साल 2023 का पहला सूर्य ग्रहण खत्म हो चुका है. इस ग्रहण की शुरुआत सुबह सात बजकर चार मिनट से हुई थी. यह सबसे पहले ऑस्ट्रेलिया में देखा गया. इस सूर्य ग्रहण को फिलीपींस, इंडोनेशिया समेत कई देशों में लोगों ने देखा. हालांकि भारत में यह नहीं दिखा. यह एक कंकणाकृति सूर्य ग्रहण था जिसे मिश्रित सूर्य ग्रहण भी कहा जाता है.
ज्योतिष में ग्रहण को अशुभ घटनाओं में गिना जाता है. ग्रहण के दौरान और उसके पहले से सूतक काल लग जाता है. सूतक काल में किसी भी तरह का शुभ कार्य और पूजा-पाठ करना वर्जित माना जाता है. इस वजह से इस दौरान शुभ कार्य और पूजा पाठ वर्जित होता है लेकिन भारत में सूर्य ग्रहण का प्रभाव नहीं होने के कारण इसका सूतक काल भी नहीं लगा. मान्यता है कि सूर्य ग्रहण के सूर्य को कष्ट होता है. शास्त्रों में ग्रहण को अच्छा नहीं माना जाता है.
यहां देखें सूर्य ग्रहण की तस्वीरें
सूर्य ग्रहण देखने के लिए आप NASA के यूट्यूब चैनल पर देख सकते हैं जिसकी लाइव स्ट्रीमिंग भारतीय समयानुसार सुबह 8 बजे से शुरू हो चुकी है. इसके अलावा Timeanddate.com पर जाकर सूर्य ग्रहण को लाइव देख सकते हैं. ग्रहण की लाइव स्ट्रीमिंग वेबसाइट और YouTube चैनल दोनों पर होगी. ये वेबसाइट ग्रहण देखने के लिए सबसे विश्वसनीय ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है.
Surya Grahan 2023: साल का पहला सूर्य ग्रहण लग रहा है. यह कई देशों में दिख रहा है. यह सूर्य ग्रहण बेहद खास है, क्योंकि इसके तीन अलग- अलग रूप (आंशिक, पूर्ण और कुंडलाकार) दिखाई दे रहा है. आंशिक, पूर्ण और कुंडलाकार सूर्य ग्रहण का मिश्रण हाइब्रिड सूर्यग्रहण कहलाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि सूर्य ग्रहण की ऐसी स्थिति लगभग 100 साल में एक बार देखने को मिलती है.
आंशिक सूर्यग्रहण में चंद्रमा सूर्य के छोटे से हिस्से में आकर उसकी रोशनी को बाधित करता है. कुंडलाकार सूर्य ग्रहण में चंद्रमा सूर्य के ठीक बीच में आकर उसकी रोशनी को रोकता है. जबकि पूर्ण सूर्य ग्रहण में सूर्य के चारों ओर चमकती रोशनी का गोला बन जाता है, जिसे रिंग ऑफ फायर कहते हैं. ऐसी स्थिति में पृथ्वी का एक भाग पूरी तरह से अंधेरे में डूब जाता है.
ऑस्ट्रेलिया में सबसे पहले सूर्य ग्रहण दिखा है. वहां से सूर्य ग्रहण की कुछ तस्वीरें आई हैं. सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है और पृथ्वी पर छाया डालता है. इस अवस्था में वो सूर्य के प्रकाश को पूरी तरह या आंशिक रूप से ढक लेता है. कंकणाकृति सूर्य ग्रहण मिला जुला सूर्य ग्रहण माना जाता है जिसमें ग्रहण एक कुंडलाकार सूर्य ग्रहण के रूप में शुरू होता है फिर धीरे-धीरे यह पूर्ण सूर्य ग्रहण में बदल जाता है और फिर वापस आकर कुंडलाकार सूर्य ग्रहण में बदल जाता है. साल का पहला सूर्य ग्रहण कंकणाकृति सूर्य ग्रहण होगा. यह सूर्य ग्रहण बेहद खास रहने वाला है क्योंकि इस बार एक ही दिन में तीन तरह का सूर्य ग्रहण दिखेगा, जिसे वैज्ञानिकों ने हाइब्रिड सूर्य ग्रहण का नाम दिया है. इनमें आंशिक, पूर्ण और कुंडलाकार सूर्य ग्रहण शामिल होंगे.
इस वर्ष का पहला सूर्य ग्रहण लग चुका है. यह ग्रहण मेष राशि और अश्वनी नक्षत्र में लग रहा है, मगर यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा और यह माना जा रहा है कि जब सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा तो यहां पर उसका असर भी नहीं होगा, न सूतक होगा न ही पातक होगा और ना ही मंदिरों के कपाट जो सूर्य ग्रहण पर 12 घंटे पूर्व बंद कर दिए जाते थे, वो बंद किए जाएंगे.
ठीक ऐसे ही दृश्य हरिद्वार में हर की पैड़ी पर देखने को मिल रहे हैं. हरिद्वार हर की पैड़ी पर स्थित सभी मंदिरों के कपाट खुले हुए हैं. मंदिरों में सामान्य तौर पर जैसे पूजा होती है, वैसे पूजा हो रही है श्रद्धालु आ रहे हैं अपने आराध्य की पूजा कर रहे हैं और उनसे अपने मन की मुरादे मांग रहे हैं वहीं मंदिरों में पुजारी इस पूजा को संपन्न कराने में लगे हुए, ऐसा माना जाता है कि ग्रहण के दौरान गंगा में स्नान भी नहीं किया जाता मगर हर की पैड़ी के गंगा घाटों पर सुबह से ही स्नान का क्रम चल रहा है यह क्रम लगातार जारी है बड़ी संख्या में लोग आकर गंगा स्नान कर रहे हैं गंगा गंगा में स्नान और मंदिरों में पूजा होना यह साथ दिखाता है कि सूर्य ग्रहण का असर भारत और खास तौर से हरिद्वार में नहीं है.
यह पूर्ण सूर्य ग्रहण है जो भारत में दर्शनीय नहीं है. इस सूर्य ग्रहण में सूर्य, चंद्रमा, राहु और बुध का संयोग भी बन रहा है. साथ ही शनि की दृष्टि भी इस ग्रहण पर है. सूर्य और शनि का प्रभाव होने से आने वाले समय में दुर्घटना की संभावना बन रही है. राजनैतिक रूप से उथल पुथल मच सकती है. शेयर बाजार और दुनिया भर की आर्थिक स्थिति हिल सकती है. बीमारियां बढ़ेंगी, हालांकि औषधियों से नियंत्रित कर सकते हैं. मेष और तुला राशि का प्रभाव विश्व भर में युद्ध के संकेत दे रहा है.
मेष राशि के जातकों पर इस ग्रहण का सबसे अधिक प्रभाव पड़ेगा. इसके अलावा सिंह, कन्या, वृश्चिक और मकर राशि के जातकों पर भी इस सूर्य ग्रहण का प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. वहीं साल का पहला सूर्य ग्रहण वृष, मिथुन, धनु और मीन राशि वालों के लिए बेहद शुभ रहेगा. मेष राशि: साल का पहला सूर्य ग्रहण मेष राशि में लग रहा है.
धार्मिक नजरिए से सूतककाल को शुभ नहीं माना जाता है. ऐसे में इस दौरान किसी भी तरह का कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित होता है. सूर्य ग्रहण के सूतक काल में मंदिर के कपाट बंद हो जाते हैं. पूजा-अर्चना वर्जित होती है. ग्रहण पर सूतक के दौरान भगवान की मूर्तियों का स्पर्श नहीं किया जाता है और न ही इनकी पूजा-पाठ होती है. सूतक काल की शुरूआत से लेकर इसके खत्म होने तक न तो खाना बनाया जाता है और न ही खाना खाया जाता है.
इस बार का सूर्य ग्रहण तीन रूपों में दिखाई देगा, जिसको खगोल विज्ञान में हाइब्रिड सूर्य ग्रहण कहा गया है. हाइब्रिड सूर्य ग्रहण आंशिक, पूर्ण और कुंडलाकार सूर्य ग्रहण का मिश्रण होता है. यह सूर्य ग्रहण लगभग 100 साल में एक ही बार देखने को मिलता है. इस सूर्य ग्रहण के समय चंद्रमा की धरती से दूरी न तो ज्यादा होती है और न कम. इस दुर्लभ ग्रहण के दौरान सूर्य कुछ सेकेंड के लिए एक वलय यानी रिंग जैसी आकृति बनाता है, जिसे अग्नि का वलय यानी रिंग ऑफ फायर कहा जाता है.
आज इस साल का पहला सूर्य ग्रहण आज यानी वैशाख अमावस्या के दिन लग रहा है. यह सूर्य ग्रहण सुबह 07 बजकर 04 मिनट से शुरू हुआ है और यह दोपहर 12 बजकर 29 मिनट तक रहेगा. इस सूर्य ग्रहण की कुल अवधि पांच घंटे 24 मिनट तक रहेगी.
ऑस्ट्रेलिया में सूर्य ग्रहण दिखने लगा है. यह ग्रहण अमेरिका, चीन और जापान में भी लग रहा है.
धार्मिक शास्त्रों में बताया गया है कि सूर्य ग्रहण के दौरान कुछ भी नहीं खाना चाहिए. स्कंद पुराण में भी उल्लेखित है कि सूर्य ग्रहण के दौरान भोजन करने से सेहत पर गलत असर पड़ता है. यह भी बताया गया है कि सूर्य ग्रहण के समय भोजन करने से सारे पुण्य और कर्म नष्ट हो जाते हैं.
1. सूर्य ग्रहण के बाद गंगाजल से स्नान करें. पूरे घर और देवी देवताओं को शुद्ध करें.
2. ग्रहण के दौरान सीधे सूर्य को देखने से बचना चाहिए.
3. ग्रहण के दौरान बाहर जाने से बचें. साथ ही ध्यान रखें कि आप कोई गलत काम न करें.
4. ग्रहण के बाद हनुमान जी की उपासना करें.
यह सूर्य ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं होगा. यह सूर्य ग्रहण कंबोडिया, चीन, अमेरिका, माइक्रोनेशिया, मलेशिया, फिजी, जापान, समोआ, सोलोमन, बरूनी, सिंगापुर, थाईलैंड, अंटार्कटिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, वियतनाम, ताइवान, पापुआ न्यू गिनी, इंडोनेशिया, फिलीपींस, दक्षिण हिंद महासागर और दक्षिण प्रशांत महासागर जैसी जगहों पर ही दिखाई देगा.
सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है और पृथ्वी पर छाया डालता है. इस अवस्था में वो सूर्य के प्रकाश को पूरी तरह या आंशिक रूप से ढक लेता है. कंकणाकृति सूर्य ग्रहण मिला जुला सूर्य ग्रहण माना जाता है जिसमें ग्रहण एक कुंडलाकार सूर्य ग्रहण के रूप में शुरू होता है फिर धीरे-धीरे यह पूर्ण सूर्य ग्रहण में बदल जाता है और फिर वापस आकर कुंडलाकार सूर्य ग्रहण में बदल जाता है.
1. ग्रहण के दौरान किसी सुनसान जगह, श्मशान पर अकेले नहीं जाना चाहिए. दरअसल, इस दौरान नकारात्मक शक्तियां हावी रहती हैं.
2. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ग्रहण के समय सोना नहीं चाहिए और ना सूई में धागा डालना चाहिए.
3. इसके अलावा ग्रहण के दौरान यात्रा करने से भी बचना चाहिए और शारीरिक संबंध बनाना भी मना होता है.
साल 2023 का पहला सूर्य ग्रहण कंबोडिया, चीन, अमेरिका, माइक्रोनेशिया, मलेशिया, फिजी, जापान, समोआ, सोलोमन, बरूनी, सिंगापुर, थाईलैंड, अंटार्कटिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, वियतनाम, ताइवान, पापुआ न्यू गिनी, इंडोनेशिया, फिलीपींस, दक्षिण हिंद महासागर और दक्षिण प्रशांत महासागर जैसी जगहों पर दिखाई देगा.
Live Streaming of solar Eclipse: NASA और Timeanddate.com दोनों ने सूर्य ग्रहण के दीदार के लिए लाइव स्ट्रीम लिंक जारी किया है. इसके जरिए दुनिया भर के लोग इस अद्भुत खगोलीय घटना को देख सकेंगे. इसके अलावा आप 'Royal Observatory Greenwich' के यूट्यूब चैनल पर भी सूर्य ग्रहण को लाइव देख सकते हैं.
यहां पर देंखे लाइव- सूर्य ग्रहण देखने के लिए आप NASA के यूट्यूब चैनल पर लाइव देख सकते हैं जो भारतीय समयानुसार सुबह 8 बजे से लाइव दिखाएगा. इसके अलावा Timeanddate.com पर जाकर सूर्य ग्रहण को लाइव देख सकते हैं.
सूर्य ग्रहण सुबह 07 बजकर 05 मिनट पर शुरू हो चुका है. यह ग्रहण दोपहर 12 बजकर 29 मिनट पर समाप्त होगा. सूर्य ग्रहण की कुल अवधि 5 घंटे 24 मिनट की रहने वाली है. यह ग्रहण वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को अश्विनी नक्षत्र में मेष राशि में लग रहा है.