Bakra Eid 2026 Date: आज या कल, भारत में कब मनाई जाएगी ईद उल-अज़हा? नोट करें सही डेट

Bakra Eid 2026 Date: ईद-उल-अजहा खुशियों और भाईचारे का त्योहार है. ईद-उल-अजहा 27 या 28 मई को मनाई जाएगी? जानें चांद के दीदार के आधार पर कन्फर्म तारीख, महत्व और इस खास त्योहार से जुड़ी जरूरी बातें.

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बकरीद डेट 2026 (Photo: ITG) बकरीद डेट 2026 (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 मई 2026,
  • अपडेटेड 10:13 AM IST

Bakra Eid 2026 Date: ईद-उल-अज़हा, जिसे बकरीद भी कहा जाता है, इस्लाम के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है. यह त्योहार हर साल हजरत इब्राहिम की अल्लाह के प्रति अटूट आस्था और कुर्बानी (त्याग) की याद में मनाया जाता है. दुनिया भर के मुसलमान इसे बड़ी धूमधाम से मनाते हैं. इस दिन मस्जिद में विशेष नमाज अदा की जाती है और अल्लाह की इबादत के लिए कुर्बानी दी जाती है. हर साल की तरह इस बार भी ईद की तारीख को लेकर लोगों में कंफ्यूजन बना हुआ है. कुछ लोगों का मानना है कि बकरीद इस बार 27 मई को मनाई जाएगी और कुछ का कहना है कि 28 मई सही डेट है. तो आइए जानते हैं कि ईद मनाई जाएगी?

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क्या है ईद-उल-अज़हा की तारीख? 

देश की प्रमुख चांद कमेटियों के अनुसार, बकरीद 28 मई यानी कल मनाई जाएगी. इसके अलावा, सऊदी के देशों में बकरीद 27 मई यानी आज मनाई जा रही है.

ईद-उल-अज़हा का महत्व

ईद-उल-अज़हा को 'कुर्बानी की ईद' भी कहा जाता है. यह त्योहार हजरत इब्राहिम की खुदा के प्रति अटूट आस्था, त्याग और समर्पण की भावना का प्रतीक है. यह पर्व दुनिया भर के मुसलमानों के लिए धैर्य, परोपकार और अल्लाह की रजा में राजी रहने का संदेश लेकर आता है. 

इस पर्व की मुख्य विशेषताएं-

- ईद की नमाज: बकरीद के दिन सुबह मुस्लिम समुदाय के लोग ईदगाह या मस्जिदों में इकट्ठा होकर विशेष नमाज अदा करते हैं और देश में अमन-चैन की दुआ मांगते हैं.

- कुर्बानी की परंपरा: नमाज के बाद नियमानुसार कुर्बानी दी जाती है. इस परंपरा का उद्देश्य समाज के गरीब और जरूरतमंद लोगों तक मदद पहुंचाना है.

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- भाईचारे का संदेश: यह दिन परिवार, रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ खुशियां बांटने का होता है. लोग एक-दूसरे को ईद की मुबारकबाद देते हैं और दावतों का आयोजन करते हैं.

कैसे मनाया जाता है ईद का त्योहार?

इस दिन सभी लोग एक साथ मिलकर खुशियां मनाते हैं. दिलचस्प बात यह है कि यह त्योहार मक्का में होने वाली हज यात्रा के अंतिम दिनों के साथ पड़ता है, जो इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है. यही कारण है कि इस त्योहार का महत्व और भी बढ़ जाता है. इस मौके पर बहुत से लोग दान और परोपकार के कामों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं. 

आपसी सौहार्द का त्योहार

ईद-उल-अज़हा का त्योहार केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आपसी भाईचारे, सामाजिक समरसता और एकजुटता का भी संदेश देता है. समाज के सभी वर्गों के लोग एक-दूसरे को बधाई देकर इस दिन की खुशियों में शामिल होते हैं.

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