Chandra Grahan 2023: भारत में कुछ ऐसा दिखाई देगा चंद्र ग्रहण का नजारा, इन गलतियों से बचें

शरद पूर्णिमा यानी 28 अक्टूबर शनिवार को साल का आखिरी चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है. खास बात है कि यह खंडग्रास चंद्र ग्रहण होगा. भारत समेत कई देशों में साल के इस आखिरी चंद्र ग्रहण का नजारा देखा जा सकेगा.

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सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 अक्टूबर 2023,
  • अपडेटेड 8:25 PM IST

इस साल 28 अक्टूबर को चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है. यह साल का दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण भी होगा जो शरद पूर्णिमा के मौके पर पड़ रहा है. खास बात है कि यह पूर्ण नहीं बल्कि खंडग्रास चंद्र ग्रहण है, यानी यह आंशिक रूप में नजर आएगा. भारत समेत कई देशों में इस चंद्र ग्रहण को देखा जा सकता है. चंद्र ग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पहले शुरू हो जाएगा. चंद्र ग्रहण और इसके सूतक काल के दौरान कुछ चीजों का ध्यान रखना भी काफी जरूरी है. 

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आइए पहले आपको बताते हैं कि खंडग्रास यानी आंशिक रूप में चंद्र ग्रहण क्या है और कैसा नजर आता है. ज्योतिष एक्सपर्ट्स के अनुसार, 28 अक्टूबर शनिवार को भारत में लगने जा रहा चंद्र ग्रहण खंडग्रास रूप में देखा जाएगा. इसका अर्थ है कि चंद्रमा के ऊपर पृथ्वी की पूरी छाया नहीं पड़कर सिर्फ कुछ ही हिस्सों में पड़ेगी. इसी वजह से यह चंद्र ग्रहण आंशिक रूप में नजर आएगा. मान्यताओं के अनुसार, खंडग्रास यानी आंशिक चंद्र ग्रहण का धार्मिक महत्व भी होता है. इसी वजह से ही इस चंद्र ग्रहण का सूतक काल मान्य होता है.

खंडग्रास के अलावा पूर्ण चंद्र ग्रहण तब होता है, जब पृथ्वी सूर्य के चक्कर लगाती है और चंद्रमा पृथ्वी के चक्कर लगाता है. इसके बीच एक ऐसा पल आता है, जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा एक दूसरे की सीध में होते हैं. इसी प्रक्रिया में पृथ्वी चंद्रमा को ढक लेती है, जिस वजह से चांद पर सूरज की रोशनी नहीं आती है. यह ग्रहण काफी प्रभावशाली माना जाता है.

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वहीं जब चंद्रमा पर पृथ्वी की छाया नहीं बल्कि उपछाया पड़ती है तो इसे उपच्छाया चंद्र ग्रहण कहते हैं. इसकी खासियत है कि चांद के आकार पर जरा भी फर्क नहीं पड़ता है. इसका असर सिर्फ ऐसा होता है कि चंद्रमा की रोशनी में थोड़ा धुंधलापन नजर आता है और चांद का रंग सफेद की जगह मटमैला दिखता है.

चंद्र ग्रहण के दौरान इन चीजों में बरते सावधानियां
ज्योतिष एक्सपर्ट्स के अनुसार, चंद्र ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानियां बरतने की जरूरत होती है. खासतौर पर गर्भवती महिलाएं सूतक काल से ही घर के बाहर कदम न रखें. गर्भवती महिलाओं के अलावा अन्य लोग भी चंद्र ग्रहण या उसके सूतक काल में बाहर निकलने से बचाव करें. 

दरअसल, वैदिक शास्त्र में कहा गया है कि चंद्र ग्रहण के दौरान घर से बाहर इसलिए नहीं जाना चाहिए, क्योंकि ग्रहण काल में चंद्रमा की किरणें दूषित हो जाती हैं. इस वजह से बाहर जाने वाले शख्स पर इसका नकारात्मक असर भी पड़ सकता है. 

एक्सपर्ट्स की मानें तो चंद्र ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को नुकीली वस्तु जैसे सुई, चाकू, कैंची भी नहीं रखनी चाहिए. साथ ही चंद्र ग्रहण के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए गर्भवती स्त्रियों को अपने गर्भ को काले धागे से बांध देना चाहिए. 

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वहीं चंद्र ग्रहण के दौरान सामान्य लोग भी इन नियमों का पालन करें. भगवान की पूजा-पाठ में ध्यान दें. हालांकि, पूजा-अर्चना के दौरान किसी भी मूर्ति को हाथ नहीं लगाना है. इसके साथ ही ग्रहण काल में खाना खाने से भी बचाव करें. अगर खाने को ग्रहण के असर से बचाना चाहते हैं तो पकाते समय उसमें पवित्र तुलसी के पौधे की पत्तियां डाल दें.

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