब्रह्मा के होते हैं, जिसे ब्रह्मविंशति कहते हैं. दूसरे 20 (21 से 40) संवत्सर विष्णु के होते हैं जो विष्णुसंवत्सर कहलाते हैं और तीसरे 20 संवत्सर (41 से 60) रुद्रविंशति कहलाते हैं. इस 55वें संवत्सर यानी दुर्मति में वर्षा मध्यम होगी और राजाओं के बीच कलह बढ़ेगा. प्रजा भी असंतुष्ट रहेगी. इस संवत्सर के देवता पितर हैं. इसको अनुसार देखें तो साल 2026 में आने वाले दिनों में कई तरह के बु्रे प्रभाव देखने को मिल सकते हैं.
मंगल कराएगा टकराव!
साल की शुरुआत में शुक्र और मंगल की युति का योग बना. मंगल युद्ध का देवता है और यह संघर्ष को जन्म देता है. इसलिए युद्धों के मामले में यह साल 2025 से भी अधिक खतरनाक हो सकता है.
13 जनवरी 2026 को शुक्र ग्रह मकर राशि में प्रवेश करने वाले हैं. तीन दिन बाद ही मंगल भी मकर में युति बनाएंगे. इससे मकर राशि में 'शुक्र-मंगल युति' बनती है, जो कुछ राशियों के लिए सफलता और धन-लाभ के योग बनाती है, लेकिन बड़े पैमाने पर यह संयोग संघर्ष और तनाव का कारण बनता है. इसलिए आगे आने वाले दिनों में दुनिया में और भी तनाव और संघर्ष देखने को मिल सकते हैं.
राहु से मिलेंगे मंगल
ग्रहों की चाल के अनुसार 23 फरवरी 2026 से 2 अप्रैल 2026 तक राहु-मंगल की युति होगी. ज्योतिष में इसे अंगारक योग कहा जाता है. जिसे वैदिक ज्योतिष में 'तत्काल प्रतिक्रिया और तनाव से भरा समय माना जाता है. 2026 की शुरुआत में राहु कुंभ राशि और शनि मीन राशि में रहेंगे. इस दौरान 23 फरवरी को मंगल कुंभ राशि में जाकर राहु के साथ अंगारक योग बनाएंगे. फिर 2 अप्रैल को जब मंगल मीन राशि में जाएंगे तो वहां शनि के साथ युति बनाएंगे. यह युति 11 मई तक रहने वाली है. ज्योतिषविदों का कहना है कि मंगल का राहु और शनि के साथ जुड़ना चार राशियों के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है. यह योग व्यक्तिगत तौर पर तो असर डालेगा ही, इसका असर वर्ल्ड लीडर्स पर भी पड़ेगा जो इस संबंधित राशि से जुड़े होंगे.
एक ही महीने के भीतर सूर्य और चंद्र ग्रहण
साल 2026 में कुल चार ग्रहण होने वाले हैं. पहला ग्रहण 17 फरवरी 2026 को लगने वाला है जो कि सूर्य ग्रहण होगा. इसके बाद दूसरा ग्रहण 3 मार्च 2026 को लगने वाला है जो कि पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा. ज्योतिष में ग्रहणों को ऊर्जा परिवर्तन और सामाजिक अस्थिरता के संकेत से जोड़ा जाता है. हालांकि 17 फरवरी 2026 को लगने वाला सूर्यग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा.
यह अफ्रीकी देशों के आसमान पर नजर आएगा. वहीं होलिका दहन के दिन लगने वाला चंद्रग्रहण भारत में नजर आएगा. ये दोनों सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण लगभग 15 दिनों के अंतराल पर और एक महीने के भीतर लगने वाले हैं. ज्योतिष में इस स्थिति को अच्छा नहीं माना जाता है. एक महीने में दो ग्रहणों के लगातार पड़ने से भीषण टकराव और रक्तपात के संयोग बनते हैं.
ज्योतिष में मंगल-राहु, सूर्य-राहु जैसे संयोगों को 'तत्काल निर्णय, संघर्ष और सत्ता दबाव' के संकेत माना जाता है, जिसका असर राजनीतिक नेतृत्व पर देखा जा सकता है. ग्रहणों की तारीखें (17 फरवरी, 3 मार्च) ज्योतिष में 'राजा-प्रजा टकराव', आर्थिक स्थिरता और सैन्य संतुलन पर निगेटिव असर के संकेत देती हैं. कुछ राशियों के लिए 13-15 जनवरी के आसपास 'शुक्र-मंगल युति' शुभ फल लाएगी, हालांकि इससे संघर्ष की ऊर्जा भी बन सकती है.
डिस्क्लेमर- यह लेख ज्योतिषीय मान्यताओं, शास्त्रीय व्याख्याओं और परंपरागत विश्वासों पर आधारित है. इसे किसी भी प्रकार की निश्चित भविष्यवाणी, वैज्ञानिक अनुमान या तथ्यात्मक दावा नहीं माना जाना चाहिए.
विकास पोरवाल