Mahashivratri 2026 Paran Time: महाशिवरात्रि व्रत कब खोला जाएगा? जानें शुभ मुहूर्त और पारण विधि

Mahashivratri 2026 Paran Time: आज 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जा रहा है. जानें चतुर्दशी तिथि, रात की पूजा का महत्व और 16 फरवरी को व्रत पारण के लिए सबसे शुभ मुहूर्त और सरल विधि क्या है.

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महाशिवरात्रि पारण (Photo: Pixabay) महाशिवरात्रि पारण (Photo: Pixabay)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 15 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:00 PM IST

Mahashivratri 2026 Paran Time: आज पूरे देश में महाशिवरात्रि का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है. फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर आने वाला यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन का उत्सव है. शिव भक्त आज के दिन का पूरे साल बेसब्री से इंतजार करते हैं.  आज श्रद्धालु सुबह से ही मंदिरों में उमड़ रहे हैं और "ॐ नमः शिवाय" से शिवालय गूंज रहे हैं. मान्यताओं के अनुसार, महाशिवरात्रि की पूजा रात्रि के चारों प्रहर में करने का विधान है. इस वर्ष चतुर्दशी तिथि आज यानी 15 फरवरी 2026 को शाम 5:04 बजे से प्रारंभ हो रही है, जो अगले दिन 16 फरवरी को शाम 5:33 बजे तक रहेगी. चूंकि महाशिवरात्रि की मुख्य पूजा 'निशिता काल' (मध्यरात्रि) में की जाती है, इसलिए आज ही व्रत रखना शास्त्र सम्मत और श्रेष्ठ माना गया है. आज भक्त रात भर जागरण कर भजन-कीर्तन करेंगे.

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व्रत पारण के शुभ मुहूर्त
महाशिवरात्रि के व्रत का पूर्ण फल तभी मिलता है जब उसका समापन (पारण) विधिपूर्वक और शुभ मुहूर्त में किया जाए.  कल, यानी 16 फरवरी को व्रत खोलने के लिए कई विकल्प मौजूद हैं, लेकिन राहुकाल का त्याग करना अनिवार्य है. 

प्रातः काल का मुहूर्त  सुबह 7:00 बजे से 8:33 बजे तक रहेगा. अमृत काल (सर्वश्रेष्ठ समय) सुबह 9:58 बजे से 11:38 बजे तक रहेगा.  यह समय पारण के लिए सबसे अधिक फलदायी माना गया है.अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:30 बजे से 1:16 बजे तक रहेगा. विजय मुहूर्त दोपहर 3:34 बजे से 3:48 बजे तक होगा. सुबह 8:33 बजे से 9:58 बजे तक राहुकाल रहेगा. शास्त्रों के अनुसार राहुकाल में कोई भी शुभ कार्य या व्रत का पारण नहीं करना चाहिए, इसलिए इस समय से बचें. 

पारण की विधि

कल सुबह व्रत खोलने से पहले भक्तों को कुछ धार्मिक नियमों का पालन करना चाहिए. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें . स्वच्छ वस्त्र धारण करें.  घर के मंदिर की सफाई कर दीप प्रज्वलित करें.  भगवान शिव का जल, दूध या पंचामृत से अभिषेक करें.  उन्हें बेलपत्र, धतूरा, मदार के फूल, दही और घी अर्पित करें.  शिव चालीसा का पाठ करें. सपरिवार महादेव की आरती उतारें. भगवान को ऋतु फल (बेर, केला, सेब) का भोग लगाएं. इसके बाद मखाना, साबुदाना या फलों का सेवन कर अपना उपवास खोलें.

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