Basant Panchami visarjan: क्या सरस्वती पूजा के अगले दिन मूर्ति विसर्जन करना सही है, जान लें नियम

Basant Panchami visarjan: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बसंत पंचमी पर स्थापित मां सरस्वती की मूर्ति का विसर्जन अगले दिन, यानी षष्ठी तिथि को करना शुभ माना जाता है. पंचांग के अनुसार सूर्योदय के बाद का समय विसर्जन के लिए उपयुक्त होता है, जबकि सूर्यास्त के बाद विसर्जन से बचने की सलाह दी जाती है.

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मां सरस्वती की मूर्ति का विसर्जन कब करें और क्यों मां सरस्वती की मूर्ति का विसर्जन कब करें और क्यों

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 23 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:06 PM IST

Basant Panchami visarjan: बसंत पंचमी आज मनाई जा रही है. आज के दिन लोग अपने घरों में मां सरस्वती की प्रतिमा या उनका चित्र स्थापित कर पूजा-अर्चना कर रहे हैं. मान्यता है कि आज ही मां सरस्वती का अवतरण हुआ था, इसलिए इस दिन का विशेष धार्मिक महत्व होता है. परंपरा के अनुसार, आज की पूजा के बाद अगले दिन यानी षष्ठी तिथि को मूर्ति विसर्जन करना शुभ माना जाता है. कई लोगों के मन में यह सवाल होता है कि क्या मूर्ति को आज ही विसर्जित कर देना चाहिए या कुछ दिनों तक घर में रखना सही रहेगा. शास्त्र और धार्मिक परंपराएं साफ कहती हैं कि अगले दिन विधिपूर्वक विसर्जन करना ही सबसे उचित  तरीका है. 

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इसी परंपरा के अनुसार आज पूरे विधि-विधान से पूजा की जा रही है .  कल श्रद्धा के साथ मां सरस्वती का विसर्जन किया जाएगा, जिससे पूजा का विधिपूर्ण समापन होगा.

मूर्ति स्थापना का महत्व

बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की मूर्ति स्थापित करना अत्यंत शुभ माना जाता है. यह दिन “अबूझ मुहूर्त” वाला होता है, यानी किसी विशेष मुहूर्त की चिंता किए बिना भी शुभ कार्य की शुरुआत की जा सकती है. मां सरस्वती ज्ञान, बुद्धि, वाणी और कला की देवी हैं. इस दिन उनकी मूर्ति की स्थापना से ज्ञान और समझ का विकास होता है, साथ ही परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है.

विसर्जन का महत्व

हिंदू परंपरा में किसी भी मूर्ति की स्थापना के बाद उसका विसर्जन करना आवश्यक माना जाता है. बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की मूर्ति स्थापित करने के बाद अगले दिन, यानी षष्ठी तिथि को विसर्जन करने की परंपरा है.  इसका कारण यह है कि पूजा का समय सीमित होता है. मूर्ति को लंबे समय तक घर में रखने से उसकी ऊर्जा का संतुलन प्रभावित हो सकता है. अगले दिन विसर्जन करने से मां की कृपा स्थायी रूप से घर में बनी रहती है और पूजा का विधिपूर्ण समापन होता है. 

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विसर्जन का उचित समय और विधि

मूर्ति विसर्जन की प्रक्रिया को सरल और श्रद्धा-पूर्ण रखना चाहिए.  विसर्जन से पहले मां सरस्वती की अंतिम पूजा की जाती है.  इस दौरान धूप, दीप, पुष्प और भोग अर्पित करें. अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा प्रार्थना करें.  इसके बाद पूजा के कलश को हल्के से हिलाकर उसके जल का छिड़काव पूरे घर में करें, जिससे घर में विद्या, शांति और सकारात्मकता बनी रहती है.

इसके पश्चात मां सरस्वती की मूर्ति को स्वच्छ वस्त्र में सावधानीपूर्वक लपेटें और किसी पवित्र पात्र में जल भरकर विसर्जन करें. विसर्जन के समय श्रद्धा के साथ “ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः” मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है. 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की मूर्ति स्थापना जितनी आवश्यक है, उतना ही महत्वपूर्ण अगले दिन विधिपूर्वक विसर्जन करना भी है.  सही समय और उचित विधि से किया गया विसर्जन मां की कृपा को बनाए रखता है और घर में ज्ञान, बुद्धि तथा सुख-शांति का वास होता है. 

पंचांग के मुताबिक, बसंत पंचमी के बाद आने वाली षष्ठी तिथि में सूर्योदय के बाद मूर्ति विसर्जन करना शुभ माना जाता है. सूर्यास्त के बाद विसर्जन करने से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि यह समय धार्मिक दृष्टि से अनुकूल नहीं माना जाता. 

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