Chaitra Amavasya 2026: चैत्र अमावस्या कब है? क्यों कहते हैं 'भूतड़ी अमावस्या'!

Chaitra Amavasya 2026: चैत्र अमावस्या 2026 कब है? इसे 'भूतड़ी अमावस्या' क्यों कहा जाता है? जानें पितृ तर्पण की सही विधि, तिथि, और नकारात्मक ऊर्जा दूर करने के अचूक उपाय जो आपके जीवन में खुशहाली लाएंगे.

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चैत्र अमावस्या पर जरूर करें ये उपाय चैत्र अमावस्या पर जरूर करें ये उपाय

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 9:56 AM IST

Chaitra Amavasya 2026: हिंदू कैलेंडर के अनुसार, चैत्र मास की अमावस्या का विशेष धार्मिक महत्व है. यह तिथि न केवल पितृ दोष से मुक्ति का माध्यम है, बल्कि आत्मिक शुद्धि और नकारात्मकता को दूर करने का भी दिन है.  इस अमावस्या पर विधि-विधान से की गई पूजा-अर्चना से जीवन में खुशहाली आती है. 

तिथि और सही समय
पंचांग गणना के अनुसार, चैत्र अमावस्या की शुरुआत 18 मार्च 2026 को सुबह 08:25 बजे होगी.  इसका समापन 19 मार्च 2026 को सुबह में 06:52 बजे हो जाएगा. स्नान, दान और तर्पण जैसे महत्वपूर्ण कार्य 19 मार्च को करना शास्त्रों के अनुसार सबसे श्रेष्ठ रहेगा. 

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'भूतड़ी अमावस्या' के पीछे का रहस्य
चैत्र अमावस्या को लोक भाषा में 'भूतड़ी अमावस्या' भी कहा जाता है.  मान्यताओं के अनुसार, इस दिन ब्रह्मांड में अदृश्य शक्तियों का प्रभाव बढ़ जाता है.  विद्वानों का मानना है कि यह दिन मुख्य रूप से अपने पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति कृतज्ञता जताने का है. इसे 'पितृ अमावस्या' भी माना जाता है, जहां पितृ तर्पण से परिवार पर आने वाली बाधाएं टल जाती हैं.

पितरों की शांति के लिए जरूरी अनुष्ठान
अपने पूर्वजों का आशीर्वाद पाने के लिए चैत्र अमावस्या पर काले तिल मिश्रित जल से तर्पण करना बहुत शुभ माना गया है. ऐसा करने से पितृ तृप्त होते हैं और पितृ दोष का नकारात्मक प्रभाव कम होता है. श्रद्धा के साथ किया गया दान परिवार की सुख-समृद्धि का आधार बनता है.

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नकारात्मकता दूर करने के प्रभावी उपाय
हनुमान जी और शिव आराधना: भय और नकारात्मक ऊर्जा से बचने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ करें. साथ ही, शिवलिंग पर दूध और जल अर्पित कर 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करने से जीवन की जटिलताएं समाप्त होती हैं. 

पीपल की सेवा: इस दिन पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का चार मुख वाला (चौमुखा) दीपक जलाना आर्थिक समस्याओं का समाधान माना गया है. वृक्ष की सात बार परिक्रमा करना विशेष फलदायी है.

पशु-पक्षियों की सेवा: सनातन धर्म में जीवों को अन्न-जल देना सबसे बड़ा पुण्य है. चींटियों को आटा-चीनी, गाय को हरा चारा और कौओं को भोजन कराना पितरों को प्रसन्न करने का सरल मार्ग है. 

घर की शुद्धि: अमावस्या पर घर की गहरी सफाई करें. फालतू सामान को बाहर निकालना घर में नई और शुद्ध ऊर्जा के आगमन का संकेत है.  शाम के वक्त घर की दक्षिण दिशा में घी का दीपक जलाने से घर में शांति का वास होता है.

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