ये 4 थे भगवान शिव के सबसे बड़े शत्रु, जानें कैसे महादेव कहलाए त्रिपुरारी

भगवान शिव को समर्पित महाशिवरात्रि आने वाली है. भगवान शिव बड़े दयालु हैं, इसलिए संसार में उनके भक्तों की कोई कमी नहीं है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि शास्त्रों में भोले बाबा के कुछ बड़े शत्रुओं का भी वर्ण मिलता है.

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शिव पुराण और अन्य ग्रंथों में ऐसे कई असुरों का वर्णन मिलता है, जिन्होंने अपने तप, अहंकार और अधर्म के कारण स्वयं शिव से शत्रुता मोल ले ली थी. शिव पुराण और अन्य ग्रंथों में ऐसे कई असुरों का वर्णन मिलता है, जिन्होंने अपने तप, अहंकार और अधर्म के कारण स्वयं शिव से शत्रुता मोल ले ली थी.

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 15 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:14 PM IST

Mahashivratri 2026: भगवान शिव बड़े ही दयालु हैं. वो अपने भक्तों की प्रार्थना सुनते हैं और उनके कष्टों को हर लेते हैं. इसी वजह से हर युग में महादेव के कई परम भक्तों का वर्णन मिलता है.  लेकिन क्या आपने कभी महादेव के सबसे बड़े शत्रुओं के बारे में सुना है. शिव पुराण और अन्य ग्रंथों में ऐसे कई असुरों का वर्णन मिलता है, जिन्होंने अपने तप, अहंकार और अधर्म के कारण स्वयं शिव से शत्रुता मोल ले ली थी. आइए आज आपको शिवजी के सबसे बड़े शत्रुओं के बारे में बताते हैं.

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जालंधर
जालंधर एक अत्यंत शक्तिशाली असुर था, जिसकी उत्पत्ति समुद्र मंथन के दौरान भगवान शिव के तेज (क्रोध) से हुई थी. जालंधर को ब्रह्मा से वरदान मिला था कि उसका सर्वनाश तभी संभव है, जब उसकी पत्नी वृंदा का पतिव्रत धर्म भंग हो जाएगा. शक्ति और अहंकार में चूर जालंधर ने देवताओं को पराजित किया. बाद में वो कैलाश पर भी अधिकार जमाने का प्रयास करने लगा. अंततः भगवान विष्णु ने अपनी लीला से वृंदा के पतिव्रत को भंग किया और भगवान शिव जालंधर का वध करने में सफल हुए.

त्रिपुरासुर
भगवान शिव के सबसे बड़े शत्रुओं में त्रिपुरासुर भी शामिल हैं. त्रिपुरासुर तीन असुर भाइयों- तारकाक्ष, कमलाक्ष और विद्युन्माली को कहा जाता है. ये तीनों तारकासुर के ही पुत्र थे. त्रिपुरासुर ने तीन उड़ने वाले नगरों (त्रिपुर) का निर्माण किया था. जब त्रिलोक में इनके अत्याचार बढ़ने लगे तब देवताओं ने भगवान शिव से इनसे मुक्ति  दिलाने का आग्रह किया. इसके बाद भवान शिव ने इनका वध किया और वो त्रिपुरारी कहलाए.

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अंधकासुर
अंधकासुर दैत्य हिरण्याक्ष का पुत्र था, जिसे भगवान शिव ने ही अमरता जैसा वरदान दे रखा था. लेकिन इस वरदान को पाकर वो अहंकारी हो गया और अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करने लगा. इतना ही नहीं, उसने माता पार्वती को भी अपने वश में करने का दुस्साहस किया. इस अधर्म के कारण शिव और अंधकासुर के बीच भयंकर युद्ध हुआ, जिसमें भगवान शिव ने उसका वध कर दिया.

भस्मासुर
भस्मासुर भगवान शिव का परम भक्त था. उसने कठोर तपस्या से यह वरदान पाया था कि वो जिसके सिर पर हाथ रखेगा, वो भस्म हो जाएगा. वरदान मिलते ही उसने भगवान शिव पर ही हाथ रखने का प्रयास किया. तब भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर भस्मासुर को छल से स्वयं ही भस्म करवा दिया था.

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