चित्तौड़गढ जिले के मेवाड़ स्थित श्री सांवलिया मंदिर में इस साल करीब 337 करोड़ का चढ़ावा आया है. ये 34 साल में सबसे ज्यादा है. बीते लगभग चार दशक में ऐसा कोई साल नहीं है, जब मंदिर में चढ़ावे में कोई कमी आई हो. हर साल चढ़ावे की रकम बढ़ रही है. ट्रस्ट बनने के बाद से हर महीने होने वाली मैराथन काउंटिंग के लिए विशेष इंतजाम किए जाते हैं. इस चढ़ावे की गणना के लिए करीब 200 लोगों का स्टाफ लगता है, जिसमें बैंककर्मी और मंदिर प्रशासन के लोग शामिल होते हैं.
काउंटिंग प्रक्रिया में पहले हाथों से पैसे गिने जाते हैं. उसके बाद मशीनों का इस्तेमाल होता है. मान्यता है कि ठाकुर जी यहां सेठजी के रूप में विराजमान हैं और एक बार अगर उन्हें पार्टनर बना लिया तो बिजनेस बढ़ता ही जाता है. इसलिए भक्त यहां बकायदा स्टाम्प पर अमाउंट लिखवा कर लाते हैं. मन्नत पूरी होने पर लाखों की राशि लिखित में अपने कंपनी के लेटर हेड पर लिख कर दे जाते हैं.
मंदिर में कैसे होती है पैसों की काउंटिंग?
इस मंदिर में हर महीने चतुर्दशी के दिन दान पात्र खोले जाते हैं. राजभोग आरती के बैंककर्मी और मंदिर प्रशासन के लोग इस काउंटिंग में शामिल होते हैं. इस काउंटिंग में 5 से 10 दिन का समय लग जाता है. सबसे पहले नोटों और सिक्कों को अलग किया जाता है. इसके बाद 5 मशीनों से इनकी काउंटिंग होती है. गहनों को वजन में काउंट किया जाता है. कैश के साथ-साथ चेक, मनी ऑर्डर और ऑनलाइन माध्यम से भी बड़ी मात्रा में दान आता है. विदेशी श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के कारण फॉरेन करेंसी भी बड़ी मात्रा में मिलती है.
मंदिर में 1992 से लेकर 2025 तक श्रद्धालुओं के सामने ही इस दान राशि की काउंटिंग होती थी. इसके बाद पिछले साल जुलाई के बाद से इसे अलग कर दिया गया, ताकि काउंटिंग में कोई गड़बड़ी न आए. पहले श्रद्धालु दर्शन करते हुए आते थे और साथ-साथ दान की काउंटिंग भी देखते थे. अब काउंटिंग सत्संग भवन में की जाती है. बता दें कि इस साल अप्रैल के महीने में 41.67 करोड़ रुपए की राशि मंदिर में अर्पित की गई. साल 2025 को दीपावली में 51 करोड़ से ज्यादा की राशि आई थी.
साल दर साल कितनी बढ़ी दान-राशि?
1991-92 में 65 लाख
1992-93 में 1.76 करोड़
1993-94 में 2 करोड़
1994-95 में 2.6 करोड़
1995-96 में 3.10 करोड़
1996-97 में 2.93 करोड़
1997-98 में 3.64 करोड़
1998-99 में 3.83 करोड़
1999-2000 में 3.7 करोड़
2000-2001 में 3.90 करोड़
2001-2002 में 3.62 करोड़
2002-2003 में 4.38 करोड़
2003-2004 में 5.21 करोड़
2004-2005 में 5.77 करोड़
2005-2006 में 6 करोड़
2006-2007 में 8 करोड़
2007-2008 में 11.97 करोड़
2008-2009 में 15.71 करोड़
2009-2010 में 18 करोड़
2010-2011 में 22 करोड़
2011-2012 में 28 करोड़
2012-2013 में 35 करोड़
2013-2014 में 38 करोड़
2014-2015 में 43 करोड़
2015-16 में 51.36 करोड़
2016-17 में 51.01 करोड़
2017-18 में 49.16 करोड़
2018-19 में 57.27 करोड़
2019-20 में 72.83 करोड़
2020-21 में 49.12 करोड़
2021-22 में 86.52 करोड़
2022-23 में 130.51 करोड़
2023-24 में 166.65 करोड़
2024-25 में 235.96 करोड़
2025-26 में 337.67 करोड़
Report: Piyush Mundara
aajtak.in