Mahashivratri 2026 Shubh Sanyog: 300 साल बाद दुर्लभ संयोग! महाशिवरात्रि पर इस विधि से करें महादेव का पूजन, नोट करें शुभ मुहूर्त

Mahashivratri 2026 Rashifal: महाशिवरात्रि इस बार कई शुभ योगों के साथ आ रही है. वैदिक ज्योतिष के अनुसार, 15 फरवरी को त्रिग्रही योग, श्रवण नक्षत्र और अन्य शुभ संयोग बन रहे हैं, जो करीब 300 साल बाद एक साथ बन रहे हैं.

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महाशिवरात्रि पर करीब 300 साल बाद एक दुर्लभ संयोग बनने जा रहा है. (Photo: ITG) महाशिवरात्रि पर करीब 300 साल बाद एक दुर्लभ संयोग बनने जा रहा है. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 11 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:08 PM IST

Mahashivratri 2026 Rashifal: द्रिक पंचांग के अनुसार, महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी. इस बार महाशिवरात्रि खास मानी जा रही है, क्योंकि ज्योतिष गणना के अनुसार इस दिन कई शुभ योग एक साथ बन रहे हैं. कहा जा रहा है कि ऐसा संयोग लंबे समय बाद देखने को मिल रहा है. फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाने वाली महाशिवरात्रि भगवान शिव को समर्पित होती है और इसे पूरे साल की शिवरात्रियों में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है.

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महाशिवरात्रि 2026 चार प्रहर और निशीथ काल का शुभ मुहूर्त

महाशिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा की परंपरा है. पहले प्रहर में दूध, दूसरे में दही, तीसरे में घी और चौथे प्रहर में शहद से अभिषेक करना लाभकारी माना जाता है. हर प्रहर में जल अवश्य अर्पित करें. 

15 फरवरी की शाम 6 बजकर 11 मिनट से लेकर रात 9 बजकर 22 मिनट तक पहला प्रहर रहेगा 

रात 9 बजकर 23 मिनट से लेकर 16 फरवरी की रात 12 बजकर 34 मिनट तक दूसरा प्रहर रहेगा. 

16 फरवरी को रात 12 बजकर 35 मिनट से लेकर तड़के 3 बजकर 46 मिनट तक तीसरा प्रहर रहेगा. सुबह 3 बजकर 46 मिनट से लेकर 6 बजकर 59 मिनट तक चौथा प्रहर रहेगा. 

निशीथ काल की विशेष पूजा 16 फरवरी को रात 12:09 से 1:01 बजे के बीच की जा सकती है. इसके अलावा, व्रत रखने वाले श्रद्धालु 16 फरवरी को सुबह 6 बजकर 33 मिनट से लेकर दोपहर 3 बजकर 24 मिनट के बीच पारण कर सकते हैं.

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महाशिवरात्रि 2026 शुभ योग

वैदिक पंचांग के मुताबिक, चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी की शाम करीब 5 बजकर 6 मिनट से शुरू होकर 16 फरवरी की सुबह लगभग 5 बजकर 32 मिनट तक रहेगी. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस दिन सूर्य, बुध और शुक्र एक साथ विशेष स्थिति में रहेंगे, जिससे त्रिग्रही योग बनेगा. श्रवण नक्षत्र का संयोग भी रहेगा, जिसे शिव भक्ति के लिए शुभ माना जाता है. इसके अलावा, इस दिन व्यतिपात योग, वरियान योग, ध्रुव योग और राजयोग जैसे कई शुभ योग इस पर्व को और खास बना रहे हैं. यह सभी योग 300 साल बाद एक साथ महाशिवरात्रि पर बन रहे हैं.  

मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन सच्चे मन से पूजा-पाठ करने पर भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं. इस बार का शुभ संयोग कुछ राशियों के लिए विशेष फलदायी माना जा रहा है. तो आइए जानते हैं कि महाशिवरात्रि किन राशियों के लिए शुभ रहेगी. 

मेष राशि: महाशिवरात्रि पर मेष राशि के लोगों के लिए धन लाभ के संकेत मिल रहे हैं. रुका हुआ पैसा मिल सकता है. आय का नया स्रोत खुल सकता है.

कन्या राशि: कन्या राशि वालों के लिए महाशिवरात्रि बहुत ही शुभ मानी जा रही है. नया काम शुरू करने का अच्छा समय हो सकता है. व्यापार या करियर में आगे बढ़ने का मौका मिल सकता है.

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वृश्चिक राशि: वृश्चिक राशि के जातकों को नौकरी में तरक्की या जिम्मेदारी बढ़ने का संकेत मिल सकता है. मेहनत का सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकता है.

महाशिवरात्रि 2026 पूजन विधि (Maha Shivratri 2026 Pujan Vidhi)

महाशिवरात्रि पर सुबह स्नान करके साफ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें. शिवलिंग पर जल या गंगाजल चढ़ाते हुए ऊं नमः शिवाय का जाप करें. इसके बाद दूध या पंचामृत से अभिषेक कर सकते हैं. बेलपत्र, धतूरा और सफेद फूल अर्पित करें. शाम या रात में दीपक जलाकर शिव चालीसा या महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करें. संभव हो तो रात्रि जागरण करें. अंत में आरती कर अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना करें. श्रद्धा और शांत मन से की गई पूजा ही सबसे फलदायी मानी जाती है.

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