Chanakya Niti: आचार्य चाणक्य को बड़े रणनीतिकारों और विचारकों में गिना जाता है. चाणक्य मानते थे कि इंसान की कामयाबी सिर्फ उसकी डिग्री या प्रतिभा से नहीं, बल्कि उसकी रोजमर्रा की आदतों से तय होती है. कई बार हम कुछ ऐसी छोटी-छोटी गलतियां कर बैठते हैं, जो धीरे-धीरे हमारे करियर, पैसों और मन की शांति को नुकसान पहुंचाती हैं. अगर आपको लगता है कि जिदगी में आगे बढ़ने में रुकावट आ रही है, तो इन पांच बातों पर जरूर ध्यान दें.
आलस: तरक्की की सबसे बड़ी रुकावट
चाणक्य के अनुसार आलस ऐसा दुश्मन है, जो बिना सामने आए ही इंसान को हारने पर मजबूर कर देता है. जो लोग अपने काम को टालते रहते हैं, वे समय के साथ पीछे छूट जाते हैं. समय किसी के लिए नहीं रुकता. जो व्यक्ति अपने समय की कद्र नहीं करता, उससे सफलता और धन दोनों दूर ही रहते हैं.
गलत लोगों की संगति
चाणक्य कहते हैं कि इंसान जैसा बनता है, वैसी ही उसकी संगत होती है. नकारात्मक सोच रखने वाले और गलत आदतों में फंसे लोग आपकी तरक्की में सबसे बड़ी रुकावट बनते हैं. जो लोग हर समय शिकायत करते रहते हैं या आपको हतोत्साहित करते हैं, उनसे दूरी बनाना ही बेहतर है. मेहनती और सकारात्मक लोगों के साथ रहना आगे बढ़ने का पहला कदम है.
सीखने से भागना
चाणक्य नीति में ज्ञान को सबसे बड़ा धन माना गया है. जो व्यक्ति यह सोच लेता है कि उसे सब कुछ आता है या जो नई चीज़ें सीखने में रुचि नहीं रखता, उसका आगे बढ़ना रुक जाता है. आज की दुनिया तेजी से बदल रही है. किताबें पढ़ना, नई स्किल सीखना और खुद को अपडेट रखना आपको दूसरों से आगे रखता है.
पैसों का गलत इस्तेमाल
चाणक्य कहते हैं कि पैसा मुश्किल समय में सबसे बड़ा सहारा बनता है. जो लोग बिना सोचे-समझे खर्च करते हैं, बचत नहीं करते या भविष्य की योजना नहीं बनाते, वे संकट के समय अकेले पड़ जाते हैं. पैसों की कद्र न करना आपकी आर्थिक स्थिति बिगाड़ सकता है. समझदारी इसी में है कि आमदनी से कम खर्च किया जाए और आने वाले समय के लिए बचत की जाए.
गुस्सा और अधैर्य
आचार्य चाणक्य मानते थे कि गुस्सा इंसान की सोचने-समझने की शक्ति को खत्म कर देता है. जल्दबाजी या गुस्से में लिया गया फैसला अक्सर बाद में पछतावे का कारण बनता है. धैर्य वही ताकत है जो कठिन हालात में भी सही रास्ता दिखाती है. भावनाओं में बहने के बजाय शांत दिमाग से सोचकर बनाई गई रणनीति ही असली जीत दिलाती है.
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