Plants for Good Luck: कहते हैं कि अगर ग्रह साथ दे जाएं, तो मिट्टी भी सोना बन जाती है. लेकिन जब यही ग्रह टेढ़े चलने लगें, तो अच्छे-खासे काम अटकने लगते हैं. अक्सर हम ग्रहों की दिशा ठीक करने के लिए महंगी अंगूठियां या भारी-भरकम पूजा-पाठ की सोचते हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि आपकी बालकनी या गार्डन में लगा एक छोटा सा पौधा भी आपकी किस्मत के सितारे बदल सकता है? जी हां, आयुर्वेद और ज्योतिष दोनों मानते हैं कि इन पौधों में गजब की पॉजिटिव एनर्जी होती है.
सूर्य के लिए: मदार (आक)
सूर्य को ग्रहों का राजा और मान-सम्मान का कारक माना जाता है. यदि कार्यक्षेत्र में बाधाएं आ रही हों या आत्मविश्वास में कमी महसूस हो, तो सूर्य की स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए मदार या आक के पौधे की सेवा करना श्रेष्ठ माना गया है. रविवार के दिन इस पौधे का पूजन करने से पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है.
चंद्रमा के लिए: पलाश
चंद्रमा हमारे मन और मानसिक स्वास्थ्य को नियंत्रित करता है. मानसिक शांति, तनाव से मुक्ति और भावनात्मक स्थिरता के लिए चंद्रमा के प्रभाव को संतुलित करना आवश्यक है. इसके लिए पलाश का वृक्ष अत्यंत लाभकारी है. पलाश की देखभाल करने से एकाग्रता बढ़ती है , पारिवारिक संबंधों में मधुरता आती है.
मंगल के लिए: खैर
मंगल ग्रह ऊर्जा, साहस और भूमि का स्वामी है. यदि स्वभाव में उग्रता अधिक हो या संपत्ति संबंधी विवाद चल रहे हों, तो मंगल के दोषों के निवारण हेतु खैर के वृक्ष का रोपण करना चाहिए. यह वृक्ष व्यक्ति के भीतर साहस भी बढ़ाता है. .
बुध के लिए: अपामार्ग
बुध ग्रह बुद्धि, संवाद और व्यापारिक कुशलता का प्रतिनिधित्व करता है. यदि निर्णय लेने की क्षमता या बौद्धिक कार्यों में समस्या आ रही हो, तो बुध को अनुकूल बनाने के लिए अपामार्ग (चिचड़ा) का पौधा सहायक होता है. विशेषकर विद्यार्थियों और व्यापारियों के लिए यह पौधा शुभ है.
गुरु (बृहस्पति) के लिए: पीपल और केला
बृहस्पति को ज्ञान, सौभाग्य और समृद्धि का कारक माना जाता है. आर्थिक स्थिरता और वैवाहिक सुख की प्राप्ति के लिए गुरु ग्रह का शुभ प्रभाव प्राप्त करना अनिवार्य है. गुरुवार के दिन पीपल या केले के वृक्ष का पूजन करने से दरिद्रता का नाश होता है .
शुक्र के लिए: गूलर
शुक्र ग्रह भौतिक सुख-सुविधाओं, सौंदर्य और कला का प्रतीक है. यदि जीवन में ऐश्वर्य की कमी हो या दांपत्य जीवन में कलह रहती हो, तो शुक्र को बलवान करने के लिए गूलर के वृक्ष की सेवा फलदायी मानी गई है. इसके प्रभाव से जीवन में सुख-साधनों की वृद्धि होती है.
शनि के लिए: शमी
शनि देव को न्याय और कर्मफल का देवता माना जाता है. शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या के दौरान होने वाली परेशानियों को कम करने और शनि की कृपा के लिए शमी का पौधा सर्वाधिक प्रभावशाली है. शनिवार की संध्या को शमी के नीचे दीप प्रज्वलित करने से कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होती हैं.
राहु के लिए: चंदन
राहु को भ्रम और आकस्मिक संकटों का कारक माना जाता है. राहु के नकारात्मक प्रभावों को नियंत्रित करने के लिए चंदन के वृक्ष का विशेष महत्व है. चंदन की शीतलता राहु की उग्रता को शांत करती है, जिससे व्यक्ति को मानसिक स्पष्टता मिलती है .
केतु के लिए: अश्वगंधा
केतु ग्रह को मोक्ष और मानसिक अंतर्द्वंद्व से जोड़कर देखा जाता है. केतु की शांति और शुभ फल प्राप्ति के लिए अश्वगंधा का पौधा श्रेष्ठ माना गया है. इसकी सेवा करने से न केवल स्वास्थ्य में सुधार होता है, बल्कि मानसिक भ्रम की स्थिति भी समाप्त होती है.
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