13 सितंबर से श्राध शुरू हो चुके हैं. पितृपक्ष में हम लोग अपने पितरों को याद करते हैं और उनकी याद में दान धर्म का पालन करते हैं. इस बार पितृपक्ष 13 सितंबर से 28 सितंबर तक रहेगा. हिंदू धर्म के अनुसार श्राद्ध में दान करने का भी बड़ा महत्व होता है. पितृपक्ष में गीता का पाठ और दान करना विशेष लाभकारी होता है. इससे पितरों की आत्मा को निश्चित शान्ति मिलती है. आइए जानते हैं कि पितृपक्ष में 10 महादान क्या होते हैं.
1. गौदान- इस दान को करने से व्यक्ति को निश्चित रूप से मुक्ति की प्राप्ति होती है. व्यक्ति इस दान को प्रत्यक्ष भी कर सकता है और संकल्प से भी.
2. भूमि दान- भूमि या इसके अभाव में केवल मिट्टी का दान करने से यह दान पूर्ण हो जाता है. इससे आर्थिक समृद्धि प्राप्त होती है.
3. तिल दान- काले तिलों का दान करने से व्यक्ति को ग्रह और नक्षत्रों की बाधा से मुक्ति मिलती है.
4. स्वर्ण दान- स्वर्ण दान करने से व्यक्ति को कर्ज और रोगों से मुक्ति मिलती है. स्वर्ण के अभाव में केवल दक्षिणा भी दी जा सकती है.
5. घृत दान- गाय का घी पात्र सहित दान करना चाहिए , इससे पारिवारिक जीवन बेहतर हो जाता है.
6. वस्त्र दान- इसमें वस्त्र और उपवस्त्र दोनों अलग अलग दान किये जाते हैं. वस्त्र नवीन हों और फटे पुराने न हों.
7. धान्य दान- इसमें अलग अलग या कोई एक धान्य दान किया जाता है. इससे वंश वृद्धि सम्भव हो जाती है.
8. गुड़ दान- गुड़ का दान करने से पितरों को विशेष संतुष्टि प्राप्त होती है.
9. रजत दान- चांदी का दान करना परिवार और वंश को मजबूत करता है. चांदी के अभाव में सफेद धातु की कोई वस्तु दान की जा सकती है.
10. लवण दान- नमक का दान किए बिना कभी भी दान सम्पूर्ण नहीं होता. नमक का दान करने से प्रेत और आत्माओं की बाधा से मुक्ति मिलती है.