Chaturgrahi Rajyog In Kumbh Rashi 2026: फरवरी का महीना ज्योतिष के नजरिए से बेहद अहम रहने वाला है, खासकर तब जब एक ही राशि में एक के बाद एक कई ग्रहों का प्रवेश हो रहा हो. इस बार कुंभ राशि में ऐसा ही दुर्लभ संयोग बन रहा है, जहां पहले से ही राहु इस राशि में मौजूद हैं. अब फरवरी के महीने में बुध, सूर्य, मंगल और शुक्र भी कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे.
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुंभ राशि शनि की राशि मानी जाती है और इस समय इस राशि पर शनि की उतरती साढ़ेसाती चल रही है. ऐसे में ग्रहों को यह युति कुछ लोगों के लिए अवसर लेकर आएगा, तो कुछ के लिए चुनौतियां भी खड़ी कर सकता है. वर्तमान समय में बुध, सूर्य, मंगल और शुक्र सभी ग्रह मकर राशि में बैठे हुए हैं, लेकिन अब इनका प्रभाव कुंभ राशि के माध्यम से दूसरी राशियों पर पड़ेगा. तो आइए जानते हैं कि फरवरी में बनने जा रहा चतुर्ग्रही योग किन राशियों को फायदा दिलाएगा.
मिथुन राशि
कुंभ राशि में चतुर्ग्रही योग के बनने से मिथुन राशि वालों के लिए यह समय सकारात्मक रह सकता है. लोगों को नेतृत्व से जुड़े अवसर मिल सकते हैं. नौकरीपेशा लोगों के लिए यह समय जिम्मेदारियों के साथ पहचान दिलाने वाला साबित हो सकता है. करियर में आगे बढ़ने के मौके भी बन सकते हैं. व्यापार से जुड़े लोगों के लिए भी यह योग अनुकूल नजर आता है. निवेश से जुड़े नए अवसर सामने आ सकते हैं. पहले किए गए निवेश से रिटर्न मिलने के संकेत भी बन रहे हैं. यह समय निर्णय लेने और आगे बढ़ने का हो सकता है.
वृश्चिक राशि
वृश्चिक राशि वालों के लिए यह ग्रह योग राहत लेकर आ सकता है. लंबे समय से अटके या बिगड़े हुए काम धीरे-धीरे बनते नजर आ सकते हैं. किसी पुराने लेन-देन का निपटारा होने या रुका हुआ पैसा वापस मिलने की संभावना भी बन रही है. नौकरी और बिजनेस, दोनों क्षेत्रों में एक के बाद एक लाभ के योग दिखाई दे रहे हैं. आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत हैं. इस दौरान कोई बड़ी खरीदारी करने का मन भी बन सकता है. यह समय योजनाओं को अमल में लाने का हो सकता है.
कुंभ राशि
कुंभ राशि वालों के लिए यह समय खास माना जा रहा है. एक ही राशि में चार ग्रहों की मौजूदगी आपके जीवन में बड़े बदलाव का संकेत दे रही है. सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लोगों के लिए अच्छे अवसर बन सकते हैं, हालांकि सफलता उन्हीं को मिलेगी जो लगातार मेहनत और अनुशासन बनाए रखेंगे. यह समय धैर्य और समझदारी से आगे बढ़ने का है, क्योंकि शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव अभी भी बना हुआ है.
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