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धर्म

वैष्णो देवी से अमरनाथ तक, हिंदू धर्म के ये मंदिर जम्मू-कश्मीर की पहचान

सुमित कुमार/aajtak.in
  • 05 अगस्त 2019,
  • अपडेटेड 12:05 AM IST
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जम्मू-कश्मीर 31 अक्टूबर से दो केंद्रित शासित प्रदेशों में विभाजित हो जाएगा. इसमें लद्दाख का हिस्सा अलग हो जाएगा. 'भारत का स्विट्जरलैंड' और 'धरती का स्वर्ग' जैसे कई नामों से अपनी पहचान बनाने वाला जम्मू कश्मीर कई हिंदू धर्म के कई मंदिरों के लिए भी जाना जाता है. आइए जानते हैं यहां के प्रसिद्ध हिंदू मंदिरों के बारे में.

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अमरनाथ-
जम्मू-कश्मीर में स्थित अमरनाथ मंदिर हिंदू धर्म में सबसे पवित्र मंदिरों में से एक माना जाता है. यहां मौजूद अमरनाथ गुफा का बड़ा महत्व है. अमरनाथ मंदिर भगवान शिव को पूर्णरूप से समर्पित है. इस मंदिर तक पहुचने की यात्रा को अमरनाथ की यात्रा कहा जाता है जो पूरे साल मे लगभग 45 दिन ही होती है.

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खीर भवानी मंदिर-
कश्मीर के अनंतनाग के लकड़ीपोरा गांव में स्थित इस मंदिर की देखभाल ज्यादातर मुस्लिम समुदाय के लोग करते हैं. 1990 में जब हिन्दू इस गांव से चले गए तो काफी समय तक यह मंदिर सूना पड़ा रहा. इसके बाद यहां रहने वाले मुस्लिमों ने इस मंदिर की देखरेख की.

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मार्तंड सूर्य मंदिर-
यह भारत का सबसे पुराना सूर्य मंदिर है. इसका इतिहास करीब 1400 साल पुराना बताया जाता है. मंदिर की चोटी से पर्वतों का सुंदर नजारा दिखाई देता है. ऐसा माना जाता है कि जब सूरज ली पहली किरण इस मंदिर को छूती थी, तब यहां के राजा अपने पूजा-पाठ की शुरुआत करते थे. हालांकि अब यहां सिर्फ खंडहर हैं.

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सुध महादेव मंदिर-
जम्मू से कीब 120 किलो मीटर दूर पटनीटॉप के पास सुध महादेव (शुद्ध महादेव) का मंदिर स्तिथ है. यह मंदिर शिवजी के प्रमुख मंदिरो में से एक है. इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है की यहां पर एक विशाल त्रिशूल के तीन टुकड़े जमीन में गड़े हुए है जो की पौराणिक कथाओं के अनुसार स्वंय भगवान शिव के है.

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शंकराचार्य मंदिर-
हिंदू धर्म के पहले संस्थापक आदि शंकराचार्य ने देशभर में जो मंदिर बनवाए थे उनमें से एक शंकराचार्य मंदिर भी था. हालांकि बाद में इस मंदिर का नाम बदलकर तख्त-ए-सुलेमान कहा जाने लगा है. यहां आने वाले शिवभक्तों की संख्या अब पहले से काफी कम हो गई है.

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वैष्णो देवी-
माता वैष्णो देवी का मंदिर जम्मू के निकट त्रिकुटा की पहाड़ियों पर स्थित है. कटरा इस तीर्थ का आधार शिविर है. यहीं से श्रद्धालु वैष्णो देवी के दरबार में जाने के लिए चढ़ाई शुरू करते हैं. वैसे तो सालभर मां के दरबार में श्रद्दालुओं के बड़ी संख्या में पहुंचने का सिलसिला चलता है, लेकिन मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के प्रतीक नवरात्र के नौ दिन यहां की रौनक देखते ही बनती है.

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