Manglik Dosh: अगर आपकी कुंडली में है मांगलिक दोष, तो करें ये खास उपाय, वैवाहिक जीवन से दूर होंगी परेशानियां

Manglik Dosh: ज्योतिष में मांगलिक दोष को अक्सर वैवाहिक जीवन और भविष्य से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन हर कुंडली में इनका प्रभाव एक-सा नहीं होता है. कुंडली में मंगल की स्थिति, लग्न, राशि और दृष्टियों के आधार पर मंगली योग कभी बाधा तो कभी शक्ति का स्रोत भी बन सकता है.

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मांगलिक दोष (Photo: ITG) मांगलिक दोष (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 17 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:45 PM IST

Manglik Dosh: ज्योतिष में मंगली होना और शनि की साढ़ेसाती दो ऐसी बातें हैं, जिनका नाम सुनते ही व्यक्ति के मन में डर बैठ जाता है. लेकिन यह जरूरी नहीं कि मंगली होना हर किसी के लिए अशुभ ही हो. इसका पूरा असर इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्ति किस लग्न और राशि का है और मंगल उसकी कुंडली में किस स्थिति में है. साहस, पराक्रम और ऊर्जा देने वाला ग्रह मंगल हर स्थिति में नुकसानदेह हो, यह जरूरी नहीं. इसलिए सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि मंगली होना किसे कहते हैं.

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इन भावों से पता चलता है कि आप हैं मंगली 

कुंडली के 12 भावों में से यदि मंगल ग्रह पांच विशेष भावों में स्थित हो, तो व्यक्ति को मंगली माना जाता है. ये भाव हैं- प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम और द्वादश भाव. इनमें से किसी भी भाव में मंगल के विराजमान होने पर मांगलिक योग बनता है.

चंद्र कुंडली से मंगली होना

यदि कुंडली में मंगल ग्रह चंद्रमा के साथ स्थित हो, तो व्यक्ति को चंद्र मंगली माना जाता है. कई बार इसे आंशिक मंगली भी कहा जाता है.
असल में चंद्र कुंडली चंद्रमा को लग्न मानकर बनाई जाती है. ऐसे में मंगल यदि चंद्रमा के साथ हो, तो वह भी लग्न में आ जाता है और चंद्र मंगली योग बनता है.

मंगली होना क्यों डराता है?

मंगल ग्रह की तीन विशेष दृष्टियां मानी जाती हैं- चतुर्थ, सप्तम और अष्टम दृष्टि. जब कुंडली में मांगलिक योग बनता है, तो मंगल की ये दृष्टियां कहीं न कहीं पारिवारिक और वैवाहिक जीवन को प्रभावित करती हैं. इसी कारण मंगली होने का नाम सुनते ही लोग डर जाते हैं.
हालांकि यदि मंगल आपकी राशि और लग्न के अनुसार कारक ग्रह बनकर बैठा हो, तो मंगली होना नुकसान की बजाय लाभ भी दे सकता है.

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किन भावों में मंगल का क्या प्रभाव पड़ता है?

प्रथम भाव में मंगल होने पर उसकी सप्तम दृष्टि सीधे सप्तम भाव यानी जीवनसाथी के भाव पर पड़ती है. चतुर्थ भाव में मंगल की चतुर्थ दृष्टि सप्तम भाव को प्रभावित करती है. सप्तम भाव में मंगल स्वयं बैठकर वैवाहिक जीवन पर असर डालता है और अपनी अष्टम दृष्टि से कुटुंब भाव को देखता है. अष्टम भाव में मंगल की सप्तम दृष्टि कुटुंब भाव पर पड़ती है. द्वादश भाव में स्थित मंगल की अष्टम दृष्टि सप्तम भाव को प्रभावित करती है- इस प्रकार इन पांच भावों में बैठा मंगल किसी न किसी रूप में वैवाहिक जीवन और पारिवारिक सुख को प्रभावित करता है.

विवाह में मांगलिक योग का महत्व

वैवाहिक जीवन की सुख-शांति के लिए यह माना जाता है कि मांगलिक योग वाले लड़के या लड़की का विवाह मांगलिक से ही होना चाहिए.
मंगल को पुरुष ग्रह माना गया है. यदि लड़की की कुंडली में मांगलिक योग हो और विवाह किसी अमांगलिक युवक से कर दिया जाए, तो ऐसे दंपति के वैवाहिक जीवन में तनाव आ सकता है. कई मामलों में संतान सुख में भी बाधा देखी जाती है. आपसी मतभेद, कलह और असंतोष बना रह सकता है. वहीं यदि पति-पत्नी दोनों की कुंडली में मांगलिक योग हो, तो उनका वैवाहिक जीवन सुख, सामंजस्य और समृद्धि से भरा रहता है.

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