दिन में 3 बार रंग बदलता है गाजियाबाद के इस मंदिर के कुएं का पानी, कभी रावण करता था पूजा

दूधेश्वरनाथ महादेव शिव के सबसे प्राचीतम मंदिर में से एक माना जाता है. कहते हैं कि रावण के पिता विश्वश्रवा ने इस स्थान पर घर तप किया था. रावण ने भी यहां भगवान शिव की आराधना की थी.

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दूधेश्वरनाथ महादेव शिव के सबसे प्राचीतम मंदिर में से एक माना जाता है. (Photo:dudheshwarnath) दूधेश्वरनाथ महादेव शिव के सबसे प्राचीतम मंदिर में से एक माना जाता है. (Photo:dudheshwarnath)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 15 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:27 PM IST

आज फाल्गुन महाशिवरात्रि है. यह दिन भगवान शिव के भक्तों को अत्यंत प्रिय है. इस दिन शिवजी के भक्त मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिए व्रत-उपासना करते हैं. मंदिरों, शिवालयों में चारों ओर महादेव के जयकारे गूंजते हैं. इस दौरान दूधेश्वर महादेव मंदिर की छटा सबसे निराली दिखाई पड़ती है. और हो भी क्यों ना. शिव के इस पवित्र धाम में अर्जी लगाने मात्र से बिगड़े काम संवर जाते हैं. भगवान शिव के इस मंदिर में आने की और भी कई खास वजह हैं.

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दूधेश्वरनाथ महादेव शिव के सबसे प्राचीतम मंदिर में से एक माना जाता है. मान्यताएं हैं कि यह मंदिर लंकापति रावण के काल से कहते हैं कि यहीं पुलस्त्य मुनि के पुत्र और रावण के पिता विश्वश्रवा ने कठोर तप किया था. रावण ने भी इस स्थान पर शिव की आराधना की थी. हालांकि कालांतर में हरनंदी नदी को हिंडन नदी के नाम से जाना जाता है. हिरण्यगर्भ ज्योतिर्लिंग आज दूधेश्वर महादेव मठ में स्वयंभू रूप में लगभग साढ़े तीन फीट नीचे प्रतिष्ठित है.

दूधेश्वरनाथ मंदिर का इतिहास
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित दूधेश्वरनाथ मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार एक ही विशाल पत्थर को काटकर निर्मित किया गया है. इसी पत्थर को तराश कर द्वार के बीचोबीच भगवान गणेश की प्रतिमा बनाई गई है. लोक मान्यता के अनुसार, इस भव्य मंदिर का निर्माण छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा करवाया गया था, जो इसकी ऐतिहासिक महत्ता को दर्शाता है.

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गाय से जुड़ी मंदिर की आस्था
दूधेश्वर महादेव की गाय से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा बहुत प्रचलित है. कहा जाता है कि पास के ही कैला गांव की गायें चरते हुए एक टीले पर पहुंच जाती थीं और यहां उनके थन से अपने आप दूध टपकने लगता था. इस अद्भुत घटना से हैरान ग्रामीणों ने जब टीले पर खुदाई कराई तो वहां एक शिवलिंग प्रकट हुआ. चूंकि यहां गायों के दूध से महादेव का अभिषेक होता था, इसलिए इसका नाम दूधेश्वर या दुग्धेश्वर महादेव नाम पड़ गया.

दूधेश्वर महादेव का चमत्कारी कुआं
दूधेश्वर महादेव मंदिर के परिसर में मौजूद एक दिव्य कुआं भी आस्था का प्रमुख केंद्र है. कहते हैं कि इस कुएं का जल दिन में तीन बार अपना रंग बदलता है. आज भी श्रद्धालु दूर-दूर से इसे देखने और पूजा करने आते हैं. यह कुआं श्री दूधेश्वरनाथ मठ मंदिर के राम भवन में स्थित है, जिसके चारों ओर गणेश-लक्ष्मी, अन्नपूर्णा, राधा-कृष्ण सहित अनेक देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित हैं. यहां आने वाले भक्त कुएं की पूजा करना कभी नहीं भूलते हैं.

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