Chanakya Niti: आचार्य चाणक्य को भारत का सबसे विद्वान अर्थशास्त्री और रणनीतिकार माना जाता है. चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र में कुछ ऐसी जगहों का जिक्र किया है, जहां इंसान को एक पल भी नहीं ठहरना चाहिए. आज भी लोग चाणक्य द्वारा कही गई इस बात का प्रमुखता से पालन कर रहे हैं. आइए विस्तार से जानते हैं.
श्लोक
यस्मिन् देशे न सम्मानो न वृत्तिर्न च बान्धवाः.
न च विद्यागमोऽप्यस्ति वासस्तत्र न कारयेत् ॥
इस श्लोक के माध्यम से चाणक्य ने कहा है कि जिस देश में सम्मान न हो, जहां कोई आजीविका न मिले, जहां अपना कोई भाई-बंधु न रहता हो और जहां पठन-पाठन संभव न हो. ऐसी जगह पर व्यक्ति को कभी नहीं ठहरना चाहिए.
1. जहां सम्मान न मिले
व्यक्ति के जीवन में सम्मान का बड़ा महत्व होता है. इसलिए एक व्यक्ति सारी जिंदगी मेहनत करता है. अपमान और तिरस्कार से सम्मान की बुनियाद कमजोर पड़ जाती है. व्यक्ति का आत्मविश्वास डगमगाने लगता है. इसलिए जिस जगह सम्मान न हो, वहां कभी ठहरना नहीं चाहिए.
2. जहां आजीविका का साधन न हो
जीवन को चलाने के लिए आय या आजीविका का होना बहुत जरूरी है. जिस जगह रोजगार या कमाई का साधन न हो, ऐसी जगह कभी नहीं रहना चाहिए. आर्थिक अस्थिरता व्यक्ति को चिंता और असुरक्षा में डाल देती है.
3. जहां अपने लोग न हों
परिवार, रिश्तेदार और अपने लोग जीवन की मुश्किल घड़ियों में सहारा बनते हैं. जिस जगह आपका कोई परिचित हो और कोई मदद करने वाला न हो, ऐसी जगह भी कभी नहीं रुकना चाहिए. मुश्किल की घड़ी में ऐसी जगह अक्सर नर्क के समान लगने लगती है.
4. जहां शिक्षा का अवसर न हो
शिक्षा व्यक्ति की सही मायने में इंसान बनाती है. जिस स्थान पर शिक्षा या ज्ञान प्राप्ति का अवसर उपलब्ध न हो, वहां बौद्धिक और सामाजिक रूप से इंसान का विकास रुक जाता है. ऐसी जगह पर अराजकता पैदा होने का भय भी रहता है.
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