Basant Panchami 2026: बसंत पंचमी का त्योहार 23 जनवरी को मनाया जाएगा. इस दिन मां सरस्वती की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है. साल के कुछ विशेष शुभ काल में से एक होने के कारण इसे 'अबूझ मुहूर्त' भी कहा जाता है. इसलिए इस दिन विवाह, निर्माण कार्य या कोई भी शुभ कार्य बेझिझक किया जा सकता है. हालांकि हिंदू कैलेंडर में बसंत पंचमी के अलावा और भी कुछ विशेष तिथियां व दिन हैं, जिन पर पंचांग में मुहूर्त देखे बिना शुभ-मांगलिक कार्य कर सकते हैं.
1. फुलेरा दूज
फाल्गुन शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को फुलेरा दूज का त्योहार मनाया जाता है, जो होली से कुछ दिन पहले ही आता है. यह दिन भी अबूझ मुहूर्त की श्रेणी में गिना जाता है. इस दिन श्रीकृष्ण और राधा रानी की संयुक्त पूजा का विधान है है. वर्ष 2026 में फुलेरा दूज 19 फरवरी को मनाया जाएगा. कहते हैं कि इस दिन इस दिन विवाह, गृह प्रवेश या नए कार्य आरंभ करना बहुत शुभ होता है.
2. अक्षय तृतीया
वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को अक्षय तृतीया कहा जाता है. इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना का विशेष महत्व बताया गया है. मान्यता है कि इस दिन किया गया दान, निवेश या नई शुरुआत अक्षय फल देती है. साल 2026 में अक्षय तृतीया 19 अप्रैल को मनाई जाएगी.
3. गंगा दशहरा
ज्येष्ठ शुक्ल दशमी तिथि को गंगा दशहरा मनाया जाता है, जो मां गंगा के धरती पर अवतरण का प्रतीक है. इस दिन स्नान, दान और पूजा-पाठ करने से पुण्य की प्राप्ति होती है. यदि गंगा स्नान संभव न हो, तो घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है. इस दिन भी शुभ कार्यों की शुरुआत उत्तम मानी जाती है. साल 2026 में गंगा दशहरा 25 मई को मनाया जाएगा.
4. भड़ली नवमी
आषाढ़ शुक्ल नवमी को भड़ली नवमी कहा जाता है. ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार यह तिथि अपने आप में पूर्ण शुभ मुहूर्त होती है. इस दिन बिना पंचांग देखे विवाह, गृह प्रवेश या नए काम की शुरुआत की जा सकती है. इस वर्ष भड़ली नवमी 22 जुलाई को पड़ रही है.
5. देवउठनी एकादशी
कार्तिक शुक्ल एकादशी को देवउठनी एकादशी कहा जाता है. मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु योग निद्रा से जागते हैं और इसके साथ ही सभी शुभ कार्यों पर लगी रोक समाप्त हो जाती है. विवाह सहित अन्य मांगलिक कार्य इसी दिन से शुरू होते हैं. साल 2026 में देवउठनी एकादशी 20 नवंबर को मनाई जाएगी.
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