Mahashivratri Vastu Upay 2026: महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव की आराधना का अत्यंत पावन अवसर माना जाता है. इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से किए गए कुछ विशेष उपाय जीवन की कई बाधाओं को कम करने में सहायक माने जाते हैं. जरूरी है कि इन्हें पूरी श्रद्धा और सही प्रक्रिया के साथ किया जाए. मान्यता है कि शिवलिंग पर अर्पित किया गया जल घर के वातावरण और वास्तु संतुलन पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है. आइए जानते हैं इन वास्तु उपायों के बारे में.
शिवलिंग पर अर्पित जल का आध्यात्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब मंत्रों के साथ शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं, तो वह जल दिव्य ऊर्जा से भर जाता है. इसे शिव तत्व का आशीर्वाद माना जाता है. कहा जाता है कि यह पवित्र जल नकारात्मकता को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है. इसी कारण इसे घर में प्रयोग करने से वास्तु से जुड़ी परेशानियों में राहत मिल सकती है.
वास्तु संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए प्रयोग विधि
यदि घर में लगातार तनाव बना रहता हो या काम बनते-बनते रुक जाते हों, तो महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर जल अर्पित करें. पूजन के बाद उस जल को एक स्वच्छ पात्र में लेकर घर ले आएं. घर पहुंचकर सबसे पहले अपने इष्ट या कुलदेवता का ध्यान करें. इसके बाद ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जप करते हुए उस जल को पूरे घर में छिड़कें. विशेष रूप से उन स्थानों पर जल का छिड़काव करें जहां प्रकाश कम पहुंचता हो या भारीपन महसूस होता हो. मुख्य द्वार पर इस पवित्र जल का छिड़काव अवश्य करें, क्योंकि इसे घर की ऊर्जा का प्रवेश द्वार माना जाता है. मान्यता है कि इससे नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव कम होता है.
जल छिड़कते समय ध्यान रखने योग्य बातें
इस प्रक्रिया को करने से पहले स्नान कर शुद्ध अवस्था में रहें, मन में सकारात्मक भाव रखें. ध्यान दें कि इस पवित्र जल का उपयोग शौचालय या अत्यधिक गंदे स्थानों पर न करें. यदि कुछ जल शेष रह जाए, तो उसे किसी पौधे, गमले या पीपल के वृक्ष की जड़ में अर्पित कर दें.
महाशिवरात्रि के अवसर पर अपनाया गया यह छोटा-सा उपाय घर में सुकून और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने वाला माना जाता है. शिव पूजन के बाद प्राप्त पवित्र जल को कल्याणकारी और शुभ फलदायी माना गया है, जो जीवन की कठिनाइयों से उबरने की शक्ति और विश्वास देता है.
पैसों की तंगी के उपाय
महाशिवरात्रि के दिन आर्थिक तंगी से राहत पाने के लिए छोटा-सा वास्तु उपाय लाभकारी माना जाता है. प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें. शिवलिंग पर जल, कच्चा दूध तथा बिल्वपत्र अर्पित करते हुए ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जप करें. पूजन के बाद शिवलिंग पर चढ़ाया गया थोड़ा-सा जल स्वच्छ पात्र में घर ले आएं, उसका हल्का छिड़काव तिजोरी, धन रखने की अलमारी या उत्तर दिशा में करें, जिसे कुबेर की दिशा माना जाता है. मुख्य द्वार पर भी कुछ बूंदें छिड़कें ताकि सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश बना रहे. शाम को घी का दीपक जलाकर भगवान शिव से आर्थिक स्थिरता की प्रार्थना करें, अगले दिन सामर्थ्य अनुसार दान करें.
aajtak.in