Buddha Purnima 2026: कब है बुद्ध पूर्णिमा? नोट करें स्नान-दान का शुभ समय और उपाय

Buddha Purnima 2026: बुद्ध पूर्णिमा, जिसे वैशाख पूर्णिमा या बुद्ध जयंती भी कहा जाता है, हिंदू और बौद्ध दोनों ही धर्मों के लिए साल का सबसे पवित्र दिन माना जाता है. यह पर्व भगवान गौतम बुद्ध के प्रति सम्मान और उनकी शिक्षाओं को याद करने का दिन है.

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भगवान बुद्ध को श्रीहरि विष्णु का नौवां अवतार माना जाता है. (Phtot: ITG) भगवान बुद्ध को श्रीहरि विष्णु का नौवां अवतार माना जाता है. (Phtot: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 21 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 2:17 PM IST

Buddha Purnima 2026: वैशाख महीने की पूर्णिमा का दिन हिंदू और बौद्ध दोनों धर्मों के लिए बहुत बड़ा दिन होता है. इसे बुद्ध पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है. माना जाता है कि इसी दिन दुनिया को शांति का संदेश देने वाले भगवान गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था. दिलचस्प बात यह है कि यह दिन सिर्फ बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए ही नहीं, बल्कि सनातनी परंपरा में भी बेहद खास है, क्योंकि भगवान बुद्ध को श्रीहरि विष्णु का नौवां अवतार माना जाता है.

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कब है बुद्ध पूर्णिमा
पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 30 अप्रैल की रात को ही शुरू हो जाएगी, लेकिन उदय तिथि (सूर्योदय के समय की तिथि) के आधार पर बुद्ध पूर्णिमा का व्रत और स्नान 1 मई 2026, शुक्रवार को होगा.

पूर्णिमा शुरू: 30 अप्रैल, रात 09:13 बजे से

पूर्णिमा समाप्त: 1 मई, रात 10:52 बजे तक

पूजा और स्नान के शुभ मुहूर्त
अगर आप इस दिन पवित्र स्नान या विशेष पूजा करना चाहते हैं, तो इन समयों का ध्यान रखें:

सुबह का स्नान (ब्रह्म मुहूर्त): सुबह 04:15 से 04:58 तक.

दिन की विशेष पूजा (अभिजीत मुहूर्त): सुबह 11:52 से दोपहर 12:45 तक.

शाम की प्रार्थना (अमृत काल): शाम 06:56 से रात 08:41 तक.

क्यों खास है यह दिन?
बुद्ध पूर्णिमा को तिहरा पर्व भी कहा जाता है क्योंकि भगवान बुद्ध के जीवन की तीन बड़ी घटनाएं इसी दिन हुई थीं. उनका जन्म, उन्हें ज्ञान की प्राप्ति और उनका महापरिनिर्वाण. इसके अलावा, हिंदू धर्म में उन्हें भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है, इसलिए इस दिन विष्णु जी की पूजा करने से विशेष आशीर्वाद मिलता है.

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सुख-समृद्धि के लिए आसान उपाय
इस दिन कुछ छोटे काम करके आप मानसिक शांति और घर में बरकत ला सकते हैं.

पीपल के पेड़ की पूजा: पूर्णिमा पर पीपल में मां लक्ष्मी का वास होता है. पेड़ की जड़ में जल चढ़ा कर दीपक जलाएं. इससे पितृ दोष दूर होता है.

चंद्रमा को अर्घ्य: रात में चंद्रमा को दूध मिला हुआ जल चढ़ाएं. इससे मानसिक तनाव कम होता है. इससे मन शांत रहता है.

सत्यनारायण कथा: घर में सुख-शांति के लिए सत्यनारायण भगवान की कथा सुनना बहुत शुभ होता है.

सफेद चीजों का दान: इस दिन दूध, दही, चावल या चीनी जैसी सफेद चीजों का दान करने से पुण्य मिलता है.

भद्रा का साया
1 मई की सुबह 05:41 से 10:00 बजे तक भद्रा रहेगी. लेकिन ज्योतिष के अनुसार, चंद्रमा तुला राशि में होने की वजह से इस भद्रा का असर जमीन पर नहीं होगा. इसलिए आप बिना किसी डर के अपनी पूजा और शुभ कार्य कर सकते हैं.

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