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धर्म

कौन थे महुड़ी जैन मंदिर के मुनि? PM मोदी ने किया जिनका जिक्र

सुमित कुमार/aajtak.in
  • 15 अगस्त 2019,
  • अपडेटेड 1:06 PM IST
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स्वंतत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लालकिले से राष्ट्र को संबोधित किया. इस दौरान पीएम मोदी ने देश के सामने खड़ी चुनौतियों और उपलब्धियों पर भाषण में कई बातें कहीं. अपने भाषण के दौरान पीए मोदी ने गुजरात के महुड़ी जैन मंदिर का जिक्र किया. आइए आपको इस मंदिर की खासियत और इतिहास के बारे में विस्तार से बताते हैं.

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माहुड़ी जैन मंदिर गुजरात के गांधीनगर जिले के महुड़ी में बना है. वैसे तो यह मंदिर विशेष रूप से जैन धर्म के लोगों का है, लेकिन यहां विभिन्न धर्म के लोग भी पूजा करने आते हैं. इस मंदिर में घंटाकर्ण महावीर और पद्मप्रभु की पूजा होती है. महुड़ी तीर्थ, जैनियों के सबसे पवित्र मंदिरों में से एक है.

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2000 साल पुराना इतिहास
यह मंदिर महुड़ी में बनाया गया है जिसे प्राचीनकाल में मधुमती के नाम से जाना जाता है. इसका इतिहास करीब 2000 साल पुराना है. बुद्धिसागर जी महाराज ने इस मंदिर की स्थापना की थी. आचार्य श्री ने जब देखा की जैन धर्म के लोग अपनी मनोकामनाओं के लिए इधर-उधर अन्य मंदिरों और तीर्थ स्थलों पर जा रहे हैं तब उन्होंने घंटाकर्ण महावीर मंदिर की बुनियाद रखी. घंटाकर्ण महावीर को एक क्षत्रीय राजा बताया जाता है.

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मंदिर से बाहर नहीं ले जा सकते प्रसाद
ऐसी मान्यताएं हैं कि मूर्ति में चमत्‍कारी शक्तियां है जो लोगों के दुख हर लेती है. हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन करने आते हैं और भगवान को सुखड़ी का भोग लगाते हैं. यह देवता का पसंदीदा भोजन है. मंदिर के प्रसाद की खास बात यह है कि इसे मंदिर की चारदीवारी से बाहर नहीं लेकर जा सकते.

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कौन थे घंटाकर्ण महावीर?
घंटाकर्ण महावीर तुंगभद्र नामक क्षत्रीय राजा थे. वे धार्मिक बंधुओं, धर्म परायण स्त्रियों व कुंवारी कन्याओं की लूटेरों से रक्षा करते थे. तीर कमान उनका विशेष अस्त्र था इसीलिए इनकी प्रतिमा तीर कमान विद्यमान होते हैं. उन्हें घंटे की ध्वनि बहुत पसंद थी व उनके कान घंटे की आकृति के थे इसलिए उनका नाम घंटाकर्ण-महावीर पड़ा.

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