Mahashivratri 2026: रामचरितमानस में भी शिव-पार्वती का गुणगान! महादेव के बारे में लिखी हैं ये बातें

तुलसीदास बालकांड में महाशिवरात्रि के प्रसंग लिखते हैं और कहते हैं कि महादेव का स्वरूप डरावना होते हुए भी कल्याणकारी और संपूर्ण संसार को सीख देने वाला है. इसलिए संसार के हर कोने में महादेव के भक्त मिल ही जाते हैं.

Advertisement
महाशिवरात्रि पर शिव की पूजा और वंदना करने से ज्ञान, शांति और प्रभु श्रीराम की भक्ति की प्राप्ति होती है. (Photo: ITG) महाशिवरात्रि पर शिव की पूजा और वंदना करने से ज्ञान, शांति और प्रभु श्रीराम की भक्ति की प्राप्ति होती है. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 15 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:57 PM IST

Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह को समर्पित त्योहार है. रामचरितमानस के बालकांड में शिव-पार्वती विवाह का विस्तृत वर्णन किया गया है. भगवान राम स्वयं शिव भक्ति का महत्व बताते हैं और कहते हैं कि जो शिव का विरोधी है, वह राम का भक्त कभी नहीं हो सकता. आइए रामचरितमानस में मौजूद कुछ चौपाइयों के माध्यम से महाशिवरात्रि की तिथि और उसका महत्व समझते हैं.

Advertisement

चौपाई- "कुंद इंदु सम देह उमा रमन करुना अयन. जाहि दीन पर नेह करउ कृपा मर्दन मयन॥"

अर्थ- चंद्रमा के समान गोरे, पार्वती के प्रियतम, करुणा के सागर और दीनों पर स्नेह करने वाले शिवजी मुझ पर कृपा करें.

चौपाई- "ससि ललाट सुंदर सिर गंगा. नयन तीनि उपबीत भुजंगा॥ गरल कंठ उर नर सिर माला. असिव बेष सिवधाम कृपाला॥"

अर्थ- उनके सिर पर चंद्रमा और गंगाजी हैं. तीन नेत्र हैं. सांपों का जनेऊ है. गले में विष है. फिर भी वे कल्याणकारी हैं.

तुलसीदास बालकांड में महाशिवरात्रि के प्रसंग लिखते हैं और कहते हैं कि महादेव का स्वरूप डरावना होते हुए भी कल्याणकारी और संपूर्ण संसार को सीख देने वाला है. इसलिए संसार के हर कोने में महादेव के भक्त मिल ही जाते हैं. ये प्रसंग बताते हैं कि महाशिवरात्रि पर शिव की पूजा और वंदना करने से ज्ञान, शांति और प्रभु श्रीराम की भक्ति की प्राप्ति होती है.

Advertisement

महाशिवरात्रि व्रत की पूजन विधि
महाशिवरात्रि के दिन निर्जला व्रत रखना या केवल फलाहार व्रत रखना अच्छा होता है.  इस दिन सुबह जल्दी उठें. स्नानादि के बाद साफ-सुथरे वस्त्र पहनकर व्रत का संकल्प लें. पहर मंदिरों, शिवालयों में जाकर भगवान शिव का पंचामृत और गंगाजल से अभिषेक करें. भगवान को बेल पत्र, धतूरा, सफेद चंदन, इत्र, जनेऊ, फल और मिठाइयों का भोग लगाएं. भगवान शिव को खीर का भोग भी बहुत प्रिय है. इसका भोग लगाने के बाद इसे प्रसाद के रूप में बांट दें.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement