Ashtami Navami 2024: शुक्रवार को एक साथ होगी अष्टमी और नवमी, जानें कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त

Ashtami Navami 2024: शारदीय नवरात्रि का पर्व आज अष्टमी और नवमी की पूजा के बाद खत्म हो जाएगा. यह पर्व कन्या पूजन के साथ समाप्त हो जाता है. आखिरी दिन देवी अपने भक्तों को आशीर्वाद देकर घर से विदा हो जाती हैं.

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नवरात्रि का आखिरी दिन नवरात्रि का आखिरी दिन

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 10 अक्टूबर 2024,
  • अपडेटेड 12:27 AM IST

Ashtami Navami 2024: शारदीय नवरात्रि का महापर्व शुक्रवार 11 अक्टूबर को कन्या पूजन के साथ समाप्त हो जाएगा. इस बार अष्टमी और नवमी, दोनों की पूजा एक साथ ही की जाएगी. ज्योतिष के अनुसार, इस साल सप्तमी और अष्टोमी एक ही दिन 10 अक्टूबर को थी. ऐसे में शास्त्रों में सप्तमी युक्त अष्टमी को निषेध माना गया है. इसी वजह से इस साल नवरात्रि में अष्टमी पर महागौरी की पूजा और कन्या पूजन दोनों शुक्रवार, 11 अक्टूबर को ही किए जाएंगे. और इसी दिन ही महानवमी का कन्या पूजन और मां सिद्धिदात्री का पूजन होगा. 

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वैदिक पंचांग के मुताबिक, अष्टमी तिथि इस साल 10 अक्टूबर को दोपहर 12.31 बजे से शुरू हो रही जो 11 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 06 मिनट पर समाप्त होगी. जैसे ही अष्टमी तिथि समाप्त होगी, वैसे ही नवमी तिथि शुरू हो जाएगी, जिसका समापन 12 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 57 मिनट पर होगा. इसी वजह से 11 अक्टूबर को अष्टमी और नवमी का पूजन किया जाएगा.

अष्टमी-नवमी पर कन्या पूजन का मुहूर्त 

पहला शुभ मुहूर्त- 11 अक्टूबर को सुबह 5 बजकर 25 मिनट से लेकर सुबह 06 बजकर 20 मिनट तक अष्टमी-नवमी पर कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त  होगा. वहीं दूसरे शुभ मुहूर्त की बात करें तो आप चाहें तो अभिजीत मुहूर्त में भी कन्या पूजन कर सकते हैं. शुक्रवार को सुबह 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा.

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अष्टमी-नवमी पर कन्या पूजन का महत्व 

नवरात्रि नारी शक्ति के सम्मान और कन्याओं को पूजने का भी पर् कहा गया है. इसी वजह से नवरात्रि में कुंवारी कन्याओं को पूजने और भोजन कराने की परंपरा भी है. अष्टमी और नवमी पर कन्या पूजन के बगैर नवरात्रि की तपस्या अधूरी रह जाती है. अष्टमी-नवमी से एक दिन पहले कन्याओं को आमंत्रित करें. फूलों की वर्षा से कन्याओं का स्वागत करें. एक थाल में इनके पैर धुलवाएं और इनका आशीर्वाद लें. कन्याओं के साथ एक बटुक को जरूर बैठाएं. फिर सभी को हलवा, चना और पूरी का भोजन कराएं. आखिर में जाते समय दान-दक्षिणा देकर कन्याओं का आशीर्वाद लें.

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