'वो बिना शादी के साथ रहते हैं...' अनिरुद्धाचार्य महाराज ने सिंगर मासूम शर्मा से क्यों कही ये बात?

हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा प्रसिद्ध कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज से मिले. इस दौरान अनिरुद्धा महाराज ने कहा कि भारतीय संस्कृति पश्चिमी संस्कृति से अलग है. वहां मांस खाने की परंपरा है. चार-चार शादियां की जा सकती हैं. लेकिन भारत में यह स्वीकार्य नहीं है.

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हमें मांस खाने की तुलना दुनिया से नहीं करनी चाहिए: अनिरुद्धाचार्य महाराज (Photo: Screengrab/Instagram_aniruddhacharyajimaharaj) हमें मांस खाने की तुलना दुनिया से नहीं करनी चाहिए: अनिरुद्धाचार्य महाराज (Photo: Screengrab/Instagram_aniruddhacharyajimaharaj)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 19 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 9:14 PM IST

हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा हाल ही में प्रसिद्ध कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज से मिले. दोनों के बीच भारतीय संस्कृति, आस्था और जीवन मूल्यों पर एक खास संवाद देखने को मिला. इस दौरान अनिरुद्धा महाराज ने एक सवाल का जवाब देते हुए पश्चिमी संस्कृति के खान-पान और रहन-सहन पर गंभीर टिप्पणी की. इस संवाद का वीडियो अनिरुद्धाचार्य महाराज ने खुद अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर भी अपलोड किया है.

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अनिरुद्धाचार्य महाराज के दरबार में भक्तों की भारी संख्या के बीच मासूम शर्मा ने पूछा- 'मैंने अपने बेटे को पाप-पुण्य के बारे में बताया और कहा कि मांस खाना गलत है. लेकिन जब मैं यूरोप घूमकर आया तो मैंने देखा कि वहां बच्चों को ऐसी बातें नहीं बताई गईं. तो क्या उन बच्चों को पाप लगेगा या नहीं? इसमें उनका कसूर है या नहीं?'

इस सवाल का जवाब देते हुए अनिरुद्धाचार्य महाराज ने कहा- 'विदेश में संस्कृति और संस्कार नहीं है. संस्कार सिर्फ भारत में है. मांस खाने की तुलना दुनिया से नहीं करनी चाहिए. यूं तो शेर और कुत्ता भी मांस खाता है और ये उनकी प्रवृत्ति है.'

अनिरुद्धाचार्य महाराज ने आगे कहा कि अमेरिका, लंदन जैसे देशों में पहले से ही खाने के विकल्प नहीं थे. उनका 100 साल का पुराना इतिहास उठाकर देख लो. इसलिए वहां मांस खाने की परंपरा बन गई. यदि किसी को शुरुआत से ही सात्विक भोजन दिया जाता तो वो उसे अपनी परंपरा में शामिल कर लेता.

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'हमारे पास 56 भोग तो मांस क्यों खाएं'
अनिरुद्धाचार्य महाराज ने कहा कि भारत में खाने-पीने की सुविधा है. दुनिया के पास खाने के लिए विकल्प में सिर्फ सूअर है. उनके पास पहले से ही विकल्प मौजूद नहीं थे. इसलिए वो मांस खाते रहे. अगर हमारे पास विकल्प में 56 भोग हैं तो भला हम मांस क्यों खाएं. इस मामले में हमें कभी दूसरों की तरह नहीं सोचना चाहिए. हमारे राम, कृष्ण और महापुरुषों ने मांस नहीं खाया. इसलिए हमें भी उन्हीं के रास्ते पर चलना चाहिए.

'अमेरिका में लोग चार-चार विवाह करते हैं'
इसके बाद अनिरुद्धाचार्य महाराज ने आगे कहा कि अमेरिका में तो लोग चार-चार विवाह करते हैं. शादी किए बिना ही लिव-इन में रहते हैं. लेकिन वहां का कल्चर यहां तो नहीं आ सकता. हमारे यहां शादी किए बिना साथ में रहना अच्छा नहीं माना जाता है.

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