कथावाचक देवी चित्रलेखा एक कथावाचक और आध्यात्मिक वक्ता है जो मुख्य रूप से भगवत पुराणपर आधारित अपने प्रवचनों (कथाओं) के लिए जानी जाती हैं. इनका जन्म 19 जनवरी 1997 को हरियाणा के पलवल जिले के एक गांव में हुआ था. वह अक्सर धार्मिक सभाओं ओर आयोजनों में जाती रहती हैं. कुछ दिन पहले वह पीठाधीश्वर श्री राजेंद्र दास महाराज के श्री रामकथा महोत्त्सव में कोटवन (मथुरा) पहुंचीं. जब इस आयोजन की फोटो इंस्टाग्राम पर शेयर की गईं तो नजर उनके हाथ के एक ब्रेसलेट पर गई. देवी चित्रलेखा का ये ब्रेसलेट क्यों खास था, ये जान लीजिए.
देवी चित्रलेखा का ब्रेसलेट
देवी चित्रलेखा ने जो एक पतला सा ब्रेसलेट पहना था, उसमें एक नीले रंग का एविल आई साइन था. एविल आई को अरबी में ʿAyn-Al-Hasood (ईर्ष्यालु की आंख) के रूप में जाना जाता है. हालांकि बुरी नजर की अवधारणा हजारों साल पुरानी है लेकिन इसे आधुनिक समय में मशहूर हस्तियों, फैशन डिजाइनरों और जूलरी मेकर्स द्वारा फेमस बना दी गई है.
भारत में भले ही इसे फैशन के तरीके से प्रयोग किया जाता है लेकिन कुछ मान्यताओं में ऐसा माना जाता है कि यह एक ऐसा ताबीज है जो बुरी शक्तियों और नकारात्मक ऊर्जा से बचाता है.
Britannica के मुताबिक, लेवेंट, अफगानिस्तान, दक्षिणी स्पेन और मैक्सिको में एविल आई वाले ताबीज लोगों को गिफ्ट में दिए जाते हैं. इस्लाम में बुरी नजर का उल्लेख कुरान में किया गया है और मुस्लिम बुरी नजर की शक्ति और किसी व्यक्ति पर इसके बुरे प्रभाव में अत्यधिक विश्वास करते हैं.
यह आमतौर पर एक आंख के आकार की होती है. बुरी नजर पारंपरिक रूप से एक नीली आंख होती है जिसमें काली पुतली और सफेद आइरिस होती है.
एविल आई को दुनिया के सबसे पुराने अंधविश्वासों में से एक माना जाता है, जिसका उल्लेख प्राचीन ग्रीक और रोमन लिपि में भी मिलता है.
फैशन ट्रेंड बनी एविल आई
फैशन से लेकर सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट तक, एविल आई एक ट्रेंडी बन गया है. कई लोग इसे एक फैशनेबल एक्सेसरीज के रूप में पहनते हैं. यह हार और कंगन से लेकर ब्रेसलेट में भी नजर आता है.
किम कार्दशियन भी कई मौकों पर ब्रेसलेट और हेडपीस के रूप में पहने हुए देखा गया है और वहीं फैशन मॉडल गिगी हदीद ने 2017 के आखिर में इस चलन को अपनाया था. इसके अलावा कई बॉलीवुड सेलेब्स भी इस सिंबॉल वाली एसेसरीज पहने हुए दिखते हैं.
आजतक लाइफस्टाइल डेस्क