Mahashivratri 2026: भगवान शिव के 5 शक्तिशाली मंत्र, महाशिवरात्रि की दिव्य रात जरूर करें इनका जाप

महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी. इस दिन महादेव के भक्त शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं और रात्रि जागरण करते हैं. मान्यता है कि इस पावन रात्रि को शिव साधना और विशेष मंत्रों का जाप करने से मानसिक शांति, साहस और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है.

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शिव के चमत्कारी मंत्रों का जाप करने से मानसिक शांति, साहस और सकारात्मक ऊर्जा लाभान्वित करती है. शिव के चमत्कारी मंत्रों का जाप करने से मानसिक शांति, साहस और सकारात्मक ऊर्जा लाभान्वित करती है.

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:30 PM IST

महाशिवरात्रि भगवान शिव को समर्पित सबसे पवित्र त्योहारों में से एक है. इस साल यह पावन पर्व 15 फरवरी को मनाया जाएगा. इस दिन भक्त उपवास रखकर पूरे विधि-विधान से शिवलिंग का अभिषेक करते हैं. रात्रि जागरण करते हैं. इस दिव्य रात में शिव साधना से विशेष फल की प्राप्ति होती है. इस दौरान शिव के चमत्कारी मंत्रों का जाप करने से मानसिक शांति, साहस और सकारात्मक ऊर्जा लाभान्वित करती है. इस दिव्य रात में भगवान शिव के पांच खास मंत्रों का जाप करने से बड़ा लाभ मिलता है.

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1. ॐ नमः शिवाय
लाभ: यह पंचाक्षरी मंत्र है जो मन को शांति देता है. नकारात्मकता दूर करता है और आत्मविश्वास बढ़ाता है. इसके नियमित जाप से मानसिक संतुलन और आध्यात्मिक उन्नति दोनों का लाभ मिलता है.

2. महामृत्युंजय मंत्र
मंत्र: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्.
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
लाभ: इस मंत्र का जाप करने से रोगों से मुक्ति, दीर्घायु और भय से मुक्ति मिलती है,

3. ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
लाभ: यह शिव गायत्री मंत्र है. इसके जाप से बुद्धि और तर्क संबंधी लाभ मिलते हैं. एकाग्रता बेहतर होती है. ये चमत्कारी मंत्र व्यक्ति को सही निर्णय लेने की शक्ति देता है.

4. ॐ नीलकंठाय नमः
लाभ: यह मंत्र अत्यंत लाभकारी है. इसके जाप से विपरीत परिस्थितियों में धैर्य और सहनशक्ति मिलती है. साथ ही, मानसिक तनाव भी कम करता है.

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5. ॐ महेश्वराय नमः
लाभ: भगवान शंकर का यह मंत्र जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाता है और आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है.

भगवान शिव की आरती

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥ ओम जय शिव ओंकारा॥

एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे।
हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥

ओम जय शिव ओंकारा॥

दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखत त्रिभुवन जन मोहे॥

ओम जय शिव ओंकारा॥

अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥

ओम जय शिव ओंकारा॥

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघंबर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे॥

ओम जय शिव ओंकारा॥

कर के मध्य कमण्डल चक्र त्रिशूलधारी।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥

ओम जय शिव ओंकारा॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका॥

ओम जय शिव ओंकारा॥

पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा।
भांग धतूरे का भोजन, भस्मी में वासा॥

ओम जय शिव ओंकारा॥

जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला।
शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला॥

ओम जय शिव ओंकारा॥

काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी॥

ओम जय शिव ओंकारा॥

त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, मनवान्छित फल पावे॥

ओम जय शिव ओंकारा॥ स्वामी ओम जय शिव ओंकारा॥

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