Akshaya Tritiya 2026: 19 या 20 अप्रैल, अक्षय तृतीया कब है? जानें शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

Akshaya Tritiya 2026: इस साल वैशाख शुक्ल तृतीया तिथि 19 अप्रैल को सुबह 10 बजकर 45 मिनट पर आरंभ होगी. 20 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 49 मिनट पर यह तिथि समाप्त होगी. उदया तिथि के आधार पर रविवार, 19 अप्रैल को यह त्योहार मनाया जाएगा.

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अक्षय तृतीया का साल का सबसे अबूझ मुहूर्त माना जाता है. (Photo: ITG) अक्षय तृतीया का साल का सबसे अबूझ मुहूर्त माना जाता है. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 18 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 3:45 PM IST

Akshaya Tritiya 2026: हर साल वैशाख शुक्ल तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया का त्योहार मनाया जाता है. मान्यता है कि इस दिन पूजा-पाठ और दान-धर्म आदि के कार्यों से अक्षय फल की प्राप्ति होती है. यानी इस दिन शुभ कर्मों के बदले इंसान के हिस्से में आए पुण्य सारी उम्र उसे लाभ देते हैं. यह पावन तिथि धन और समृद्धि की देवी माता लक्ष्मी को समर्पित होती है. इस दिन न केवल पूजा-पाठ से लाभ होता है, बल्कि सोने-चांदी जैसी मूल्यवान चीजें खरीदने से भी सौभाग्य में वृद्धि होती है. आइए अक्षय तृतीया की तिथि शुभ मुहूर्त और पूजन विधि के बारे में जानते हैं.

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अक्षय तृतीया 2026 की तिथि
द्रिग पंचांग के अनुसार, इस साल वैशाख शुक्ल तृतीया तिथि 19 अप्रैल को सुबह 10 बजकर 45 मिनट पर आरंभ होगी. 20 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 49 मिनट पर यह तिथि समाप्त होगी. उदया तिथि के आधार पर रविवार, 19 अप्रैल को यह त्योहार मनाया जाएगा.

अक्षय तृतीया 2026 का शुभ मुहूर्त
19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के दिन पूजा और खरीदारी के दो बड़े शुभ मुहूर्त रहने वाले हैं. आप सुविधानुसार किसी भी मुहूर्त में पूजा-पाठ या सोने-चांदी की खरीदारी कर सकते हैं.

पहला शुभ मुहूर्त- 19 अप्रैल को सुबह 10 बजकर 49 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 20 मिनट तक

दूसरा शुभ मुहूर्त- 19 अप्रैल सुबह 10 बजकर 49 मिनट से लेकर 20 अप्रैल सुबह 5 बजकर 51 मिनट तक

अक्षय तृतीया की पूजा विधि
अक्षय तृतीया के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें. इसके बाद एक चौकी पर माता लक्ष्मी और विष्णु जी की प्रतिमा स्थापित करें. दोनों की संयुक्त पूजा से इसका लाभ ज्यादा होता है. फिर भगवान विष्णु को चंदन और माता लक्ष्मी को कुमकुम का तिलक लगाएं. विष्णु जी को पीले और लक्ष्मी जी को कमल के फूल अर्पित करें. इसके बाद विष्णु जी और लक्ष्मी जी को जौ, गेंहूं, सत्तू, चने की दाल, गुड़, खीर या मीठे भात का भोग लगाएं. आखिर में लक्ष्मीनारायण की कथा का पाठ करें. भगवान से हाथ जोड़कर मंगलकामना करें.

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अक्षय तृतीया के दिन दिन जरूरतमंदों और गरीबों को दान देना भी बहुत पुण्यकारी माना गया है. मान्यता है कि इस दिन किए गए जप, तप, दान और हवन का फल अक्षय रहता है और व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है.

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