Bakrid 2026: मक्का के इस मैदान में मिलती है शैतान को सजा, बकरीद से क्या है कनेक्शन?

Bakrid 2026: भारत में 28 मई को बकरीद मनाई जाएगी. इस पवित्र त्योहार का सीधा कनेक्शन सऊदी अरब के मक्का शहर और वहां मौजूद मीना के ऐतिहासिक मैदान से है. जानिए मक्का की पहाड़ियों के बीच बसे मीना के उस रहस्यमयी मैदान की पूरी कहानी, जहां इतिहास में शैतान ने अपनी सबसे बड़ी बाजी हारी थी.

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जानते हैं मीना के उस मैदान की पूरी कहानी, जहां इतिहास में शैतान ने अपनी सबसे बड़ी बाजी हारी थी.  जानते हैं मीना के उस मैदान की पूरी कहानी, जहां इतिहास में शैतान ने अपनी सबसे बड़ी बाजी हारी थी. 

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 23 मई 2026,
  • अपडेटेड 9:32 AM IST

Bakrid 2026:  भारत में इस बार बकरीद (Eid-al-Adha) गुरुवार, 28 मई को मनाई जाएगी. इस पवित्र त्योहार का सीधा कनेक्शन सऊदी अरब के मक्का शहर और वहां मौजूद मीना (Mina) के ऐतिहासिक मैदान से है. हर साल दुनिया भर से लाखों मुसलमान हज यात्रा के लिए यहां पहुंचते हैं.  मक्का की पहाड़ियों के बीच बसा मीना का यह मैदान आखिर इतना रहस्यमयी क्यों है और इसे क्यों तंबुओं का शहर (City of Tents) कहा जाता है? आइए जानते हैं मीना के उस मैदान की पूरी कहानी, जहां इतिहास में शैतान ने अपनी सबसे बड़ी बाजी हारी थी. 

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इम्तिहान, कुर्बानी और मीना ...

बकरीद का त्योहार असल में  हजरत इब्राहिम के इम्तिहान और ईश्वर के प्रति उनके गहरे विश्वास की याद में मनाया जाता है. अल्लाह ने हजरत इब्राहिम की वफादारी को परखने के लिए उनसे उनकी सबसे प्यारी चीज यानी उनके इकलौते बेटे हजरत इस्माइल की कुर्बानी मांगी थी.  हजरत इब्राहिम इस कठिन इम्तिहान के लिए तुरंत तैयार हो गए. वे अपने बेटे को लेकर मक्का के पास इसी मीना के मैदान की तरफ बढ़े.  इसी मैदान पर वह ऐतिहासिक घटना घटी, जिसने पूरी दुनिया को  कुर्बानी (Sacrifice) का असली मतलब सिखाया. 

जब मीना के मैदान में शैतान ने हारी बाजी
कहा जाता है कि जब हजरत इब्राहिम अपने मासूम बेटे को अल्लाह की राह में कुर्बान करने मीना जा रहे थे, तब रास्ते में इब्लीस (शैतान) ने उन्हें रोकने की पूरी कोशिश की.  शैतान ने हजरत इब्राहिम के मन में भावनाएं जगाकर उन्हें भटकाना चाह और कहा कि तुम अपने बुढ़ापे के इकलौते सहारे की कुर्बानी कैसे दे सकते हो, लौट जाओ. लेकिन हजरत इब्राहिम अल्लाह के हुक्म पर पूरी तरह टिके रहते हुए उन्होंने जमीन से कंकड़ उठाए और उसे मार भगाया. शैतान ने रास्ते में अलग-अलग तीन जगहों पर उन्हें बहकाने की कोशिश की, लेकिन हर बार हजरत इब्राहिम ने उन्हें पत्थर मारकर पीछे भगा दिया.  आखिरकार, जब उन्होंने बेटे की गर्दन पर छुरी चलाई, तो अल्लाह के हुक्म से फरिश्तों ने हजरत इस्माइल की जगह एक दुंबे (भेड़/बकरे) को रख दिया.  बेटा सही-सलामत बच गया और यहीं से बकरीद पर कुर्बानी देने की परंपरा शुरू हुई. 

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जमरात: आज भी दी जाती है शैतान को सजा
हज यात्रा के दौरान मीना के मैदान में निभाई जाने वाली सबसे महत्वपूर्ण रस्मों में से एक है रमी अल-जमरात, यानी शैतान को पत्थर मारना. मीना के मैदान में तीन बड़े खंभे (पिलर्स) बने हुए हैं, जिन्हें जमरात कहा जाता है. ये खंभे उन्हीं तीन जगहों से जुड़े हैं जहां शैतान ने हजरत इब्राहिम को बहकाने की गुस्ताखी की थी.  हज करने वाले यात्री ठीक उसी तरह इन खंभों पर कंकड़ बरसाते हैं. यह रस्म इस बात का प्रतीक है कि इंसान अपने अंदर के लालच, बुराई और बुरे विचारों को हमेशा के लिए पत्थर मारकर खुद से दूर कर रहा है.

तंबुओं का शहर और वैश्विक मदद का केंद्र
मीना को दुनिया का सबसे बड़ा तंबुओं का शहर (City of Tents) भी कहा जाता है.  बकरीद के दिन पूरी दुनिया में तो कुर्बानी होती ही है, लेकिन मीना के मैदान में लाखों पशुओं की कुर्बानी बेहद व्यवस्थित तरीके से दी जाती है.  इस गोश्त को पूरी तरह सुरक्षित तरीके से पैक करके दुनिया के गरीब देशों में भेजा जाता है ताकि जरूरतमंदों की मदद हो सके. 

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